The Rig Veda (ऋग्वेद) is the oldest of the four Vedas and one of the most ancient religious texts in the world. Composed in Vedic Sanskrit by the Rishis (sages) of ancient India, it is a collection of 1,028 hymns (Suktas) organized into 10 books called Mandalas. These hymns are addressed to various deities — Agni (fire), Indra (king of gods), Soma (sacred plant), Varuna (cosmic order), Surya (sun), and many others.

Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం
stroms  Srimad Bhagavad Gita  Valmiki Ramayanam/Valmiki Ramayanam

Rig Veda - ऋग्वेद


Mandalas 1 - (2006 verses)


Mandala 1 · Verse 1
ऋतुर्जनिनित्री तस्या अपस्पारि मधु जात आविषिशासु वर्धते. तदाहना अभवत् पिप्युषी पयोडशोः पीयूषं प्रथमं तदुक्व्यम्.. (१)

The season, the mother, gave birth to the sweet essence of life, which grew with desire. Then, the nourishing milk flowed, the first divine nectar, which is praised.

वर्षा ऋतु सोम की जननी है. वह जिस जल से उत्पन्न होता है, जिसमें बढ़ता है, उसीमें बाद में प्रविष्ट हो जाता है. जो सोम जल का अंश धारण करता हुआ बढ़ता है, वही निचोड़ने योग्य है एवं उसीका रस रूपी अंश इंद्र का पहला भाग है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
सझीमा यन्ति परि बिभ्रतीः पयो विश्वृभ्न्याय प्र भरन्त भोजनम्. समानो अध्या प्रवतामनुष्ये यस्ताकृणोः प्रथमं सास्युक्व्यः.. (२)

May the mothers, bearing nourishment, bring forth food for the welfare of all. May all beings share in this sustenance, for the one who created it first is worthy of praise.

जल धारण करने वाली नदियां आपस में मिलकर चारों ओर बह रही हैं एवं जल के स्वामी सागर को भोजन पहुंचाती हैं. नीचे की ओर बहने वाले जलों का रास्ता एक समान है. जिस इंद्र ने प्राचीन काल में ये सब काम किए हैं, वह प्रशंसा के योग्य है. (२)


Mandala 1 · Verse 3
अन्वेको वदति यद्दाति तद्रूपा मिनन्तदपा एक ईयते. विश्व एकास्य विनृदस्ति क्षेते यस्ताकृणोः प्रथमं सास्युक्व्यः.. (३)

The One who gives is indeed that very form; He alone is perceived as the All. The universe is His heart, and He is the one who first created it.

Mandala 1 · Verse 4
अध्वर्यवो य उरणं जघान नव चखंस्ं नवर्तिं च बाहन्। यो अर्बुदंमव नीचा बबाधे तमिन्द्रं सोमस्य भृथे हिनोत.. (४)

Praise Indra, the slayer of Urana and Navagva, who subdued Arbuda, with the Soma offering.

हे अध्वर्युजनो! जिन इंद्र ने निन्यानवे भुजाओं का प्रदर्शन करने वाले उरण असुर को मारा तथा अर्बुद को नीचे की ओर मुख करके समाप्त किया, उन इंद्र के लिए सोम रस भरने के लिए पात्र लाओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अध्वर्यवो यः स्वश्रं जघान यः शुष्मंशुषं यो व्यंस्म्। यः पिपृं नमूचिं यो रुधिक्कां तस्मा इन्द्रायन्घसो जुहोते.. (५)

To Indra, who slew Svashra, Shushumsha, Vyamsam, Pipru, Namuchi, and Rudhikra, let us offer oblations.

हे अध्वर्युजनो! जिन इंद्र ने अश्न राक्षस को सरलतापूर्वक नष्ट किया तथा न मरने योग्य शुष्प असुर को बिना गरदन का बना डाला एवं जिन्होने पिपृ नुमुचि तथा रुधिक्का का विनाश किया, उन्हीं इंद्र के लिए सोम रस लाओ. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अध्वर्यवो यः शतं शम्बरस्य पुरो विभदाऽऽश्मनेव पूर्वी:। यो वर्चिंनः शतमिन्र्दः सहसम्पवापद्धरता सोममस्म.. (६)

Indra, the powerful, shattered a hundred fortresses of Sambara, just as the wind breaks clouds, and brought forth the Soma.

हे अध्वर्युजनो! जिन इंद्र ने शंबर असुर की प्राचीन सौ नगरियों को वज्र द्वारा नष्ट-भ्रष्ट कर दिया एवं जिन्होने वची के सौ हजार पुत्रों को मारकर एक साथ ही धरती पर गिरा दिया, उन्हीं इंद्र के लिए सोम ले आओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अध्वर्यवो यः शतमं सहस्रं भूम्या उपस्थेऽवपजजघन्। कुत्स्यस्यायोरितिथिवस्य वीरान्न्यावृणभर्ता सोममस्म.. (७)

The Adhvaryus, having sown a hundred, a thousand, in the lap of the earth, have brought forth heroes for Kutsa, the guest of iron, and the Soma.

हे अध्वर्युजनो! जिस शत्रुहननकर्ता इंद्र ने सौ हजार असुरों को धरती की गोद में मारकर गिरा दिया एवं जिन्होंनें कृत्स, आयु और अतिथित्व के विरोधियों का नाश किया, उन्हीं इंद्र के लिए सोम रस लाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अध्वर्यवो यजत्रः कामयाध्वं श्रुष्टी वहन्तो नशस्था तदिन्द्रे. गभस्तिपूतं भरत श्रुतायेन्द्राय सोमं यजवो जुहोत.. (८)

O priests, offer the Soma to Indra, the mighty one, with pure hands, that he may be pleased and grant us prosperity.

हे यजकर्मकर्ता अध्वर्युजनो! तुम जो चाहते हो, वह इंद्र के लिए सोम रस देने पर तुरंत मिल जाएगा. हे याज्ञिको! हाथों से निचोड़ा हुआ सोम रस लाकर इंद्र के लिए प्रदान करो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अध्वर्यवः कर्त्तना श्रुष्टिभस्मं वने निपुतं वनं उत्रयध्वम्. जुषाणो हस्त्यमभि वावशं व इन्द्राय सोमं मदिंर जुहोत.. (९)

Offer to Indra the intoxicating Soma, which is pleasing and delightful, with chants and hymns, as you prepare the sacred fire and the forest.

हे अध्वर्युजनो! इन इंद्र के लिए सुखकारक सोम तैयार करो. तुम पीने योग्य जल में घोरकर शुद्ध किए हुए सोम को ले आओ. प्रसन्न इंद्र तुम लोगों के हाथ से तैयार किया हुआ सोम रस चाहते हैं. इंद्र के लिए मादक सोम ले आओ. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अध्वर्यवः पयसोऽर्थथा गोः सोमेभिरों पूणता भोजमिन्द्रम्. वेदाहमस्य निभृतं म एतदि lastly यजुयजुतश्रिेकेत.. (१०)

The Adhvaryu priests, with Soma, fill the vessel with milk for Indra, the enjoyer. I know this secret, this offering, this sacred knowledge.

हे अध्वर्युजनो! जिस प्रकार गाय का थन दूध से भरा रहता है, उसी प्रकार इन फलदाता इंद्र को सोम रस देने वाले यजमान को भली प्रकार जानते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अध्वर्यवो यो दिव्यस्य वसो यः पार्थिवस्य क्षमस्य राजा. तमूदरं न पूणता यवेनेन्द्रं सोमेभिस्तदपो वो अस्तु.. (११)

May Indra, the king of divine and earthly treasures, be satisfied by these Soma offerings, and may this satisfaction be yours.

हे अध्वर्युजनो! इंद्र स्वर्ग, धरती आकाश में रहने वाले धनों के राजा हैं. जिस प्रकार जो से कुटिया भर देते हैं, उसी प्रकार इंद्र को सोम रस से पूर्ण कर दो. यह काम तुम्हारे द्वारा होना चाहिए था. (११)

Mandala 1 · Verse 12
असमभ्यं तदृसो दानाय राधः समर्थ्यस्व बहु ते वसव्यम्. इन्द्र यचिचत्रं श्रवस्या अनु घृ-ब्रह्हदेम विदेथे सुवीराः.. (१२)

O Indra, bestow upon us wealth and strength for generous giving, for you possess abundant riches. May we, with heroic sons, be ever praised and celebrated in assemblies.

हे निवासदाता इंद्र! हमें दानादि के लिए अपना पर्याप्त, विचित्र एवं शरण लेने योग्य धन प्रदान करो. हम प्रतिदिन उस धन के भोगने के इच्छुक हैं. हम उत्तम पुत्र एवं पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियों का पाठ करेंगे. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
soma rārandhi no hṛdi gāvo na yavaseṣv ā | marya iva sva okye

Mandala 1 · Verse 14
yaḥ soma sakhye tava rāraṇad deva martyaḥ | taṁ dakṣaḥ sacate kaviḥ

Mandala 1 · Verse 15
uruṣyā ṇo abhiśasteḥ soma ni pāhy aṁhasaḥ | sakhā suśeva edhi naḥ

Mandala 1 · Verse 16
ā pyāyasva sam etu te viśvataḥ soma vṛṣṇyam | bhavā vājasya saṁgathe

Mandala 1 · Verse 17
ā pyāyasva madintama soma viśvebhir aṁśubhiḥ | bhavā naḥ suśravastamaḥ sakhā vṛdhe

Mandala 1 · Verse 18
saṁ te payāṁsi sam u yantu vājāḥ saṁ vṛṣṇyāny abhimātiṣāhaḥ | āpyāyamāno amṛtāya soma divi śravāṁsy uttamāni dhiṣva

O Brihaspati, son of Angiras, the mountain that concealed the cows has opened for your welfare, and the cows have emerged. At that time, with Indra's aid, you caused the waters, held back by Vritra, to flow downwards.

हे अंगिरावंशोत्पन्न बृहस्पति! गायों को छिपाने वाला पर्वत तुम्हारे कल्याण के लिए खुल गया और गाएं बाहर आ गईं. उस समय तुमने इंद्र की सहायता से वृत्र द्वारा रोकी गई जलधारा को नीचे की ओर बहाया था. (१८)

Mandala 1 · Verse 19
बृह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधिं तनयं च जिन्व. विश्वं तद्वद्वं यदवन्ति देवा बृहद्वेम विधे सुवीराः... (१९)

O Lord of Prayer, You are the controller of this hymn; grant us wisdom and nourish our progeny. As the gods protect the universe, may we, with our heroes, live a great life.

हे बृहस्पति! तुम इस विश्व के स्वामी हो. तुम हमारी स्तुति को भली प्रकार जानो. इस नवीन एवं विशाल स्तुति के द्वारा हम तुम्हारी सेवा करते हैं. हम तुम्हारे मित्र हैं, इसलिए हमें मनोवांछित फल प्रदान करो तथा हमारी स्तुति को सफल करो. (१)

Mandala 1 · Verse 20
somo dhenuṁ somo arvantam āśuṁ somo vīraṁ karmaṇyaṁ dadāti | sādanyaṁ vidathyaṁ sabheyam pitṛśravaṇaṁ yo dadāśad asmai

Mandala 1 · Verse 21
aṣāḻhaṁ yutsu pṛtanāsu papriṁ svarṣām apsāṁ vṛjanasya gopām | bhareṣujāṁ sukṣitiṁ suśravasaṁ jayantaṁ tvām anu madema soma

Mandala 1 · Verse 22
tvam imā oṣadhīḥ soma viśvās tvam apo ajanayas tvaṁ gāḥ | tvam ā tatanthorv a1ntarikṣaṁ tvaṁ jyotiṣā vi tamo vavartha

Mandala 1 · Verse 23
devena no manasā deva soma rāyo bhāgaṁ sahasāvann abhi yudhya | mā tvā tanad īśiṣe vīryasyobhayebhyaḥ pra cikitsā gaviṣṭau

Mandala 1 · Verse 1
सेमामविद्धि प्रभृतिं य ईशिषेऽद्या विधेमं नवया महा गिरा. यथा नो मीढ्वांस्त्वस्तवे सखा तव बृहस्पते सीषः सोत नो मतिमृ.. (१)

O Lord, who rules all, we offer this new, great praise to You. May You, our friend and bestower, accept our devotion and our thoughts.

Mandala 1 · Verse 2
यो नन्त्वाननन्ज्योसोतादर्दर्मन्युना शम्बराणि वि. प्राच्यावदव्युतां बृहणस्पतिरा चाविशद्वसुमतं वि पर्वताम्.. (२)

He who, with unwavering resolve and without anger, dispels the darkness of ignorance, is illuminated by the divine wisdom of the Supreme Being, just as the sun reveals the earth and mountains.

बृहस्पति ने अपनी शक्ति द्वारा दमनिय राक्षसों को वश में किया, क्रोध करके शंबर असुर का नाश किया, स्थिर जल को नीचे की ओर गिराया एवं गोखरूपी धन से पूर्ण पर्वत में प्रवेश किया. (२)

Mandala 1 · Verse 3
तद्देवांनां देवतमय कर्त्तमश्रृन्दृळ्हाहृदव्रन्त वीळिता. उदगा अजदभिनद्ब्रह्मणो वलमगहूतमो व्यचक्षयत्स्वः.. (३)

The divine beings, with hearts steadfast and unwavering, ascended, breaking through the darkness and revealing the radiant light.

इंद्रादि देवों में श्रेष्ठ बृहस्पति के कर्म से दृढ़ पर्वत शिथिल हुए थे एवं स्थिर वृक्ष टूट गए थे. बृहस्पति ने गायों का उद्धार किया, मंत्र रूपी शक्ति द्वारा बल असुर को समाप्त किया एवं अंधकार को समाप्त करके सूर्य को प्रकाशित किया. (३)


Mandala 1 · Verse 4
अश्मासमवन्तं बृहणस्पतिर्मधुधारमभि यमोऽसात्णत्. तमेव विश्वे पपिरे स्वदृशो बहु साकं सिसिचुरत्सुमुद्रिणम्.. (४)

The wise ones, drinking the nectar of immortality, have attained the divine, and with great joy, they have filled the ocean of existence.

Mandala 1 · Verse 5
सना ता का चिद्धवना भवीत्वा माद्रिः शरद्दिद्दुवरो वरन् वः। अयन्तत्ता चरतोऽन्यदन्द्यादिद्या चकार वरुणां ब्रह्मणस्पतिः.. (५)

The divine essence, having become the forest of consciousness, bestows boons upon you, O seekers. The Lord of creation, Brahmanaspati, has brought forth this universe, which is worthy of praise and contemplation.

हे ऋत्विजो! तुम्हारे कल्याण के लिए ही बृहस्पति ने नित्य एवं विचित्र ज्ञान से प्रतिमान और प्रतिवर्ष होने वाली जलवर्ष का द्वार भिन्न किया था. बृहस्पति ने इस ज्ञान को मंत्र का विषय बनाया, जिससे धरती और आकाश एक-दूसरे को प्रसन्न करते रहे. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अभिनक्षन्तो अभ्ि ये तमानशुर्निधिं पणीनां परम्ं गुहा हितम्। ते विद्वांसः प्रतिचभ्यभ्यनुता पुनरत् उ आयन्तदुदीयुराविशम्.. (६)

Those who, with great effort, discovered the hidden treasure of the Panis, the supreme secret, these wise ones, having attained it, have returned, shining brightly.

अभिनक्षन्तो अभि ये तमानशुर्निधिं पणीनां परम्ं गुहा हितम्। ते विद्वांसः प्रतिचभ्यभ्यनुता पुनरत् उ आयन्तदुदीयुराविशम्.. (६)

Mandala 1 · Verse 7
ऋतावानः प्रतिचभ्यभ्यनुता पुनरात आ तस्थुः कवयो महसपथः। ते बाहुभ्यां धमितमग्निमश्मनिनकिः बो अस्यवरुणो जहुहिं तम्.. (७)

The wise, having attained the path of greatness, have again established themselves, having overcome the untruths. They have kindled the fire with their arms, and Varuna has released him.

ऋतावानः प्रतिचभ्यभ्यनुता पुनरात आ तस्थुः कवयो महसपथः। ते बाहुभ्यां धमितमग्निमश्मनिनकिः बो अस्यवरुणो जहुहिं तम्.. (७)

Mandala 1 · Verse 8
ऋतजयेण क्षिपेण ब्रह्मणस्पतिर्त्र वष्टि प्र तदश्रోతి धन्दना। तस्य साधीरिषवो याभिरस्यति नृचक्षसो दर्शये कर्णयोनायः.. (८)

Through the victory of cosmic order, the Lord of Prayer desires to bestow that which is heard by the devoted. His arrows are the righteous ones with which he strikes, revealing the divine through the ears.

ऋतजयेण क्षिपेण ब्रह्मणस्पतिर्त्र वष्टि प्र तदश्रోతి धन्दना। तस्य साधीरिषवो याभिरस्यति नृचक्षसो दर्शये कर्णयोनायः.. (८)

Mandala 1 · Verse 9
स संनयः स विन्यः पुरोहितः स सुकृतः स युधि ब्रह्मणस्पतिः। चाक्ष्मो यद्गजां भरते मती धनादिस्त्यसृपति तप्पतुर्वृथा.. (९)

He who is the priest, the wise counselor, the doer of good deeds, and the lord of prayer, when he bestows his favor, all efforts become fruitful and nothing is in vain.

स संनयः स विन्यः पुरोहितः स सुकृतः स युधि ब्रह्मणस्पतिः। चाक्ष्मो यद्गजां भरते मती धनादिस्त्यसृपति तप्पतुर्वृथा.. (९)

Mandala 1 · Verse 10
विभु प्रभु प्रथं मेहनावतो बृहस्पतिः सुविद्राणि राध्या। इमा सतानि वेन्यस्य वाजिंनो येन जना उभे भुज्जते विशः.. (१०)

May the all-pervading Lord, the great Guru, bestow abundant prosperity, by whose power the people of both worlds enjoy sustenance.

विभु प्रभु प्रथं मेहनावतो बृहस्पतिः सुविद्राणि राध्या। इमा सतानि वेन्यस्य वाजिंनो येन जना उभे भुज्जते विशः.. (१०)


Mandala 1 · Verse 11
योऽवरे वृजने विश्वथा विभुंमहामु रणवः शवसा ववक्षिथ. स देवो देवान्प्रति पप्रथे पृथु विश्वेदु ता परिभूब्रह्मणस्पतिः.. (११)

He who, in the lower regions, pervades the universe with His might, the great one, the Lord of prayer, has expanded Himself, surpassing all the gods.

सब प्रकार व्याप्त एवं स्तुतियोग्य बृहस्पति अति बलवान् एवं निर्बल दोनों प्रकार के स्तोताओं की रक्षा अपनी शक्ति से करते हैं. वे समस्त देवों के प्रतिनिधि रूप में परम प्रसिद्ध हैं एवं सबके स्वामी हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
विश्वं सत्यं मघवाना युवो रिदापश्न प्र मिनन्ति व्रतम्. अच्छेन्द्राब्रह्मणस्पति हविर्नोऽन्नं युजेव वाजिन जिगातम.. (१२)

O Indra and Brahmanaspati, accept our offerings of food, which are true and substantial, and may you both, like swift horses yoked together, come to us.

हे धनस्वामी इंद्र एवं बृहस्पति! तुम्हारी सभी स्तुतियाँ सत्य हैं. तुम्हारे व्रत को जल नष्ट नहीं कर सकता, रथ में जुते हुए घोड़े जिस प्रकार घास की ओर दौड़ते हैं, उसी प्रकार तुम हमारे हवि के सम्मुख आओ. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
उताशिष्ठा अनु श्रुवन्ति वह्रयः सभेयो विप्रो भरते मतीं धऩा. वीळूद्वेषा अनु वश ऋणमादादिः स ह वाजीं समिथे ब्रह्मणस्पतिः.. (१३)

The wise, carrying their knowledge, hear the uninstructed, and the leader of assemblies, the intelligent one, brings forth wealth of thought. The strong one, the lord of prayer, takes on the burden of debt, and he, the swift one, advances in the assembly.

ब्रह्मणस्पति के शीघ्रगामी घोड़े हमारे स्तोत्र को सुनते हैं. सव्य एवं बुद्धिमान् अध्वर्यु सुंदर स्तोत्रों द्वारा द्रव्य प्रदान करते हैं. वह प्रबल राक्षसों से द्वेष करने वाले, अपनी इच्छा से ऋण स्वीकार करने एवं अन्न के स्वामी हैं. वे युद्ध में हमारा हव्य स्वीकार करें. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
ब्रह्मणस्पतेरभवद्यथवशं सत्यो मन्युर्महिंकर्मा चरिष्यतः. यो गा उदाजत्व दिवि चाभजन-महीव रीतिः श وساسرتृथक्.. (१४)

The true anger of the Lord of prayer, who brings forth the cows, becomes obedient, and who also delights in the heavens, is like a flowing river, powerful and all-pervading.

महान् कर्म करने वाले ब्रह्मणस्पति का मंत्र उनकी इच्छा के अनुसार सत्य होता है, उन्होंने गायों को बाहर करके आकाश का विभाग किया है. जिस प्रकार नदियों का जल विभिन्न धाराओं में नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार गाएं अपनी शक्ति के अनुसार विभिन्न देवों के घर गई. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
ब्रह्मणस्पति सुयमसय विश्वहा रायः स्याम रथ्योऽय ववस्वतः. वीरेषु वीरों उप पृश्धधि नस्त्वं यदीशानो ब्रह्मण वेषि मे हवम्.. (१५)

O Lord of creation, may we always be prosperous and worthy of your divine chariot. Grant us strength and heroism, for you are the master of all, and you hear our prayers.

हे ब्रह्मणस्पति! हम ऐसे धन के स्वामी बनें जो सदा नियंत्रित एवं अनयुक्त हो. तुम सबके ईश्वर हो, इसलिए हमारे वीर पुत्रों को पौत्रयुक्त करो. तुम हवि एवं अन्न के साथ-साथ हमारी स्तुति को जानो. (१५)

Mandala 1 · Verse 16
विश्वं तद्वद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वेम विदिथे सुवीराः...(१६)

The universe is protected by the divine; we are blessed with strength and prosperity in this sacred knowledge.

हे बृहस्पति! तुम इस विश्व का नियंत्रण करने वाले हो। तुम इस सूक्त को जानो एवं हमारी संतान को प्रसन्न करो. देवगण जिसकी रक्षा करते हैं, वह सभी कल्याण प्राप्त करता है. हम शोभन पुत्र एवं पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (१६)

Mandala 1 · Verse 17
माहं मघोनो वरुण प्रियस्य भूरिदालो आ विंदं शूनमापेः। मा रायो राजन्त्युग्मदेव स्थं बृहद्देम विदथे सुवीराः.. (१७)

May I not be deprived of your abundant gifts, O Indra and Varuna, the bestowers of wealth. May we, with our heroes, be established in your glorious assemblies.

हे वरुण! मैं किसी धनी एवं अधिक दानी व्यक्ति के सम्मुख अपनी दरिद्रता की बात न कहूं. हे दीप्तिमान् वरुण! हमें कभी भी आवश्यक धन की कमी न रहे. हम शोभन धन प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां करेंगे. (१७)

Mandala 1 · Verse 18
eha devā mayobhuvā dasrā hiraṇyavartanī | uṣarbudho vahantu somapītaye

Mandala 1 · Verse 1
इदं कवेरादित्यस्य स्वराजो विश्वानि सान्तन्यभ्यस्तु मह्ना. अति यो मन्त्रो यजथाय देवः सुकीर्तिं भिक्षे वरुणस्य भूरेः.. (१)

May this hymn, sung to the radiant Sun, the sovereign of all, bring us abundant prosperity. May this powerful mantra, offered to the divine for worship, grant us great renown from the bounteous Varuna.

यह हव्य क्रान्तदर्शी एवं स्वयं शोभित आदित्य के लिए है. वे अपने महत्त्व से सभी प्राणियों को पराजित करते हैं. तेजस्वी वरुण यजमान को प्रसन्न करते हैं. मैं वरुण से अधिक कीर्ति की याचना करता हूं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तव व्रते सुभगः श्याम स्वाध्यो वरुण तुष्टुवांसः . उपायन उषसां गोमतीनामग्मयो न जरमाणा अनु घ्नन्.. (२)

O beautiful Varuna, those who praise you with devotion, like the sun rising with cows, are filled with strength and vitality.

हे वरुण! हम भली प्रकार ध्यान, तुम्हारी स्तुति एवं सेवा करते हुए सौभाग्य प्राप्त करें. जिस प्रकार किरणें वाली उषाओं के आने पर अग्नि प्रज्वलित होती है, उसी प्रकार हम प्रतिदिन तुम्हारी स्तुति करते हुए दीप्तिसंपन्न हों. (२)


Mandala 1 · Verse 3
तव श्याम पुरुवीरस्य शर्मनुरंशुशंसस्य वरुण प्रणोत: . यूयं नः पुत्रा अदितरदब्धा अभि क्षमं धं यज्याय देवाः.. (३)

O Varuna, you are the protector of the mighty and the praised, the source of light. May you, the unfailing sons of Aditi, grant us strength for worship.

हे विश्वनायक, अनेक वीरों से युक्त एवं बहुत से लोगों द्वारा स्तुत्य वरुण! हम तुम्हारे गृह में निवास करें. हे शत्रुओं द्वारा अहिंसित अदितपुत्रो! अपना मित्र बनाते समय हमारे सभी अपराधों को क्षमा कर देना. (३)

Mandala 1 · Verse 4
प्र सीमादित्ये असुजद्विधर्त्तः ऋतं सिन्धवो वरुणस्य यन्ति . न श्राम्यन्ति न वि मुञ्चन्त्ये वयो न पप्तुं रघ्‌या परिज्मन्.. (४)

The rivers, flowing with divine order, ceaselessly move towards the ocean, never tiring, never ceasing their journey, nor faltering in their course.

विश्वधारक एवं अदितपुत्र वरुण ने जल बनाया है. उन्हीं के महत्त्व से नदियां बहती हैं. नदियां न कभी विश्राम करती हैं और न पीछे लौटती हैं. वे शीघ्रगामिनी नदियां पक्षियों के समान वेग से धरती पर बहती हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
वि मच्छ्‌थाय रशनामिवाग्‌ ऋध्याम ते वरुण खामृतस्य . मा तन्तुश्छेदि वयतं धियं मे मा मात्रा शार्थपसः पुर ऋतोः.. (५)

May we, O Varuna, attain the immortal nectar by holding fast to your divine command, like a tongue to the palate. May the thread of our thoughts not be severed, nor our understanding be destroyed before the appointed time.

हे वरुण! पाप ने मुझे रस्सी के समान बांध लिया है. मुझे इससे छुड़ाओ. हम तुम्हारी जलपूर्ण नदी को प्राप्त करें. यज्ञकर्म करते समय मेरा कार्य रुके नहीं. यज्ञ समाप्ति से पहले मेरा शरीर कभी शिथिल न हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अपो सु म्यक्ष वरुण भियसं मत्स्माळ्‌तावोड्‌नु मा गृभ्याय . दामेव वत्सादिं मुमुग्‌ग्‌य्हो नहि त्वदारे निमिषबश्नेशे.. (६)

O Varuna, bestow upon us your grace and remove our fear, so that we may be freed from your grasp and not be bound by your punishments.

हे वरुण! भय को मेरे पास से हटाओ. हे शोभासंपन्न एवं सत्ययुक्त! मुझ पर अनुग्रह करो. जिस प्रकार बंधे हुए बछड़े को रस्सी से छुड़ाते हैं, उसी प्रकार मुझे पाप से छुड़ाओ. तुमसे दूर रहकर कोई एक पल के लिए भी अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता. (६)

Mandala 1 · Verse 7
माहं मघोनो वरुण प्रियस्य भूरदावन् आ विंदं शूनमापेः. मा रायो राजन्त्युमादव स्थ्ां बृहद्देम विदथे सुवीराः.. (७)

May I not be deprived of your abundant gifts, O Varuna, giver of riches, nor be left without sustenance. May we, with our heroes, possess great wealth and strength in assemblies.

हे राजा वरुण! मुझे किसी धनी एवं दानी पुरुष के सामने अपनी निर्धनता न कहनी पड़े. मेरे पास जीवन के लिए आवश्यक धन की कमी न हो. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियाँ करेंगे. (७)

Mandala 1 · Verse 8
सरस्वति त्वमस्मों अविष्टि मरुत्वती धृषती जेषि शत्रून्. त्वं चिच्छर्धन्तीं तविषीमाणमिन्द्रो हन्ति वृषभं शण्डिकानाम्.. (८)

O Sarasvati, you are our strength and support, a fierce protector who conquers enemies. Indra, with your power, destroys the strong and mighty among the arrogant.

हे सरस्वती! तुम हमें बचाओ एवं मरुदगणों से युक्त होकर शत्रुओं को दबाती हुई पराजित करो. इंद्र ने बड़ों के प्रधान भंडामर्क को मार डाला. वे स्वयं को शूर समझते थे एवं इंद्र से स्पर्धा करने लगे थे. (८)

Mandala 1 · Verse 9
यो नः सनुत्य उत वा जिघत्तु रभिख्याय तं तिगितेन विथ्य. बृहस्पत आयुधैर्जेषि शत्रुन्द्दुहे रिषन्तं परि थेहि राजन.. (९)

May Brihaspati, with his weapons, conquer our enemies, whether they attack us or seek to harm us. May he protect us from those who wish us ill, O King.

हे बृहस्पति! जो चोर छिपकर हमारी हत्या करना चाहता है, उसे खोजकर तीखे आयुधों से छिन्भिन्न करो तथा अपने आयुधों से हमारे शत्रुओं को जीतो. हे राजन! द्रोहकारियों के ऊपर हिंसक वज्र चारों ओर से फेंको. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अस्माकेभिः सत्त्वभिः शूर शूरैर्यां कृष्यानि ते कर्त्वानि. ज्योग्भवनुधुपित्सो हत्वी तेषाम भारा नो वसूनि.. (१०)

With our valiant beings, O hero, we shall achieve what is to be done. May we live long, having slain them, and may their burdens become our treasures.

हे शूर इंद्र! हमारे शत्रुनाशक वीर पुरुषों के साथ मिलकर अपने कर्त्तव्य कार्यों को पूरा करो. तुम बहुत दिनों से घमंडी बने हुए हमारे शत्रुओं को नष्ट करके उनका धन हमें दो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
तं वः शर्धं मारुतं सुम्नयुगिरेोप ब्रुवे नमसा दैव्यं जनम्. यथा र्षं सर्ववीरं नशामहा अपत्यसाचं श्रुत्यं दिवेदि.. (११)

We offer our salutations with reverence to the divine Maruts, the mighty host, so that we may behold their all-conquering, life-giving, and heaven-dwelling presence.

Mandala 1 · Verse 12
कुमारश्रष्ष्पितरं वन्दमानं प्रति नानम रुदरोपयन्तम्. भूरदंतारं सत्यपतिं गृणीषे स्तुतस्त्वं भेषजा रास्यस्मे.. (१२)

We praise You, the protector of truth, the giver of boons, who, though wounded, honors the father. Grant us healing.

हे रुद्र! जिस प्रकार पुत्र आशीर्वाद देने वाले पिता को नमस्कार करता है, उसी प्रकार आते हुए तुमको हम नमस्कार करें. हम अधिक दान करने वाले एवं सज्जन के बालक तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हमें औषधि दो. (१२)

Mandala 1 · Verse 1
धारावरो मरुतो धृष्णवोऽसो मृगा न भीमास्तविभिर्भरचिनः। अनन्यो न शुशुचाना ऋजीबिणो भूमिं धमन्तो अप गा अवृण्वत.. (१)

Like mighty winds, these powerful beings, fierce as lions, with their strength, churn the earth and open the waters.

धरा को सींचने वाले, धृष्टतापूर्ण, मृगों के समान भयंकर, अपनी शक्ति से सबको पराजित करने वाले, पशु को समान भयंकर, अपनी बल द्वारा समस्त संसार को व्याप्त करने वाले, अग्नि के समान दीप्त एवं जल से युक्त मरुद्गण घूमने वाले बादलों को छिन्न-भिन्न करके जल बरसाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
द्वावो न स्तुभिभ्रित्यन्त खदिно व्यश् श्रिया न ह्युतयन्त वृष्यः। रुद्रो यद्दो मरुतो रुक्मवक्षसो वृषाजनि पृश्नयाः शुक्रं ऊधनि.. (२)

The Rudras, adorned with golden chests, are born from the spotted mother, their strength and brilliance flowing like milk from her udder.

हे सीने पर दीप्त आभूषणों वाले मरुद्गण! कामवर्षक रुद्र ने तुम्हें पुष्टि के निर्मल उदर से पैदा किया है. तुम अपने आभूषणों से उसी प्रकार शोभा पाते हो, जिस प्रकार आकाश तारगण से शोभित होता है. शत्रुभक्षक एवं जलवर्षक मरुद्गण बादलों में बिजली के समान प्रकाशित होते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उक्षन्ते अश्वाँ अत्याँ इवाजिषु नदस्य कर्णास्त宇यन्त आशुभः। हिरण्यशिप्रा मरतो दविघ्वतः पृश्ं याथ पृष्णीभिः समन्वयः.. (३)

The swift horses are urged on like those in a race, their ears pricked forward. The shining ones, adorned with golden bridles, move together with their dappled steeds.

जिस प्रकार घोड़े युद्ध में पसीने से धरती सींच देते हैं, उसी प्रकार संसार को सींचने वाले मरुद्गण घोड़े पर चढ़कर गर्जन करते हुए बादल के कान के पास से जल्दी से निकल जाते हैं. सोने के टोप वाले, समान क्रोध वाले एवं वृक्ष कंपित करने वाले मरुतो! तुम काली

Mandala 1 · Verse 4
पृष्ठे ता विश्वा भुवना ववक्षिरे पृष्ठक्ष्वासो अनवभ्राधस ऋषिज्ष्यासो न वयुनेषु धूर्दः...(४)

The worlds are borne upon His back, like mighty steeds, who, with their strength, guide the cosmic order through the vast expanse of existence.

Mandala 1 · Verse 5
viśāṁ gopā asya caranti jantavo dvipac ca yad uta catuṣpad aktubhiḥ | citraḥ praketa uṣaso mahām̐ asy agne sakhye mā riṣāmā vayaṁ tava

The Maruts, like friends, bring all waters for the sacrificer, the sustainer of their hearts. They approach the travelers swiftly, like horses with white spots, possessing unhindered wealth and moving with directness.

मरुद्गण हृद्यधारक यजमान के लिए मित्र के समान सारा जल ढोकर लाते हैं. मरुद्गण शीघ्र दान करने वाले, श्वेत बिंदियुक्त अश्वों वाले, भंभरहित धन वाले एवं सीधे चलने वाले घोड़ों की तरह पथिकों के सम्मुख जाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
इन्धन्विभिनिर्धनु रश्दूधभिरध्वस्भिः पथिभिरभिजृडृश्यः: आ हंसासो न स्वसराणि गन्तन मघोर्मदाय मरुतः समन्यवः...(६)

The Maruts, like swans, with their swift, bright weapons, approach their homes, eager for the enjoyment of wealth.

Mandala 1 · Verse 7
yo viśvataḥ supratīkaḥ sadṛṅṅ asi dūre cit san taḻid ivāti rocase | rātryāś cid andho ati deva paśyasy agne sakhye mā riṣāmā vayaṁ tava

O Maruts, equal in wrath and radiant with weapons, descend upon the path of the unhindered, like swans to their abode, bringing joy with sweet Soma, accompanied by milch cows and thundering clouds.

हे समान क्रोध वाले एवं दीप्तियुक्त आयुधों वाले मरुद्गण! हंस जिस प्रकार अपने निवासस्थान पर उतरते हैं, उसी प्रकार तुम दुधारू गायों एवं गरजते हुए मेघों के साथ विचरहित पथ से मधुर सोम रस द्वारा प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए आओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
यहुज्जते मरुतो रुक्मवक्षसोऽश्वान्रथेषु भग आ सुदानवः. धैनुं शिश्त्रे स्वसरेषु पिञ्चते जनाय रातहविषे महीमिषम्.. (८)

The radiant Maruts, with golden chests, harness swift horses to chariots, bestowing abundant wealth upon the devoted worshipper who offers oblations.

सीने पर चमकीले गहने पहनने वाले एवं शोभन दानयुक्त मरुद्गण रथ पर सवार होते ही यजमान के घर जाकर उसी प्रकार यथेष्ट अन्न देते हैं, जिस प्रकार गाय अपने बछड़े को दूध पिलाती है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
यो नो मरुतो वृकताति मत्यो रिपुर्दधे वसवो रक्षाता रिषः. वर्तयत तपुषा चक्रियाभिं तमव रुद्रा अशसो हन्तना वधः.. (९)

O Maruts, protect us from the man who, like a wolf, harbors enmity and malice. O Vasus, ward off harm. O Rudras, with your fiery weapons, destroy the enemy and his destructive power.

हे मरुद्गण एवं वसुओ! जो मनुष्य भेड़िए के समान हमसे शत्रुता रखता है, उस हिंसा करने वाले से हमारी रक्षा करो। हे रुद्रपुत्रो! हमारे शत्रु को दुःख देकर सृष्टि से दूर भगाओ एवं उसके सभी आयुध दूर फेंक दो। (९)

Mandala 1 · Verse 10
चित्रं तद्दो मरुतो याम चेकिते पृश्न्या यद्दुधयपयो दुहः। यद्वा निदे नवमानस्य रुद्रियास्त्रितं जरय जुरातामदाभ्याः॥ (१०)

The Maruts, like a wondrous painting, are known to the discerning mind, as they milk the celestial waters. May these divine beings, the sons of Rudra, protect us from all harm and decay.

हे मरुतो! तुम्हारा वह विचित्र कर्म सब जानते हैं कि तुमने पृश्निमाता के स्तनों से दूध पिया था एवं स्तोता की निंदा करने वाले को मारा था। हे अहिंसनीय रुद्रपुत्रो! तुमने त्रित ऋषि के शत्रुओं को नष्ट किया। (१०)


Mandala 1 · Verse 11
तान्त्वां महो मरुत एवयावन्तो विष्णोरेषस्य प्रभूये हवामहे। हिरण्यवर्णांन्कुहान्यतसुचो ब्रह्मप्यन्तः शंस्यं राध ईमहे.. (११)

We invoke you, O Vishnu, with the mighty Maruts, for your abundant grace. We seek your radiant, praiseworthy wealth and blessings.

हे यज्ञस्थल में जाने वाले महानुभाव मरुतो! हम सर्वव्यापक एवं प्रार्थनीय सोमरस के तैयार होने पर तुम्हें बुलाते हैं एवं सर्वोत्तम व सुनहरे रंग के सुच को उठाकर सर्वोत्तम स्तुतियाँ द्वारा तुमसे उत्तम धन मांगते हैं। (११)

Mandala 1 · Verse 12
ते दशग्वाः प्रथमा यज्महिरे ते नो हिन्वन्त्षृषो व्यष्टिषु। उषा न रामीररौर्पपूर्णते महो ज्योतिषा शुचता गोअर्सा.. (१२)

We worship these ten cows, the first ones, who inspire us in our endeavors. Like the dawn, they bring forth abundance and radiant light.

दस मास तक यज्ञ करके सिद्धि प्राप्त करने वाले अंगिराओं के रूप में मरुतों ने पहली बार यज्ञ को धारण किया था, वे उषाओं के आने पर हमें यज्ञकार्य में लगावें। उषा जिस प्रकार अपनी लाल किरणों से काली रात को हटाती है, उसी प्रकार मरुद्गण महान्, दीप्तियुक्त एवं जल टपकाने वाली ज्योति से अंधकार मिटाते हैं। (१२)

Mandala 1 · Verse 13
ते क्षोणीभिररुणेभिनिर्जिभ्जी रुद्रा ऋतस्य सदनेषु वावधुः। निमेधमाना अत्येन पाजसा सुश्रन्द्रं वर्णं दधिरे सुपेशसम्.. (१३)

The Rudras, having conquered the earth with their brilliance, roared in the halls of cosmic order. Adorned with radiant splendor, they assumed a beautiful and perfect form.

रुद्रपुत्र मरुद्गण शब्द करने वाली वीणाओं एवं लाल रंग के आभूषणों से युक्त होकर जल के निवासस्थान बादलों में बड़े हैं, वे शीघ्रगामी एवं सर्वव्यापी बल से बादलों से अधिक मात्रा में जल बरसाते हुए प्रसन्नतापूर्वक उत्तम रूप धारण करते हैं। (१३)

Mandala 1 · Verse 14
ताँ इयानो महो वरुथमतय उप घेदना नमसा गृणीमसि। त्रितो न यान्यञ्च होतृणभिश्चय आवर्तदवराज्ज्यक्रियावसे.. (१४)

We praise and invoke you, O Varuna, with reverence, as you are the protector and sustainer of all. You, like Trita, are the guardian of the righteous, bestowing upon them strength and dominion.

हम वरुणों से विस्तृत धन की याचना करते हुए अपनी रक्षा के निमित्त स्तोत्रों द्वारा प्रार्थना करते हैं, त्रित ऋषि ने अपनी इच्छापूर्ति के लिए नाभिचक्र द्वारा प्राण, अपान, समान, व्यान और उदान पांच होताओं को लौटा लिया। (१४)

Mandala 1 · Verse 15
अयांसमग्ने सुक्षितिं जनायायांसमु मघवद्स्यः सुवृक्तिम्. विश्वं तद्वद्रं यदवन्ति देवा बृहद्देम विद्धथे सुवीराः.. (१५)

O Agni, grant us abundant protection and prosperity, O Indra, bestow upon us excellent praise. May all beings be protected by the gods, and may we, with heroes, grow great in sacrifice.

हे उत्तम स्थान में रहने वाले अग्नि! हम पुत्र प्राप्ति के लिए तथा यजमान के कल्याण के लिए तुम्हारे पास स्तोत्र लेकर आए हैं. देवगण जो कल्याण करते हैं, वह हमें प्राप्त हो. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत से स्तोत्र बोलेंगे. (१५)

Mandala 1 · Verse 16
sa tvam agne saubhagatvasya vidvān asmākam āyuḥ pra tireha deva | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
तुभ्यं हिन्वानो वसिष्ठ गा अपोऽधुक्षन्त्सीमविभिरद्रिभिनरः। पिबेन्द्र स्वाहा प्रहुतं वृषकृत्ं होतादा सोमं प्रथमो य ईशिषे.. (१)

O Indra, the divine priest, you alone are worthy to drink the Soma, offered by the sacrificers with stones, which nourishes and bestows strength.

हे इंद्र! तुम्हारे उद्देश्य से प्रस्तुत यह सोम गाय के दूध, दही एवं जल से मिश्रित है. यज्ञ के नेताओं ने इसे पत्थरों एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्रों की सहायता से तैयार किया है. तुम सारे संसार के स्वामी हो, इसलिए स्वाहा एवं वषट् शब्दों के साथ अग्नि में डाले गए

Mandala 1 · Verse 2
यज्ञैः सम्मिश्लाः पुष्टिभिरृद्धिभिरिभ्यर्च्छुभासोऽञ्जिषु प्रिया उतासदा बर्हिषरतस्य सूनवः पोत्रादा सोमं पिबता दिवो नरः... (२)

O men, nourished by sacrifices and prosperity, you who are dear to the offerings, drink Soma from the purifying vessel, sons of the divine.

हे यज्ञों से संयुक्त, पुष्टि से युक्त रथ पर बैठे हुए, अपने आयुधों से शोभा पाते हुए, आभूषणों को प्रेम करने वाले, भरत के पुत्र एवं अंतरीक्ष के नेता मरुद्गण! तुम बिछे हुए कुशां पर बैठकर पोता से सोमपान करो ।

Mandala 1 · Verse 3
अमेव नः सुहवा आ हि गन्तन नि बर्हिषि सदतना रणोष्ठन.अथा मन्दस्व जुजुषाणोऽन्यस्तस्त्वाष्ट्रवैर्भिर्जेभिः सुभद्रगणः... (३)

Come to us, O invoked ones, and sit on the sacred grass, rejoice and be pleased. Then, O wise one, be gladdened by our offerings, you who are the best of hosts.

हे शोभन आह्वान वाले त्वष्टा! तुम हमारे साथ आओ, कुशां पर बैठो एवं आनंद करो. इसके बाद देवों एवं देवपत्नियों के साथ शोभन समूह बनाकर सोम रूप अन्न का उपयोग करते हुए तृप्त बनो ।

Mandala 1 · Verse 4
आ वक्षि देवां इह यत्र यक्षं चोशन-होतरनि बदा योनिनु त्रिषु.प्रति वीहि प्रतिष्ठित सोम्यं मधु पिबाम्यग्नाइस्तव भागस्य तृष्णिहि.. (४)

O Agni, bring the gods here where the offering is made; drink this Soma, the sweet nectar, and be satisfied with your portion.

हे बुद्धिमान् अग्नि! इस यज्ञस्थल में देवों को बुलाकर उनके निमित्त यज्ञ करो. हे देवों को बुलाने वाले अग्नि! तुम हमारे द्रव्य की इच्छा करते हुए तीन स्थानों पर बैठो, उत्तर वेदी पर रखे हुए सोम रूप मधु को स्वीकार करो एवं अग्नीघ्र के पास से अपना हिस्सा लेकर तृप्त बनो ।

Mandala 1 · Verse 5
एष स्य ते तन्वो नृम्णवर्धनः सह ओजः प्रदिवि बाह्रोहितः.तुभ्यं सुतो मघवन्त्यभभूतस्त्वमस्य ब्राह्मणादा तृप्तिषब.. (५)

This is your body, strengthening your might, radiating power and brilliance. Your son has been born to you, O Indra, and from this Brahman, you shall be satisfied.

हे धनस्वामी इंद्र! जो सोम तुम्हारे शरीर में बल बढ़ाता है, जिसके कारण प्राचीन देव के हाथों में शत्रुओं को हराने वाला बल उत्पन्न होता है, वही सोम तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. तुम इस ऋत्विक ब्राह्मण के पास आकर तृप्तिपूर्वक सोम पिओ.

Mandala 1 · Verse 6
जुषेथां यजं बोधतं हवस्य मे सतो होता निविद्ः पूर्या अनु.अच्छा राजानं नम एत्यावृत्तं प्रशास्त्रादा पिबतं सोम्यं मधु.. (६)

May you both accept this offering and awaken to my call, O priests, as you have done before. Approaching the King with reverence, drink the sweet Soma, having been invoked by the Praśāstr̥.

हे शोभासंपन्न मित्र एवं वरुण! मेरे इस यज्ञ में आओ, इसका सेवन करो एवं मेरा आह्वान सुनो. यज्ञ में बैठा हुआ प्राचीन स्तुतियां बोलता है. ऋत्विजों द्वारा घिरा हुआ अन्न तुम्हारे सामने है. इस मधुर सोमरस को प्रशास्ता के समीप आकर पिओ.

Mandala 1 · Verse 7
त्वया हितमप्यमप्स्सुं भागं धन्वान्वा मृगयसो वि तस्थुः वनानि विभ्यो नकिरस्य तानि व्रता देवस्य सवितुर्मिनन्ति.. (७)

You seek a portion of the waters, but the deer have already found their share in the forests. No one can diminish the sacred vows of the divine Savitr.

हे सविता! तुम्हारे द्वारा अंतरिक्ष में छिपाया हुआ जो जलभाग है, उसी को जरलहित प्रदेशों में खोज करने वाले पाते हैं. तुमने पक्षियों को वनवृक्ष निवास के लिए दिए हैं. सविता देव के इन कार्यों को कोई नष्ट नहीं करता. (७)

Mandala 1 · Verse 8
याद्राधस्थं वरुणो योनिमप्यमनिशितं निमिषि जभ्रुराणः विश्वो माताण्डो व्रजमा पशगत्त्वशशो जन्मानि सविता व्याकः.. (८)

The sun, the mother of all, has brought forth the cosmic egg, and Varuna, the divine guardian, has ceaselessly sustained its womb. The radiant sun has revealed the birth of all beings.

सूर्य छिपने पर अत्यंत गमनशील वरुण सारे गतिशील प्राणियों को मनचाहा, सुखदायक एवं प्राप्त करने योग्य निवास देते हैं. जिस समय सविता सभी प्राणियों को अलग कर देते हैं, उस समय सभी पक्षी एवं पशु अपने-अपने स्थान को चले जाते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
न यस्येन्द्रो वरुणो न मित्रो व्रतवर्यमा न मिनन्ति रुद्रः नारात्यस्तमिदं स्वस्ति हुवे देवं सवितारं नमोभिः.. (९)

I invoke the divine Savitr with reverence, whom neither Indra, Varuna, Mitra, nor Rudra, nor the gods of wealth, can restrain or diminish in His glorious vows. To Him, I offer this well-being.

इंद्र, वरुण, मित्र, अर्यमा, रुद्र एवं शत्रु असुर जिसके कर्म को समाप्त नहीं करते, उन्हीं सविता देव को हम अपने कल्याण के लिए नमस्कारों द्वारा बुलाते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
भर्गा धियं वाजयन्तः पुरन्धिं नराशंसो ग्नस्पतिर्नो अव्याः आये वामस्य सङ्ग्गथे रयीणां प्रिया देवस्य सवितुः स्याम.. (१०)

May we, by the grace of Savitr, the divine, be blessed with brilliant intellect and prosperity, and may we be ever dear to him in the union of wealth.

मनुष्यों द्वारा स्तुत्य एवं देवपत्नियों के रक्षक सविता हमारी रक्षा करें. हम भजनीय, ध्यान करने योग्य एवं परम बुद्धिमान् सविता को अधिक बलवान् बनाते हैं. हम धन एवं पशुओं के पाने और एकत्र करने के लिए सविता के प्रिय बनें. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अस्मभ्यं तद्विदो अद्रव्यः पृथिव्यास्त्वं दतं काम्यं राध आ गात्, शं यत्स्तोतृभ्य आपये भवात्पुरुशंसाय सवितर्ज्जित्रे.. (११)

O Savitr, giver of life, you are the source of all wealth and sustenance, bestowing upon us all that we desire. May you grant us peace and prosperity, and may our praises reach you.

Mandala 1 · Verse 1
ग्रावाणेव तदिदर्थं जरेथे वृक्षां निधिनिन्तम्च्छ. ब्रह्माणेव विदथ उक्थशासा दूतेव हव्या जन्या पुत्रा.. (१)

Like stones, they are worn down for this purpose, like trees, they are felled. Like Brahma, they know the sacred words, like messengers, they carry offerings to the people and sons.

हे अश्विनीकुमारो! तुम फेंके हुए पत्थर के समान शत्रु को बाधा पहुंचाओ. जिस प्रकार पक्षी फल वाले वृक्ष पर जाते हैं, उसी प्रकार तुम धन वाले यजमान के पास जाओ. तुम मंत्र उच्चारण करने वाले ब्रह्मा एवं जनपद में राजा द्वारा भेजे गए दूतों के समान अनेक लोगों द्वारा बुलाने योग्य हो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
प्रातर्यावाणा रथ्येव वीराजेव यमा वर्मा सचेथे. मेने इव तन्वा३ शुभ्भमाने दम्यतीव क्रतुविदा जनेषु.. (२)

Like the dawn and the chariot, you shine forth, O heroes, united in strength. Like a bride and groom, you are radiant and wise among people.

हे अश्विनीकुमारो! प्रातःकाल यज्ञ के लिए जाने वाले रथ-स्वामियों के समान वीर, छागों के समान यमल, नारियों के समान शोभन-शरीर, पति-पत्नी के समान साथ रहने वाले एवं सबके यज्ञकर्मों के ज्ञाता तुम दोनों सेवक के पास आओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
शुज्रेव नः प्रथमा गन्तम्वर्क् छफाविव जभ्रयूराणा तरीभिः. चक्रवाकेव प्रति वस्तोरूसावर्णाञ्च यातं रथ्येव शक्रा.. (३)

May we be the first to reach the divine light, like the sun's rays, and may our journey be swift and strong, like chariots driven by powerful steeds.

हे अश्विनीकुमारो! तुम पशुओं के सींगों के समान सभी देवों में प्रमुख हो, घोड़े के खुरों के समान वेग से चलते हुए तुम दोनों हमारे सामने आओ. हे शत्रुनाशक एवं अपने कर्म में समर्थ अश्विनीकुमारो! तुम चकवा-चकवी अथवा दो रथ स्वामियों के समान हमारे पास आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
नावेव नः पारयन्तं युगेव नभ्येव न उपधीव प्रधीव. श्रानेव नो अरिषण्या तनुनां खृगलेव विससः पातम्स्मान्.. (४)

May the divine boat carry us across, may the divine chariot bring us to our destination, may the divine sustenance nourish us, and may the divine protection shield us from all harm and suffering.

हे अश्विनीकुमारो! नाव जिस प्रकार लोगों को नदी के पार उतार देती है, उसी प्रकार तुम हमें दुःखों से पार पहुंचाओ. जुआ, पहिए की नाभि, अरे और पुठी जिस प्रकार रथ को पार करते हैं, उसी प्रकार तुम हमें पार लगाओ. तुम कुत्तों की तरह हमें शरीरनाश एवं कवच के समान बुढ़ापे से बचाओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
वातेवाजुर्या नधैव रीतिरक्षी इव चक्षूषा यातमर्क्. हस्तावितेव तन्वे३शम्भविष्ठा पादेव नो नयंत वस्यो अच्छ.. (५)

May the radiant Sun, who moves like the wind and sees with divine eyes, guide us with His hands and feet towards prosperity and well-being.

Mandala 1 · Verse 6
rāyo budhnaḥ saṁgamano vasūnāṁ yajñasya ketur manmasādhano veḥ | amṛtatvaṁ rakṣamāṇāsa enaṁ devā agniṁ dhārayan draviṇodām

O Ashvins, speak words as sweet as lips, nourish us for life like breasts, protect our bodies like nostrils, and hear us like ears.

हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों होंठों के समान मधुर वचन बोलो, दो स्तनों के समान हमारी जीवन रक्षा के लिए दूध पिलाओ, नासिका के दोनों छिद्रों के समान हमारे शरीर-रक्षक बनो एवं कानों के समान हमारी बात सुनो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
हस्तैव शक्तिमभि सन्ददी नः क्षामेव नः समजतं रजांसि. इमा गिरो अश्विना युष्म्यन्ती: क्षणोत्रणेव स्वाधिर्ति सं शिशीतम्.. (७)

O Ashvins, may your hands bestow strength upon us, and may the dust of the earth be our companion. Sharpen these our hymns, like a well-honed tool, for our benefit.

हे अश्विनीकुमारो! हाथों के समान हमें सामर्थ्य दो एवं धरती-आकाश के समान जल प्रदान करो. हमारे द्वारा की गई स्तुतियां तुम्हारे समीप जाती हैं. सान जिस प्रकार तलवार को तेज कर देती है, उसी प्रकार तुम हमारी स्तुतियों को तीक्ष्ण बनाओ. (७)


Mandala 1 · Verse 8
एतानि वामश्विना वर्धनानि ब्रह्म स्तोमं गृत्तमदासो अक्रन्. तानि नरा जुजुषाणोप यात बृहद्दमे विद्थे सुवीराः.. (८)

These invigorating offerings, O Ashvins, were made by Gritsamada, the servant of Brahma. May you, O mighty ones, accept them with joy, bringing us strength and heroic sons.

हे अश्विनीकुमारो! गृत्समद ऋषि ने ये मंत्र तथा स्तोत्र तुम्हारी उन्नति के लिए रचे हैं. हे नेताओ! तुम उन्हें चाहते हुए आओ. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (८)

Mandala 1 · Verse 9
सोमापूषणां जनना रयीणां जनना दिवो जनना पृथिव्याः. जातो विश्वस्य भुवनस्य गोपी देवा अकृण्वन्ममृतस्य नाभिम्.. (९)

Born of Soma and Pushan, the source of riches, the source of heaven, the source of earth, the gods made Him the guardian of the universe, the navel of immortality.

हे सोम एवं पूषा! तुम धन, स्वर्ग एवं धरती के जनक हो. तुम उत्पन्न होते ही संपूर्ण भुवन के रक्षक बने. देवों ने तुम्हें अमरता का केंद्रबिंदु बनाया. (९)

Mandala 1 · Verse 1
वायो ये ते सहस्रिणो रथासस्तेभिरा गहि. नियुत्वान्नोमपीतये.. (१)

O Vayu, come with your thousands of chariots, accompanied by your companions, for our offering.

हे वायु! तुम्हारे पास जो हजारों रथ हैं, उनके द्वारा नियुत्गणों के साथ सोमरस पीने के लिए आओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
नियुत्त्वावन्वाय गह्धयं शुक़ो ayaमि ते. गन्तासि सुन्वतो गृहम्.. (२)

You, who are adorned with strength, will go to the house of the performer of sacrifices.

हे वायु! नियुत्तों सहित आओ. यह दीप्तिमान् सोम तुम्हारे लिए है. तुम सोमरस निचोड़ने वाले यजमान के घर जाते हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
शुक्रस्याह ग्वशिर इन्द्रवायु नियुत्वत्ः. आ यातं पिबतं नर.. (३)

O Indra and Vayu, you who are powerful and accompanied by the Shukra (semen/vitality), come and drink.

शुक्रस्थाह ग्वशिर इन्द्रवायु नियुत्वत्ः. आ यातं पिबतं नर.. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अयं वां मित्रावरुणा सुत: सोम ऋतावृधा. ममेदिह श्रुतं हवम्.. (४)

This Soma, O Mitra and Varuna, nourisher of truth, is offered to you. Hear my invocation here.

हे यजवृद्ध मित्र एवं वरुण! तुम्हारे लिए यह सोम निचोड़ा गया है. तुम हमारी पुकार सुनो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
राजानावनाभिद्रुहा ध्रुवे सदस्युत्तम. सहस्रस्थूण आसाते.. (५)

The two kings, inviolable and supreme, reside in the thousand-pillared hall.

सबके शासक, घृत रूपी अन्न का भोजन करने वाले, अदितिपुत्र व दानशील मित्र तथा वरुण यजमान की सेवा करते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 6
ता सम्राजा घृतासुती आदित्या दावुनुस्पती. सचेते अनवहरम्.. (६)

They, the radiant, life-giving Adityas, the lords of the sky, are united in their unwavering brilliance.

Mandala 1 · Verse 7
गोमद् पु नासत्याश्वघातातमश्विना. वर्ती रुद्रा नृपाय्यम्.. (७)

O Asvins, you who are the protectors of the earth and the destroyers of enemies, may Rudra, the lord of the universe, grant us strength and prosperity.

हे सत्यवादी अश्विनीकुमारो एवं रुद्रा! यज्ञ के नेता देवों के पीने योग्य सोम को गायों तथा अश्वों से युक्त करके अपने मार्ग से लाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
न यत्परो नान्तरं आदर्धदृष्टृषण्वसु. दुःशंसो मत्त्यो रिपु:.. (८)

He who is neither beyond nor within, nor seen as if in a mirror, is difficult to be known by mortals, and is an enemy.

हे धनवर्षक अश्विनीकुमारो! हमें ऐसा धन दो, जिसे न दूरवर्ती और न समीपवर्ती शत्रु मनुष्य चुरा सके. (८)

Mandala 1 · Verse 1
कनिकृज्जनुष्पं प्रब्रुवाण इयति वाचमरितेव नावम् । सुम्झल्ल्शं शकुने भवाऽसि मा त्वा का चिदभिभा विश्व्या विद्त्.. (१)

May your speech be like a swift boat, carrying you to your destination. May you be a fortunate bird, never to be overcome by any worldly affliction.

बार-बार बोलकर भविष्य की बात बताता हुआ कपिंजल वाणी को उसी प्रकार प्रेरित करता है, जिस प्रकार मल्लाह नाव को आगे बढ़ाता है. हे पक्षी! तुम अति कल्याणकारी बनो. किसी भी प्रकार पराजय सभी दिशाओं से तुम्हारे समीप न आवे. (१)

Mandala 1 · Verse 2
मा त्वा श्येन उदृधीन्मा सुपणों मा त्वा विविदिषमान्नीरो अस्ता. पित्र्यामणु प्रदेशि कनिकृद्दुम्झल्लो भद्रावादी वेदेह.. (२)

May no hawk or eagle carry you away, nor any hunter with a bow. May your ancestors protect you, and may you be free from all harm and ill fortune.

हे शकुनि! बाज अथवा गरुड़ तुम्हें न मारे. धनुर्धारी एवं बाण फेंकने वाला वीर भी तुम्हें प्राप्त न करे. दक्षिण दिशा में बार-बार बोलते हुए एवं मंगलकारक बनकर हमारे लिए प्यारी बात कहो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अव क्रन्द दक्षिणतो गृहाणां सुम्झल्लो भद्रावादी शकुन्ते. मा नः स्तैन ईशत माऽशं्सो बृहद्देम विद्थे सुवीराः.. (३)

May the auspicious bird, dwelling to the south of our homes, protect us from thieves and misfortune, so that we may live with strength and many heroic sons.

हे कपिंजल पक्षी! तुम कल्याणसूचक एवं प्रियवादी बनकर हमारे घरों की दक्षिण दिशा में बोलो. चोर एवं पाप की बात कहने वाले लोग हम पर अधिकार न करें. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (३)

Mandala 1 · Verse 1
प्रदक्षिणिदभि गृणन्ति कारवो वयो वदन्त ऋतृतुया शकुन्तयः. उभे वाचो वदति सामग इव गायत्रं च त्रैष्टुभं चानु राजति.. (१)

The skilled ones praise the circumambulations, and the birds, speaking in season, sing. The Samaveda singer utters both, and the Gayatri and Tristubh meters shine forth.

कपिंजल पक्षी समय-समय पर अन्न की सूचना देते हुए स्तोता के समान प्रदक्षिणा करते हुए शब्द करें. सामगायन करने वाला जिस प्रकार गायत्री एवं त्रिष्टुप् दोनों छंदों को बोलता है, उसी प्रकार कपिंजल पक्षी भी दोनों प्रकार के वाक्य बोलकर सुनने वालों को प्रसन्न करता है. (१)

Mandala 1 · Verse 1
सोमस्य मा तवसँ वक्ष्यग्ने वह्निं चक्रर्थं विद्थे यजधै। देवाँ अच्छा दीर्धघुञ्जे अद्रिं शमाये अग्ने तन्वं जुषस्व.. (१)

O Agni, the carrier of offerings, you are the fire that sustains Soma, the moon-god. May you, the radiant one, accept our sacrifice and be pleased with our devotion.

हे अग्नि! यज्ञ करने के निमित्त तुमने मुझे सोम का वाहक बनाया है, इसलिए मुझे शक्तिशाली बनाने की इच्छा करो. प्रकाशयुक्त होता हुआ मैं देवों को लक्ष्य करके सोम-रस निचोड़ने के लिए पत्थर उठाता हूँ एवं स्तोत्र बोलता हूँ. तुम मेरे शरीर की रक्षा करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
प्राञ्चं यजं चक्रं वर्धतां गीः समृद्धिर्ग्ने नमसा दुवस्यन्. दिवः शशासुर्विद्वथा कवीनां गृतसायं चिन्तवसे गातुमीषुः.. (२)

May the eastward-facing sacrifice and the expanding hymn flourish, O Agni, with devotion and service. The wise poets have ruled from the heavens, and with their wisdom, they have sought to guide us towards understanding.

हे अग्नि! तुमने पूर्वकाल में यज्ञ किया है. हमारे स्तुति वचनों की वृद्धि हो. मेरे आत्मीय लोग समिधाओं एवं हव्य द्वारा अग्नि की सेवा करें. देवों ने स्वर्ग से आकर स्तोताओं को ज्ञान दिया है. वे स्तुति की हुई एवं प्रज्वलित अग्नि की स्तुति करना चाहते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
मयो दधें मेधिरः पूतदक्षो दिवः सुबन्धुर्नृषृषः पृथिव्याः। अविन्दन् दर्शतमप्सस्वन्तर्दवा सो अग्निमपसि स्वृणाम्.. (३)

The wise one, pure in strength, has established the radiant sun, a friend to all beings, in the sky and on earth. He has found the luminous, life-giving fire within the waters.

मेधावी, शुद्धबल-युक्त, जन्म से ही उत्तम बंधु, स्वर्ग का सुख विधान करने वाले एवं सुंदर अग्नि को हमने बहने वाली नदियों के जल के भीतर से यज्ञकार्य के हेतु प्राप्त किया है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अवर्धयन्त्सुभगं सप्त यह्नीः श्वेतं ज्ञानमरुषं महित्वा. शिशुं न जातमभ्याररुक्षा देवासो अग्निमन्वेपुष्यन्.. (४)

The gods, with their greatness, nourished the radiant, white knowledge, like a mother cherishing a newborn child, for seven days.

शोभन धन वाले, उज्ज्वल एवं महत्त्व से प्रकाशित जल में स्थित अग्नि को सात नदियों ने बढ़ाया. थोड़ी जिस प्रकार तुरंत जन्म के बड़े के पास जाती है, उसी प्रकार नदियाँ उत्पन्न अग्नि के समीप गईं. देवों ने अग्नि को उत्पन्न होते ही प्रकाशमान किया. (४)

Mandala 1 · Verse 5
शुक्रं भिरङ्गे रज आतन्वान् कृणुं पुनानः कविभिः पवित्रैः। शोचिर्वसानः पर्यायुर्पां श्रियो मिमीते बहरीरनुनाः.. (५)

The radiant one, purifying with sacred hymns, spreads forth his energy, adorning himself with brilliance and bestowing abundant prosperity.

शुक्र (प्रकाशमान) अंग वाले, रज (जल) को फैलाते हुए, पवित्र कवि (देवताओं) द्वारा शुद्ध करते हुए, शोचि (प्रकाश) को धारण करने वाले, वे अग्नि को चारों ओर से श्रियों (ऐश्वर्यों) से युक्त करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
वब्राजा सीमदन्तीरदब्धा दिवो यङ्गीर वसना अनग्नाः। सना अत्र युवतयः सयोनीरेकं गर्भं दधिरे सप्त वाणिः.. (६)

The radiant, unclad maidens, adorned with jewels, came from the sky. Seven voices, united in purpose, bore one womb.

जल का भक्षण न करते हुए एवं जल के द्वारा नष्ट होते हुए अन्तरिक्ष की संतान के समान एवं वस्त्र ढके न होने पर भी जल से घिरे होने के कारण अग्नि नंगे नहीं हैं. सनातन, नित्य तरुण एवं एक स्थान से उत्पन्न सात नदियों ने अग्नि को गर्भ के समान धारण किया. (६)

Mandala 1 · Verse 7
स्तर्णा अस्य संहतो विश्वरूपा घृतस्य योनौ सर्वथे मधूनाम्. अस्थुर घनेवः पिन्चमाना मही दस्मस्य मात्रा समीची.. (७)

The world, unified and diverse, is the fertile womb of abundance, where all sweetness resides. It is nourished and shaped by the divine measure of the magnificent, all-pervading consciousness.

अनेक रूप वाली एवं सब जगह फैली हुई अग्नि की किरणें जलवर्ष के पश्चात् जल के उत्पत्ति स्थान आकाश में एकत्रित रहती हैं. सबको प्रसन्न करने वाली जलस्वरूपी गाएं इसी अग्नि में रहती हैं. विशाल धरती और आकाश सुंदर अग्नि के माता-पिता हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
ब्राणः सूतौ सहसो व्यौढघानः शुक्रा रभसा वपूंषि. श्रौतन्ति धारा मधुनी घृतस्य वृषा यत्र वावृधे काव्येन.. (८)

Where the divine poet's power flourishes, the radiant energies of creation, like streams of honey and ghee, swiftly manifest the body.

हे बल के पुत्र अग्नि! तुम सबके द्वारा धारण किए जाकर भास्कर एवं वेग वाली किरणें धारण करते हुए प्रकाशित होते हो. अग्नि जिस समय स्तोत्र के कारण बढ़ते हैं, उस समय मीठे जल की धाराएं गिरती हैं. (८)


Mandala 1 · Verse 9
पितुश्चेद् यजंनुषा विवेद व्यस्य धारा असृजद्दि धेनाः। गुहा चरन्त् सखिभिः शिवेभिर्दिवो यद्दीभिर्नि गुहा बभूव.. (९)

The father, through his wife, brought forth offspring, who, moving with joyful companions, became hidden in the heavens.

जन्म लेते ही अग्नि ने अपने पिता अंतरिक्ष के स्तनों में स्थित जल को जान लिया. वहां से जलधाराओं को बहाया एवं मध्यमा वाणियों को विसर्जित किया. अपने कल्याणकारी वायुस्वरूपी बंधुओं के साथ स्थित होकर आकाश के संतानरूपी जलों के साथ गुफा में रहने वाली अग्नि को कोई प्राप्त नहीं कर सका. (९)

Mandala 1 · Verse 10
पितुश्च गर्भं जनितुश्च बभ्रे पूर्विको अध्यत्पीयानाः। वृष्णे सपत्नी शुचये सबन्धु उभे अस्मे मनुष्याः नि पाहि.. (१०)

Protect us, O divine one, who are both our father and mother, our progenitor and sustainer, our kin and our spouse, our beloved and our friend.

Mandala 1 · Verse 11
स जिन्वते जठरेषु प्रजञ्जिवान् वृषा चित्रेषु नान्दनं सिंहः। वैश्वानरः पृथुपाजा अमर्त्यो वसु रत्ना दयमानो वि दाशुषे.. (११)

The mighty, immortal Vaishvanara, the universal fire, who nourishes all beings, bestows abundant wealth and treasures upon the devoted sacrificer.

वैश्वानरः - जो सब के उदरों में व्याप्त होकर प्रजाओं को उत्पन्न करने वाले, वृष (शक्तिशाली), अद्भुत, नन्द (आनन्द) देने वाले सिंह के समान हैं। वैश्वानरः - पृथुपाजा (विस्तृत पथ वाले), अमर्त्य (अमर), यजमान को उत्तम वस्तुएँ देने वाले, उत्पन्न होने वाले एवं कामवर्षक वैश्वानर अग्नि सिंह के समान गर्जन करते हुए अनेक प्रकार के उदरों में बढ़ते हैं।

Mandala 1 · Verse 12
वैश्वानरः प्रत्नथा नाकमारुहद्विस्पृशं भन्दमानः सुमनोभिः। स पूर्ववज्जनयज्जनन्ते धनं समानमजं पर्योति जाग्रविः.. (१२)

The all-pervading divine fire, radiant and joyful, ascends to the heavens, bringing forth abundant wealth and sustenance, ever watchful and awake.

वैश्वानरः - प्रत्नथा (प्राचीन काल से) नाकम् (स्वर्ग को) आरुहत् (आरोहण करते हुए), विस्पृशं (सबको स्पर्श करते हुए), भन्दमानः (आनन्दित होते हुए), सुमनोभिः (सुन्दर मन वाले)। जो स्तोताओं द्वारा स्तुति किए जाते हुए वैश्वानर अग्नि चिरंतन के समान अंतरिक्ष की पीठ रूप स्वर्ग पर आरोहण करते हैं। वे प्राचीन ऋषियों के समान ही स्तुतिकर्ता यजमान को धन देते हुए सदा प्रबुद्ध रहकर सूर्य के रूप में देवों की तरह आकाशरूपी मार्ग पर घूमते हैं।

Mandala 1 · Verse 13
ऋतावानं यञ्जियं विप्रमुक्थ्यं मा यं दधे मातरिश्वा दिवि क्षयम्। तं चित्रयामिं हरिकेशीमहे सुदीप्तिंमनि सुविताय नव्यसे.. (१३)

The radiant, divine, and all-pervading one, whose abode is in the heavens, is praised by the wise. He is the brilliant, golden-haired, and ever-new source of all prosperity.

ऋतावानं (ऋतुओं को धारण करने वाले), यञ्जियं (यज्ञ के योग्य), विप्रम् (मेधावी), उक्थ्यं (स्तुति योग्य), मा यं (जिसको), मातरिश्वा (वायु) दिवि (स्वर्ग में) क्षयम् (निवास) दधे (स्थापित किया है)। बलवान्, यज्ञ के योग्य, मेधावी, स्तुति योग्य एवं स्वर्गलोक में निवास करने वाले अग्नि को धरती पर लाकर वायु ने स्थापित किया है। हम उन्ही विचित्र गति वाले, पीली किरणों वाले एवं शोभन दीप्तियुक्त अग्नि से नवीन धन की याचना करते हैं।

Mandala 1 · Verse 14
शुचिं न यामन्नृषिरं स्वर्दृशं केतुं दिवो रोचनस्थांमपुष्बुधम्। अग्निं मूर्धानं दिवो अप्रतिष्कुषं तमीमहे वाजिनं बृहत्.. (१४)

We invoke the swift, radiant Agni, the brilliant light of heaven, the foremost, unyielding, and mighty, who is the head of the sky.

शुचिं (पवित्र), न (हम), यामन् (गमन करने वाले), ऋषिरं (अभिलाषा करने योग्य), स्वर्दृशं (सबको देखने वाले), केतुं (प्रतीक), दिवः (स्वर्ग के) रोचनस्थांम् (शीश तुल्य), अपुष्बुधम् (अमृत युक्त एवं महान्)। मैं दीप्त, यज्ञ में गमन करने वाले, अभिलाषा करने योग्य, सबको देखने वाले, स्वर्ग के शीश तुल्य, अमृतयुक्त एवं महान् अग्नि की स्तोत्र द्वारा याचना करता हूँ। उनका शब्द कहीं रुकता नहीं है।

Mandala 1 · Verse 15
मन्त्रं होतारं शुचिमद्रयाविनं दमनसमृक्व्यं विश्ववर्णिनम्। रथं न चित्रं वपुषाय दर्शतं मनुर्हितं सदमिद्राय ईमहे.. (१५)

We worship the radiant, pure, and all-pervading divine being, who is the bestower of strength and the sustainer of all, like a magnificent chariot, for the well-being of humanity.

मन्त्रं (मंत्र), होतारं (होता), शुचिमद्रयाविनं (पवित्र, धनवान्), दमनसमृक्व्यं (सबको वश में करने वाले), विश्ववर्णिनम् (सब वर्णों वाले)। रथं न (रथ की तरह) चित्रं (विचित्र) वपुषाय (रूप वाले) दर्शतं (दर्शनीय) मनुर्हितं (मनुष्यों द्वारा हितकारी) सदमिद्राय (हमेशा मित्र के समान) ईमहे (याचना करते हैं)। स्तोत्र के योग्य, देवों को बुलाने वाले, शुद्ध, कृटिलता रहित, दानदाता, श्रेष्ठ, संसार को देखने वाले, रथ की तरह विविध रंगों वाले, दर्शनीय तथा मानवों का सदा हित करने वाले अग्नि से मैं धन की याचना करता हूँ।

Mandala 1 · Verse 16
rohic chyāvā sumadaṁśur lalāmīr dyukṣā rāya ṛjrāśvasya | vṛṣaṇvantam bibhratī dhūrṣu ratham mandrā ciketa nāhuṣīṣu vikṣu

Mandala 1 · Verse 17
etat tyat ta indra vṛṣṇa ukthaṁ vārṣāgirā abhi gṛṇanti rādhaḥ | ṛjrāśvaḥ praṣṭibhir ambarīṣaḥ sahadevo bhayamānaḥ surādhāḥ

Mandala 1 · Verse 18
dasyūñ chimyūm̐ś ca puruhūta evair hatvā pṛthivyāṁ śarvā ni barhīt | sanat kṣetraṁ sakhibhiḥ śvitnyebhiḥ sanat sūryaṁ sanad apaḥ suvajraḥ

Mandala 1 · Verse 19
viśvāhendro adhivaktā no astv aparihvṛtāḥ sanuyāma vājam | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
pra mandine pitumad arcatā vaco yaḥ kṛṣṇagarbhā nirahann ṛjiśvanā | avasyavo vṛṣaṇaṁ vajradakṣiṇam marutvantaṁ sakhyāya havāmahe

Those wise ones who, knowing the dawn, awoke on the path of the seers, when ignited by those desiring the divine, open the doors to the departure of ignorance.

उषा को जानते हुए जो मेघावी अग्नि क्रांतदर्शियों के मार्ग पर जाते हुए जागे थे, वही परम तेजस्वि अग्नि देवों को चाहने वाले लोगों द्वारा प्रज्वलित होकर अज्ञान के जाने के द्वार खोलते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
प्रेद्ग्निर्वृधैः स्तोमेभर्भिः स्तोतृणां नमस्य उक्थैः। पूर्वीत्रित्स्य संदृश्श्रुकानः सं दूतौ अघौदुषो विरोके.. (२)

The radiant Agni, praised with hymns and worship, is the messenger, the divine presence, who brings forth prosperity and dispels darkness.

जो पूज्य अग्नि स्तोताओं के वाक्यों, स्तोत्रों और मंत्रों से बढ़ते हैं, वे ही देवदूत अग्नि यज्ञों में सूर्य के समान प्रकाशित होने के लिए प्रातःकाल जाग उठते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अथाप्यग्निमनुषिषु विश्वश्पां गर्भं मित्रं ऋतेन साधनम्। आ हृयतो यजतः सान्स्स्थादभृदु विप्रो हव्यो मतीनाम्.. (३)

The wise one, invoking the all-pervading divine fire, the friend of all, through righteous action, brings forth the cherished offering, the essence of devotion.

यजमानों के मित्र, यज्ञ के द्वारा उनकी इच्छाएं पूर्ण करने वाले एवं जल के गर्भ अग्नि मानवों प्रजाओं के मध्य देवों द्वारा स्थापित किए गए हैं. कामना करने योग्य, यज्ञ के योग्य एवं वेदी के ऊंचे स्थान पर स्थित अग्नि स्तोताओं की स्तुतियों के द्वारा स्तृत हुए हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
मित्रोऽग्निभर्वति यत्समृद्धो मित्रो होता वरुणो जातवेदाः। मित्रोऽश्वयुरिषिरो दमना मित्रः सिन्धुनामुत पर्वतानाम्.. (४)

Friend Mitra, the invoker, the all-knowing fire, is rich with abundance. Mitra is the swift, life-giving sustainer of rivers and mountains.

अग्नि प्रज्वलित होते समय मित्र होते हैं. वे मित्र के साथ-साथ होता तथा प्राणियों के झाला वरुण भी बनते हैं. वे ही मित्र, अध्वर्यु, दानशील एवं वायु बनते हैं तथा नदियों एवं पर्वतों के मित्र हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
पाति प्रियं रिपो अग्रं पदं वेः पाति यक्षश्रणं सूर्यस्य. पाति नाभा सप्तशीर्षोणमग्निः पाति देवानामुपमादम्ष्वः.. (५)

The Lord protects the beloved, the foremost of enemies, and the path of the sun. The fire protects the seven sages, and the divine radiance protects the gods.

Mandala 1 · Verse 6
ऋभुश्रक ईड्यं चारु नाम विश्शानि देवो वयुनानि विद्दान्. ससस्य चर्म घृतवत्पदं वेस्तदिग्नी रक्ष्यप्रयुच्छन्.. (६)

The radiant Agni, pervading all, protects the beloved and excellent places on Earth. The great Agni guards the heavens, the abode of the sun, and the Maruts within them, preserving the sacrifice to please the gods.

दर्शनीय अग्नि सब जगह व्याप्त, पृथ्वी के प्रिय एवं उत्तम स्थान की रक्षा करते हैं. महान् अग्नि सूर्य के विचरण स्थान आकाश की रक्षा करते हैं. वे आकाश में मरुद्गणों की रक्षा करते हैं एवं देवों को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ को रक्षित करते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
आ योनिनिमर्निधुवन्तमस्थात्पृथुप्रगाणमुशन्तमशानः। दीर्घानः शुचिऋष्वः पावकः पुनः पुनर्मतिरा नव्यसी कः... (७)

The radiant, pure, and ever-renewing intellect, like a purifying fire, is established in the womb of creation, ever desirous of nourishment.

इच्छां करते हुए अग्नि दीप्तियुक्त, भली प्रकार स्तुत एवं अपने प्रिय स्थान पर स्थित हैं, दीप्तिमान्, पवित्र, दर्शनीय एवं महान् अग्नि अपने माता-पितास्वरूप धरती और आकाश को अधिक नया बनाते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
सद्यो जात ओषधीभिश्वर्क्ष यदी वर्धन्ति प्रसवो घृतेन. आप इव प्रवता शुभ्भमाना उरुष्यदग्निः पितृरूपस्थे.. (८)

May the newborn Agni, nourished by herbs and ghee, grow strong and protect us, just as the waters flow downwards, bringing auspiciousness.

तुरन्त उत्पन्न अग्नि को ओषधियां धारण करती हैं. उस समय बहने के मार्ग पर जाने वाले जल के समान सुशोभित वे ओषधियां फल देती हुई जल के द्वारा बढ़ती हैं. माता-पितास्वरूप धरती एवं आकाश की गोदी में बढ़ते हुए अग्नि हमारी रक्षा करें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
उदूतः समिधा यग्मो अद्योदृभ्मिन्दिवो अधि नाभा पृथिव्याः. मित्रो अग्निरिङ्यो मातरिश्वा दूतं वक्षद्जयाय देवान्.. (९)

Agni, the divine messenger, ascends with fuel, the sun's rays, to the navel of the earth, carrying the gods for victory.

हमारे द्वारा स्तुत एवं प्रज्वलित होने के कारण महान् अग्नि उत्तर वेदी के मध्यभाग में आकाश को प्रकाशित करते हैं. सबके मित्र, स्तुति-योग्य एवं अरणे से उत्पन्न होने वाले अग्नि देवों के दूत बनकर उन्हें यज्ञ के निमित्त बुलावें. (९)

Mandala 1 · Verse 10
उदस्तम्भीत्समिधा नाकपृष्ठोऽग्निभर्वृतमो रोचनानाम्. यदी भृगुभ्यः परि मातरिश्वा गुहा सन्तं हव्यवाहं समीधे.. (१०)

The celestial fire, embracing the heavens, was kindled by the Bhrigus, with fuel, and the wind, to serve as the bearer of offerings to the gods.

जब मातरिश्वा अर्थात् वायु ने भृगुवंशी ऋषियों के लिए गुहा में स्थित हव्यवाहक अग्नि को जलाया था, तब महान् एवं तेजस्वियों में उत्तम अग्नि ने अपने तेज द्वारा स्वर्ग को दृढ़ बना दिया था. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
इळामग्ने पुरोदसं सनिं गोः शश्रुतं हवमानाय साध. स्वान्त्रः सूनुस्तनयो विजवाग्ने सा ते सुमतिभृत्वस्मे.. (११)

O Agni, bestower of nourishment and wealth, grant us the boon of progeny and victory. May your favor be upon us, for you are the source of all good fortune.

हे अग्नि! तुम स्तोताओं को सदा ऐसी भूमि दो, जिसे पाकर वे बहुत से यज्ञकर्म करते हुए गाय पा सकें. हमें ऐसा एक पुत्र दो जो हमारे वंश का विस्तार करे एवं संतान को उत्पन्न करे. हमारे प्रति तुम्हारी शोभन बुद्धि रहे. (११)

Mandala 1 · Verse 1
प्र कारवो मनना वच्यमाना देवद्रीचीं नयन्त देवयन्तः. दक्षिणावाड्वजजिनी प्राप्यते हविभर्न्त्यग्ने घृताची.. (१)

Through contemplation and utterance, the devout, seeking the divine, are led towards the celestial. The offering of clarified butter to Agni, the fire god, brings forth the powerful, victorious, and nourishing divine grace.

Mandala 1 · Verse 2
आ रोदसी अपूर्णा जायमान उत प्र रिक्वा अध नु प्रयज्यो, दिवश्शिद्ग्ने महिना पृथिव्या वच्यन्तां ते वह्रयः सप्तजिह्वाः.. (२)

O Agni, the seven-tongued, born anew, your glories are sung throughout the heavens and earth, and your offerings are carried by the seven steeds.

Mandala 1 · Verse 3
घौश्च त्वा पृथिवी यज्ञांसो नि होतारं सादयन्ते दमाय, यदी विशो मानुषीर्दैव्यन्तीः प्रयस्वरीरळ्ठे शुक्रमिर्चः.. (३)

O Agni, fill the earth and sky upon your birth. O worthy Agni of sacrifice, you are superior to earth and sky by your greatness. May your seven flames, your very essence, be worshipped.

हे अग्नि! तुम उत्पन्न होते ही धरती एवं आकाश को पूर्ण करो. हे यज्ञ के योग्य अग्नि! तुम अपने महत्त्व से धरती एवं आकाश से उत्तम हो. तुम्हारी अंश रूपी सात ज्वालाएं पूजित हों. (३)

Mandala 1 · Verse 4
महान्तस्स्थे ध्रुव आ निषप्तोऽन्तर्धवा माहिने हर्यमाणः, आस्के सपत्नी अजरे अमृते सदर्धुगे उरुगायस्य धेनु.. (४)

The great, unwavering one is seated within, the radiant one, desired by all, dwells in the heart. He is the unaging, immortal mother, the source of abundance for the widely praised.

महान् एवं यजमानों द्वारा चाहे गए अग्नि धरती और आकाश के बीच अपने उत्तम स्थान पर स्थित होते हैं. चलने वाली, सूर्य रूपी एक ही पति की पत्नियां, जरारहित, दूसरों द्वारा अहिंसित एवं जल रूपी दूध लेने वाले धरती व आकाश उस शीघ्रगामी अग्नि की गाएं हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
व्रता ते अग्ने महतो महानि तव क्रत्व्दा रोदसी आ ततन्थ, त्वं दूतौ अभवो जायमानस्य नेता वृषभं चर्षणोनाम्.. (५)

O Agni, your great vows and mighty powers have pervaded the heavens and earth. You are the messenger and leader of all beings, born anew.

हे सर्वाोत्कृष्ट अग्नि! तुमसे संबंधित कर्म महान् है. तुमने धरती और आकाश को विस्तार दिया है एवं तुम दूत बने हो. हे कामवर्षक अग्नि! तुम उत्पन्न होते ही यजमानों के फलदाता होते हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
ऋतस्य वा केशिना योगयाभिधृतस्तनुवा रोहिता धुरि धिष्व, अथा वह देवान्देव विश्वान्तस्स्वधरा कृणृहि जातवेदः.. (६)

O Agni, bearer of all, with your radiant form, uphold the cosmic order and bring the gods to this sacrifice.

हे अग्नि देव! उत्तम केशों वाले, ऋषियों से युक्त एवं घी टपकाने वाले दोनों रोहित नामक घोड़ों को यज्ञ के अग्रभाग में लाओ तथा सभी देवों का आह्वान करो. हे जातवेद अग्नि! तुम देवों को शोभन यज्ञ वाला बनाओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अपो यदग्न उशधग्नेवनेषु होतुरिन्द्रस्य पयन्त देवाः...(७)

The gods, like a thirsty fire, drank the waters, and the Hotri (priest) and Indra were satisfied.

हे अग्नि! जिस समय तुम वनवृक्षों का जलभाग जलाते हो, उस समय तुम्हारी चमक सूर्य से भी बढ़ जाती है. तुम विशेष प्रभा वाली उषा के पीछे प्रकाशित होते हो. स्तोता तुझ स्तुतियोग्य होता की स्तुति करते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
उरो वा ये अन्तरिक्षे मदन्ति दिवो वा ये रोचने सन्ति देवाः। ऊमा वा ये सुहवासो यजत्रा आयमिरै रभ्यो अग्ने अश्वाः..(८)

May the divine beings who rejoice in the heavens and the firmament, and who are worthy of worship, be swiftly brought to us by the swift steeds of Agni.

उरो वा ये अन्तरिक्षे मदन्ति दिवो वा ये रोचने सन्ति देवाः। ऊमा वा ये सुहवासो यजत्रा आयमिरै रभ्यो अग्ने अश्वाः..(८) विस्तृत आकाश में जो देव प्रसन्न होते हैं, सब देव जो सूर्य के समान प्रकाश वाले हैं, उस नाम के पितर एवं यज्ञ के योग्य देव जो बुलाने पर आते हैं, हे रथवान् अग्नि! तुम्हारे जो अश्व हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
एभिरने सरथं याह्यवाङ् नानास्थं वा विभवो हाग्नाः। पन्वीवत्सिंशत् त्रींश्च देवान्नुषधमा वह मादयस्व.. (९)

Come, O Agni, with these, whether in the same chariot or in different ones, and be pleased, bringing the gods to the sacrifice.

हे अग्नि! इन सब देवों के साथ एक रथ पर अथवा अलग-अलग रथों पर बैठकर हमारे सामने आओ. तुम्हारे घोड़े शक्तिशाली हैं. पत्नियों सहित तैंतीस देवों को अन्नप्राप्ति के लिए यहां ले आओ एवं सोम.रस द्वारा उन्हें प्रसन्न करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
स होता यस्य रोदसी चिदुवी यजंयज्मभि वृधे गृणीतः। प्राची अध्वरेव तस्थतुः सुमेके ऋतावरी ऋतजातस्य सत्ये.. (१०)

He is the priest who, with his hymns, praises the vast heavens and earth for their growth. They stand firm in the sacrifice, the truth-bearing ones, born of truth.

स होता यस्य रोदसी चिदुवी यजंयज्मभि वृधे गृणीतः। प्राची अध्वरेव तस्थतुः सुमेके ऋतावरी ऋतजातस्य सत्ये.. (१०) वे ही अग्नि देवों के होता हैं, जिनकी समृद्धि के लिए विस्तृत धरती और आकाश प्रत्येक यज्ञ में प्रशंसा करते हैं. शोभन रूप वाले, जलयुक्त एवं सच्चे रूप वाले धरती और आकाश होतारूप एवं सत्य से उत्पन्न अग्नि के उसी प्रकार अनुकूल होते हैं, जिस प्रकार यज्ञ अग्नि के अनुकूल होता है. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
इळामग्ने पुरूदसं सनिं गोः शश्रुतं हवमानाय साध। स्यान्त्रः सूनस्तनयो विजवाग्ने सा ते सुमतिर्भूत्वस्मे.. (११)

O Agni, bestower of abundant wealth and nourishment, hear our invocation. May we be blessed with progeny and victory, and may your favor be upon us.

इळामग्ने पुरूदसं सनिं गोः शश्रुतं हवमानाय साध। स्यान्त्रः सूनस्तनयो विजवाग्ने सा ते सुमतिर्भूत्वस्मे.. (११) हे अग्नि! तुम स्तोताओं को सर्वदा ऐसी भूमि दो, जिसे पाकर वे बहुत से यज्ञकर्म करते हुए प्राप्त कर सकें. हमें एक ऐसा पुत्र दो, जो हमारे वंश का विस्तार करे एवं संतान उत्पन्न करे. हमारे प्रति तुम्हारी शोभन बुद्धि रहे. (११)

Mandala 1 · Verse 1
प्र य आरुः शितिपृष्ठस्य धासेरा मात्रा विविशुः सप्त वापीः। परिषिक्ता पितरं सं चरेते प्र सस्रते दीर्घमायुः प्रत्यक्ष.. (१)

Those who enter the seven waters, nourished by the white-backed one, move together with their father, extending their long life.

Mandala 1 · Verse 2
समिद्धस्य श्रयमाणः पुरस्ताद्ब्रह्म वन्वानोऽजरं सुवीरम् । अरे अस् मदमतिं बाधमान उच्चैयस्व महते सौभगाय.. (२)

May the divine fire, blazing brightly before us, bestow upon us strength and wisdom, dispelling all obstacles and leading us to great prosperity.

हे यूप! तुम प्रज्वलित आह्वानीय नामक अग्नि से पूर्व दिशा में रहते हुए जरारहित, समृद्ध एवं शोभन संतानयुक्त अन्न देते हुए तथा हमारे शत्रुभूत पाप को दूर भगाते हुए, हमें विशाल संपत्ति देने के लिए ऊँचे बनो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उच्चैयस्व वनस्पतिं वर्ष्मन्पृथिव्या अधि. सुMitī मीयमानो वर्चां ध यज्ञावासे.. (३)

The mighty tree, the king of plants, stands tall upon the earth, its glory measured in the sacred dwelling.

हे वनस्पतिरूप यूप! तुम धरती के उत्तम स्थान यजमंडप में ऊँचे खड़े होओ. तुम सुंदर परिमाण से नापे गए हो. तुम मुझे यजकर्ता को अन्न दो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
युवा सुवासाः परिधीत आगात्स् उ श्रेयान्भवति जायमानः । तं धीरासः कवय उन्नयन्ति स्वाध्याय्‌ो मनसा देवयन्त:.. (४)

The radiant one, adorned in pure garments, arrives, and as he is born, he becomes superior. The wise and devoted, through self-study and contemplation, elevate him.

युवा सुवासाः परिधीत आगात्स् उ श्रेयान्भवति जायमानः । तं धीरासः कवय उन्नयन्ति स्वाध्याय्‌ो मनसा देवयन्त:...(४)

Mandala 1 · Verse 5
जातो जायते सुदिन्त्वे अह्मां समर्य आ विदथे वर्धमानः । पुनन्ति धीरा अपसो मनीषा देवया विप्र उदीयति वाचम्.. (५)

The wise, through their intellect and actions, purify themselves and grow in divine knowledge, leading to the radiant dawn of spiritual understanding.

धरती पर पेड़ के रूप में उत्पन्न यूप मनुष्यों से युक्त यज्ञ में घी आदि से सब प्रकार शोभित होकर दिनों को उत्तम बनाता है. यजकर्म करने वाले মেধायी अध्वर्यु आदि अपनी बुद्धि के अनुसार उसे जल से धोकर शुद्ध करते हैं. देवों को द्रव्य देने वाले মেধायी होता यूप की स्तुति बोलते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
यान्वो नरो देवयन्तो निमिम्यवन्स्पते स्वधितिर्वा तत्क्ष. । ते देवासः स्वरवस्तस्थिवांसः प्रजावदस्मे दिधिषन्तु रत्नम्.. (६)

May those men, devoted to the gods and eager for knowledge, who have sharpened their intellects, and who are established in divine wisdom, bestow upon us their precious gifts.

Mandala 1 · Verse 7
ये वृक्षासोऽधि क्षमि निमितासो यतसुखः । ते नो व्यन्तु वाचं क्षेत्रसाधसः.. (७)

May the trees rooted in the earth, which are the source of our sustenance and joy, grant us the power of speech to achieve our goals.

धरती पर कुल्हाड़ी से काटे गए, ऋषियों द्वारा गड्ढे में फेंके गए एवं यज्ञासाधक यूंप हमारा द्रव्य देवों के समीप पहुंचावें. (७)


Mandala 1 · Verse 8
आदित्या रुद्रा वसवः सुनीथा द्यावापृथिवी अन्तरिक्षम्, सजोषसो यजमान्नु देवा ऊर्ध्व कृण्वन्त्वधरस्य केतुम्.. (८)

May the Adityas, Rudras, Vasus, and the well-guided celestial beings, along with heaven and earth and the atmosphere, united in purpose, elevate the sacrificer's banner of aspiration.

यज्ञ के शोभन नेता रुद्र, वसु, धरती-आकाश एवं विस्तीर्ण अंतरिक्ष ये सब देव मिलकर यज्ञ की रक्षा करें तथा यज्ञ के केतुरूप यूंप को ऊँचा उठावें. (८)

Mandala 1 · Verse 1
अपां नपात् सुभगं सुदीदितिं सुप्रतूर्तिम्नहसम्.. (१)

The radiant, life-giving waters, born of the divine, bring forth auspiciousness and strength.

हे अग्नि! तुम्हारे मित्र हम मनुष्य जल के नाती, शोधनधनयुक्त, सुंदर दीप्तिमान्, सुख से प्राप्त करने योग्य एवं उपद्रवरहित तुमको अपनी रक्षा के लिए वरण करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
कायमानो वना त्वं यन्मातुरजगन्नपः न तत्रे अग्ने प्रमृषे निवर्तनं यदूरे सन्निकृहावः.. (२)

You, who are born from the waters of the womb, are not consumed by the fire of the world. Though far away, you are brought near, and there is no turning back.

हे अग्नि! कानों की रक्षा करते हुए तुम अपनी मातारूपी जल में प्रविष्ट होकर शांत बनते हो. तुम्हारा शांत रहना अधिक समय तक सहन नहीं होता, इसलिए तुम दूर रहते हुए भी हमारे अरणि रूपी काठ से उत्पन्न हो जाओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अति त्वं ववक्षियाथैव सुमनो असि. प्राणये यन्ति पर्यन्तं आस्ते येषां सख्ये असि भित्ः.. (३)

You are indeed a beautiful flower, for those who have you as a friend, life's journey reaches its fulfillment.

हे अग्नि! तुम स्तोताओं की अभिलाषा सफल करना चाहते हो, इसलिए तुम संतुष्ट मन वाले हो. तुम जिन ऋत्विजों के मित्र हो, उन में से कुछ होम करने के लिए जाते हैं एवं शेष तुम्हारे चारों ओर बैठते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
ईयिवांस्मति सिधः शษ्तीरति सक्षतः अन्वीमविन्दग्निचिरसो अदृहोऽप्सु सिंहमिव भितम्.. (४)

The wise, having attained the highest knowledge, are like a lion, unassailable and radiant, who has conquered all obstacles and found the divine fire within the waters of existence.

हे अग्नि! सर्वथा द्रोहरहित एवं चिरंतन विश्वेदेवों ने शत्रुओं एवं उनकी बहुत सी सेनाओं को हराने वाले तथा गुफा में बैठे सिंह के समान जल में छिपे हुए अग्नि को पाया. (४)

Mandala 1 · Verse 5
सस्वांस्मिमव त्म्नाग्निमित्था तिरोहितम्. ऐनें नय-मातरिश्वा परावतो देवेभ्यो मथित्ते परि.. (५)

The Self, though hidden within, is ignited by the inner fire, and through the divine breath, it is brought forth from the distant realms for the gods.

अपनी इच्छा से जल में छिपे हुए तथा अरणिमंथन द्वारा प्राप्त अग्नि को वायु देवों के निमित्त इस प्रकार लाए थे, जिस प्रकार स्वेच्छा से जाने वाले पुत्र को पिता खींच लाता है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तं त्वं मर्ता अणभृतं देवेभ्यो हव्यवाहन. विश्वन्यघ्नां अभिपसि मानुष तव कृत्वा यविष्ठ.. (६)

O Agni, bearer of offerings to the gods, you are the immortal one, the most youthful, who protects all beings and is invoked by mortals.

हे मनुष्य हितकार, सदा तरुण एवं द्रव्य वहन करने वाले अग्नि देव! तुम अपने यज्ञरूपी कर्म से हम सबका पालन करते हो, इसलिए मनुष्यों ने तुम्हें देवों के निमित्त ग्रहण किया है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
त्वां यदग्ने पशवः समास्ते समिद्धमपिशीवरि.. (७)

O Agni, when the cattle gather around you, you are fully kindled and radiant.

हे अग्नि! तुम संध्याकाल में दीप्त होते हो, तब पशु तुम्हारे चारों ओर बैठते हैं. पशु के समान अल्पज्ञ यजमान को भी तुम्हारा शोभन यजकर्म फल देकर संतुष्ट करता है. (७)

Mandala 1 · Verse 8
आ जुहोता स्वधरं शीरं पावकशोचिषम्. आशुं दूतंमजिरं प्रत्नमीड्यं श्रुष्टी देवं सपर्यत.. (८)

Offer the divine, radiant, and pure fire, the swift messenger, ancient and worthy of praise. Worship this all-pervading deity.

हे ऋत्विजों! पवित्र प्रकाश वाले, लकड़ियों में सोने वाले एवं शोभनयज्ञयुक्त अग्नि में हवन करो तथा यजकर्म में व्याप्त, देवों के दूत, शीघ्रगामी, पुरातन, स्तुति योग्य एवं दीप्तिसंपन्न अग्नि की शीघ्र पूजा करो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्रीणि शता त्री सहस्राण्यग्निं त्रिशञ्च देवा नव चासपर्यन्. औक्षन्घृतैस्तृण-बहिंरस्मा आदिद्धोतारं न्यसाद यन्न्.. (९)

The gods, numbering three hundred, three thousand, and thirty-nine, worshipped the fire, anointing it with ghee and grass, thereby establishing it as the divine invoker.

तीन हजार तीन सौ उनतालीस देवों ने अग्नि की पूजा की, घृतों से सींचा तथा उनके लिए कुश फैलाए. इसके बाद उन देवों ने अग्नि को होता बनाकर बैठाया. (९)

Mandala 1 · Verse 1
त्वामग्ने मनीषिणः सम्राजं चर्षणीनाम्. देवं मतर्यास इन्धते समध्वे.. (१)

Wise ones ignite you, O Agni, the sovereign ruler of all beings, the divine one, for worship.

हे अग्नि! अध्वर्यु आदि बुद्धिमान् लोग प्रजाओं के स्वामी एवं दीप्तिमान् तुझ अग्नि को यज्ञ में प्रज्ज्वलित करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वां यज्ञेष्वृत्विजमग्ने होता रमीळते. गोपा ऋतस्य दीदिहि त्वे दमे.. (२)

O Agni, you are the priest who invokes the offerings in sacrifices. You are the guardian of cosmic order, shining brightly within our dwelling.

हे अग्नि! अध्वर्यु आदि होता एवं ऋत्विज् रूप में तुम्हारी स्तुति अपने यज्ञ में करते हैं, तुम यज्ञ के रक्षक बनकर अपने घर में दीप्त बनो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स घा यस्ते ददाशति समिधा जातवेदसे. सो अग्ने धन्ते सुवीर्यं स पुष्यति.. (३)

He who offers oblations with fuel to the all-knowing Agni, that person, O Agni, gains strength and prospers.

हे जातवेद अग्नि! जो यजमान तुम्हें प्रज्ज्वलित करने वाली हव्य देता है, वह शक्तिशाली पुत्र-पौत्र प्राप्त करता है एवं समृद्ध बनता है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
स केतुरध्वराणामग्निर्देवेभिरा गमत. अज्जानः सप्त होतॄभिर्विष्पते.. (४)

He, the Agni, banner of sacrifices, comes with the gods, the seven priests leading the way, the lord of all.

केतु के समान यज्ञों का ज्ञापन कराने वाले अग्नि सात होताओं द्वारा घी से सिक्त्त होकर यजमान के कल्याण के लिए देवों के साथ आवें. (४)

Mandala 1 · Verse 5
प्र होते पूर्वं वचोऽग्नये भरता बृहत्. विपां ज्योतिषि बिभ्रते न वेधसे.. (५)

Offer this great word to Agni, the bearer of light, for the wise one.

हे होताओ! मेघावियों का तेज धारण करने वाले, संसार के विधाता देवों को बुलाने वाले, अग्नि के उद्देश्य से महान् एवं पूर्ववर्ती लोगों द्वारा निर्मित स्तोत्र बोलो. (५)


Mandala 1 · Verse 6
अग्निं वर्धन्तु नो गिरो यतो जायत उक्वथ्यः, महे वाजााय द्रविणाय दर्शत्ः.. (६)

May our hymns increase Agni, from whom the praiseworthy one is born, for great strength and radiant wealth.

महान् अन्न एवं धन के निमित्त दर्शनीय अग्नि की प्रशंसा जिन वचनों से होती है, हमारे वे ही स्तुतिवचन अग्नि को बढ़ावें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अग्ने यजिष्ठो अध्वरे देवान्देवयते यज. होता मन्द्रो विराजस्यति सिधः.. (७)

O Agni, most worshipful in sacrifice, you carry the offerings to the gods for the worshipper. The priest, with a pleasing voice, shines forth, having accomplished the ritual.

हे यज्ञकर्ताओं में श्रेष्ठ अग्नि! यज्ञ में देवों की कामना करने वाले यजमानों के कल्याण के लिए देवों की पूजा करो. होता एवं यजमानों को प्रसन्नता देने वाले तुम अग्नि शत्रुओं को पराजित करके सुशोभित होते हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
स नः पावक दीदिहि धुमदस्मे सुवीर्यम्, भवा स्तोतृभ्यो अन्तम्ः स्वस्तये.. (८)

O radiant purifier, shine upon us with great strength, and be our protector for the well-being of your devotees.

हे पाप शोधक अग्नि! हमें कान्ति युक्त एवं शोभन सामर्थ्य वाला धन दो तथा कल्याण के निमित्त स्तोताओं के समीप जाओ. (८)

Mandala 1 · Verse 9
तं त्वा विप्रा विपन्पवो जागृवांसः समिन्धते, हव्यवाहममर्त्य सहोवधम्.. (९)

Wise, vigilant sages ignite You, the immortal, all-pervading, and life-sustaining divine fire.

हे अग्नि! मेघावी जागरूक एवं प्रबुद्ध स्तोता हव्य वहन करने वाले, मंथनरूप, बल द्वारा उत्पन्न एवं मरणरहित तुमको भली प्रकार प्रज्वलित करते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
amī ye pañcokṣaṇo madhye tasthur maho divaḥ | devatrā nu pravācyaṁ sadhrīcīnā ni vāvṛtur vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 11
suparṇā eta āsate madhya ārodhane divaḥ | te sedhanti patho vṛkaṁ tarantaṁ yahvatīr apo vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 12
navyaṁ tad ukthyaṁ hitaṁ devāsaḥ supravācanam | ṛtam arṣanti sindhavaḥ satyaṁ tātāna sūryo vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 13
agne tava tyad ukthyaṁ deveṣv asty āpyam | sa naḥ satto manuṣvad ā devān yakṣi viduṣṭaro vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 14
satto hotā manuṣvad ā devām̐ acchā viduṣṭaraḥ | agnir havyā suṣūdati devo deveṣu medhiro vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 15
brahmā kṛṇoti varuṇo gātuvidaṁ tam īmahe | vy ūrṇoti hṛdā matiṁ navyo jāyatām ṛtaṁ vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 16
asau yaḥ panthā ādityo divi pravācyaṁ kṛtaḥ | na sa devā atikrame tam martāso na paśyatha vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 17
tritaḥ kūpe 'vahito devān havata ūtaye | tac chuśrāva bṛhaspatiḥ kṛṇvann aṁhūraṇād uru vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 18
aruṇo mā sakṛd vṛkaḥ pathā yantaṁ dadarśa hi | uj jihīte nicāyyā taṣṭeva pṛṣṭyāmayī vittam me asya rodasī

Mandala 1 · Verse 19
enāṅgūṣeṇa vayam indravanto 'bhi ṣyāma vṛjane sarvavīrāḥ | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
अग्निहोता पुरोहितोऽध्वरस्य विचर्षणिः, स वेद यजमानुषक्.. (१)

Agni, the priest of sacrifice, all-seeing and wise, knows the sacrificer thoroughly.

देवों का आह्वान करने वाले, पुरोहित एवं यज्ञ के विशेष द्रष्टा अग्नि क्रमिक रूप से यज्ञ जानते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स हव्यवाळमतर्ये उशगिद्भूतश्नोहितः, अग्निधिया समृण्वति.. (२)

He, the bearer of offerings, having become the shining, desirable, and life-giving one, is satisfied by the divine intellect.

हव्यवहन करने वाले, मरणरहित, द्रव्य के इच्छुक देवों के दूत एवं अन्नप्रिय अग्नि बुद्धि से युक्त होते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अग्निधिया स चेतति केतुर्जन्यस्य पूर्वः, अर्थ हास्य तरणि.. (३)

The radiant sun, like a divine fire, awakens the world, illuminating all beings and revealing their true purpose.

झंडे के समान यज्ञ के ज्ञापक एवं प्राचीन अग्नि अपनी बुद्धि से सब कुछ जानते हैं. अग्नि का तेज अंधकार को नष्ट करता है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अग्निं सूनं सनश्रुतं सहसो जातवेदसम् । वह्निं देवा अकण्वत ॥ (४)

The gods have invoked Agni, the radiant, the widely heard, the powerful, the all-knowing, the carrier.

बल के पुत्र, सनातन रूप से प्रसिद्ध तथा जातवेद अग्नि को देवों ने हव्य ढोने वाला बनाया है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अदाभ्यः पुरएता विशामग्निर्मानुषीणाम् । तूर्णी रथः सदा नवः.. (५)

Agni, the divine messenger and leader of humanity, is ever-present and eternally new, like a swift chariot.

मानवी प्रजाओं के अग्रगामी, शीघ्रता करने वाले, रथ के समान द्रव्य ढोने वाले एवं नित्य नवीन अग्नि का कोई तिरस्कार नहीं कर सकता. (५)


Mandala 1 · Verse 6
साहन्विंश्चाभियुजः क्रतुर्देवानामृतः । अग्निरस्तुविश्वस्तमः.. (६)

May the powerful and victorious, the divine and immortal, the fire of all beings, be our refuge.

समस्त शत्रुसेना को पराजित करने वाले, शत्रुओं द्वारा अवध्य एवं देवों के पोषक अग्नि अनेक प्रकार के अस्त्रों से युक्त हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अभि प्रयांसि वाहसा दाक्षां अश्नोति मर्त्यः क्षयं पावcoshishch.. (७)

Through effort and strength, mortals attain prosperity and lasting peace.

हव्य देने वाला मनुष्य हव्यवहन करने वाले अग्नि की कृपा से समस्त अन्नो को प्राप्त करता है एवं पवित्र प्रकाश वाले अग्नि से घर पाता है. (७)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्राग्नी आ गतं सुतं गीर्भिर्नभो वरेण्यम् । अस्यं पातं धियेषिता.. (१)

O Indra and Agni, you have come to this worthy son, praised by hymns, to protect him with your divine power.

हे इंद्र एवं अग्नि! हमारी स्तुति द्वारा बुलाए जाने पर तुम शुद्ध किए हुए एवं उत्तम सोम रस को लक्ष्य करके स्वर्ग से यहां आओ एवं हमारे द्वारा किए जाते हुए यज्ञकर्म में इसे पिओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इन्द्राग्नी जरितुः सचो जियाति चेतन्ः । अया पातममिं सुतम्.. (२)

May Indra and Agni, the divine powers, hear the prayer of the worshipper and accept the offered Soma juice.

हे इंद्र एवं अग्नि! स्तोता का सहायक, यज्ञ का साधन एवं इंद्रियों को आनंदित करने

Mandala 1 · Verse 3
इन्द्रमग्निं कविच्छदा यज्ञस्य जूत्या वृणे. ता सोमस्येह तृम्प्. (३)

I choose Indra and Agni, the wise bestowers, for the vigorous performance of sacrifice. May Soma here satisfy us.

इस यज्ञ के साधनभूत सोम रस की प्रेरणा से मैं स्तोताओं के लिए सुखदाता इंद्र और अग्नि का वरण करता हूं. वे इस यज्ञ में सोम पीकर तृप्त हों. (३)

Mandala 1 · Verse 1
प्र वो देवायाग्ने बहिष्ठमर्चिसे. गमध्वेभिरा स नो यजिष्ठो बहिंरा सदत्.. (१)

O Agni, you are the most worshipful deity, to whom we offer this hymn. May you, the most excellent sacrificer, be seated here with your flames.

Mandala 1 · Verse 2
ऋतावा यस्य रोदसी दक्षां सञ्चन्त ऊतयः । हविष्मन्तस्तमीळते तं सनिष्यन्तोऽवसे.. (२)

The mighty powers, ever active, sustain heaven and earth. Those who offer oblations worship Him, seeking His protection and favor.

द्यावापृथिवी जिस अग्नि के वश में हैं, देव उसके बल की सेवा करते हैं. वह सत्यकर्म वाला है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स यन्ता विप्र एषां स यज्ञानामथा हि षः : अग्निं तं वो दुवस्यत दाता यो वनिता मधुम्.. (३)

He is the controller, the wise one, the essence of these sacrifices. Worship Him, the giver, who bestows sweetness.

हे ऋत्विजो! मेघावी अग्नि यजमानों, यशों एवं सोम के नियामक, कर्मफल एवं महान् धन के दाता हैं. तुम उन्हीं अग्नि की सेवा करो. (३)


Mandala 1 · Verse 4
स नः शर्मणि वीतयेऽग्निर्येच्छतु शन्तमा. यतो नः प्र குறிப்பிदिवि क्षितिभ्योऽपस्वा.. (४)

May Agni, the most benevolent, lead us to prosperity and well-being, bestowing upon us abundant sustenance and strength.

वे अग्नि हम हव्यदाताओं के लिए सुखकारक घर प्रदान करें. अग्नि के पास से धरती, आकाश और स्वर्ग का उत्तम धन हमारे पास आवे. (४)

Mandala 1 · Verse 5
दीदिवांसंपृण्ये वस्वीभिरस्य धीतिभिः. ऋक्वाणोऽग्निमिन-धते होतारं विश्वपतिं विशाम्.. (५)

The radiant Agni, the invoker and lord of all, is honored by the praises and offerings of the wise.

स्तुति करते हुए होता आदि दीप्तिमान्, प्रतिक्षण नवीन, देवों को बुलाने वाले तथा प्रजाओं के परम पालक अग्नि को उत्तम स्तुतियों द्वारा प्रज्वलित करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
उत नो ब्रह्मचन्विषु उक्थेपु देवहूतम्ः. शं नः शोचा मरुदृवृधोऽग्ने सहससातम्.. (६)

O Agni, bestower of strength, invoked by hymns and chants, bring us well-being and prosperity.

हे अग्नि! स्तुति करते समय हम यजकर्त्ताओं की रक्षा करो. हे देवों को बुलाने वालों में श्रेष्ठ! मंत्र बोलते समय हमारी रक्षा करो. हे मरुतों द्वारा बघित एवं हज़ारों धनों के दाता अग्नि! हमारा सुख बढ़ाओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
नू नो रास्य सहसวัตोकवतुष्णिमदृसु. घुमदग्ने सुवीर्यं वर्षिष्ठमनुपक्षितम्.. (७)

O powerful Agni, grant us abundant strength and protection, so that we may enjoy your unfailing, ever-increasing glory.

हे अग्नि! हमें पुत्र-पौत्र युक्त, पोषण करने वाला, दीप्तिमान् एवं शोभनशक्ति युक्त हज़ारों प्रकार का क्षयरहित धन दो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
yad indrāgnī yaduṣu turvaśeṣu yad druhyuṣv anuṣu pūruṣu sthaḥ | ataḥ pari vṛṣaṇāv ā hi yātam athā somasya pibataṁ sutasya

Mandala 1 · Verse 9
yad indrāgnī avamasyām pṛthivyām madhyamasyām paramasyām uta sthaḥ | ataḥ pari vṛṣaṇāv ā hi yātam athā somasya pibataṁ sutasya

Mandala 1 · Verse 10
yad indrāgnī paramasyām pṛthivyām madhyamasyām avamasyām uta sthaḥ | ataḥ pari vṛṣaṇāv ā hi yātam athā somasya pibataṁ sutasya

Mandala 1 · Verse 11
yad indrāgnī divi ṣṭho yat pṛthivyāṁ yat parvateṣv oṣadhīṣv apsu | ataḥ pari vṛṣaṇāv ā hi yātam athā somasya pibataṁ sutasya

Mandala 1 · Verse 12
yad indrāgnī uditā sūryasya madhye divaḥ svadhayā mādayethe | ataḥ pari vṛṣaṇāv ā hi yātam athā somasya pibataṁ sutasya

Mandala 1 · Verse 13
evendrāgnī papivāṁsā sutasya viśvāsmabhyaṁ saṁ jayataṁ dhanāni | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
विद्युदृथः सहससपुत्रो अग्निः शोचिष्केशः पृथिव्यां पाजो अभेत्..(१)

The son of lightning, Agni, with fiery hair, has entered the earth with great power.

देवों का आह्वान करने वाले, स्तुतिकर्ताओं को प्रसन्न करने वाले, यज्ञकर्ता, अत्यंत मेधावी, जगत् के विधाता, चमकीले रथ वाले, बल के पुत्र, ज्वलारूपी केश वाले एवं धरती पर अपनी प्रज्ञा प्रकट करने वाले अग्नि हमारे यज्ञ में स्थित हैं..(१)

Mandala 1 · Verse 2
अयामि ते नमउक्तिं जुषस्व ऋतावास्तुं चेतते सहस्रः। विद्वां आ वक्षि विदुषो नि बल्सि मध्य आ बर्हिस्तृते यजत्र.. (२)

Accept my humble salutations, O thousand-rayed one, who dwells in the eternal order. The wise one brings the wise, and the invoked one settles amidst the sacred grass.

अयामि ते नमउक्तिं जुषस्व ऋतावास्तुं चेतते सहस्रः। विद्वां आ वक्षि विदुषो नि बल्सि मध्य आ बर्हिस्तृते यजत्र.. (२) हे यज्ञस्वामी अग्नि! मैं तुम्हारे प्रति नमस्कार करता हूं। हे बलवान्! तुझ यज्ञकर्मज्ञापक के प्रति जो नमस्कार किया है, उसे स्वीकार करो। हे विद्वान् एवं यज्ञ के योग्य अग्नि! विद्वानों को हमारे यज्ञ में लाओ एवं हमारी रक्षा करने के निमित्त बिछे हुए कुशों पर बैठो..(२)

Mandala 1 · Verse 3
द्रवत्ं त उपसा वाजन्यन्ती अग्ने वातस्य पथ्याभिरिच्छ। यत्सीम्ज्जानन्ति पूर्वं हविर्भिर्वाबन्धुरेव तत्सुदुरोणे.. (३)

O Agni, you who are invoked by the flowing waters, seek the path of the wind. You are bound by the ancient offerings, dwelling in the spacious home.

द्रवत्ं त उपसा वाजन्यन्ती अग्ने वातस्य पथ्याभिरिच्छ। यत्सीम्ज्जानन्ति पूर्वं हविर्भिर्वाबन्धुरेव तत्सुदुरोणे.. (३) हे अग्नि! अन्न का निर्माण करने वाली उष तथा निशा तुम्हारे समीप जाती हैं। तुम भी वाURUPi मार्ग से उनके समीप जाओ, क्योंकि ऋत्विज् हवि द्वारा तुझ प्राचीन अग्नि को सींचते हैं। जु की तरह परस्पर मिली हुई उष और निशा हमारी यज्ञशाला में बार-बार रहें..(३)

Mandala 1 · Verse 4
मित्रश्च त्वं वरुणः सहस्रवोऽग्ने विश्वे मरुतः सुम्नचर्चन। यच्छोचिषा सहससपुत्र तिष्ठा अभि क्षिती: प्रथयन्त्यसूर्या नृ.. (४)

O Mitra, Varuna, Agni, all the Maruts, you who are praised with joy, bestow your favor. May your brilliance stand firm, spreading forth over all beings, O son of strength.

मित्रश्च त्वं वरुणः सहस्रवोऽग्ने विश्वे मरुतः सुम्नचर्चन। यच्छोचिषा सहससपुत्र तिष्ठा अभि क्षिती: प्रथयन्त्यसूर्या नृ.. (४) हे बलसंपन्न अग्नि! मित्र, वरुण, विश्वेदेव एवं मरुत् तुम्हें लक्ष्य करके स्तोत्र धारण करते हैं, क्योंकि तुम्ही बल के पुत्र तथा सूर्य हो और मनुष्यों को मार्ग दिखाने वाली किरणें सब जगह फैलाकर प्रकाश से दीप्त हो..(४)

Mandala 1 · Verse 5
वयं ते अद्य ररिमा हि काममुतानहस्ता नमसोपसह्। यजिष्ठेन मनसा यक्षि देवान्सेधता मन्मना विप्रो अग्ने.. (५)

We shall praise you today with desire, and with humble reverence. With the most devoted mind, O Agni, worship the gods, and let the wise man be pleased with our thoughts.

वयं ते अद्य ररिमा हि काममुतानहस्ता नमसोपसह्। यजिष्ठेन मनसा यक्षि देवान्सेधता मन्मना विप्रो अग्ने.. (५) हे अग्नि! ऊपर हाथ उठाकर हम आज पर्याप्त मात्रा में द्रव्य देते हैं. हे मेधावी! हमारी तपस्या से प्रसन्न होकर मन में हमारे यज्ञ की रक्षा करते हुए बहुत से स्तोत्रों द्वारा देवों की पूजा करो..(५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वद्धि पुत्र सहससो वि पूर्वीर्दिवस्य यन्त्युतोयो वि वाजाः। त्वं देहि सहस्रिणं रयिं नोड्रोधेण वचसा सत्यमग्ने.. (६)

O Agni, you are the source of immense strength and brilliance, bestowing abundant wealth and truth through your powerful words.

त्वद्धि पुत्र सहससो वि पूर्वीर्दिवस्य यन्त्युतोयो वि वाजाः। त्वं देहि सहस्रिणं रयिं नोड्रोधेण वचसा सत्यमग्ने.. (६) हे बल के पुत्र अग्नि! रक्षणकार्य एवं अन्न तुम्हारे पास से यजमान के समीप जाता है. तुम द्रोहरहित वचनों से प्रसन्न होकर हमें हजारों प्रकार का धन एवं सत्यशील पुत्र दो..(६)


Mandala 1 · Verse 7
तुभ्यं दक्ष कविक्तो यानीमा देव मर्तसो अध्वरे अकर्म. त्वं विश्वस्यSurthasya बोधि सर्व तदग्ने अमृत स्वदेह.. (७)

To you, O wise and powerful Agni, we offer our hymns and oblations in this sacrifice. You are the protector of all, the source of all prosperity; may you bestow upon us immortality and well-being.

हे दक्ष! कवियों द्वारा यज्ञ में तुम्हारे लिए जो कर्म किये हैं, हे अग्नि! तुम उन सबको जानते हो, तुम अमृत स्वरूप हो। (७)

Mandala 1 · Verse 8
puraṁdarā śikṣataṁ vajrahastāsmām̐ indrāgnī avatam bhareṣu | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
वि पाजसा पृधुना शोशुचानो बाधस्व द्विषो रक्षसो अमीवाः. सुशर्मणो बृहत्: शर्मणि श्याम्नगनेरहं सुवस्व्यं प्रणीतौ.. (१)

May the radiant, all-pervading divine power destroy enemies, demons, and diseases. In the great protection of the benevolent, may I be led to abundant prosperity.

हे अग्नि! विस्तृत तेज द्वारा अत्यंत दीप्त तुम हमारे शत्रुओं तथा रोघरहित राक्षसों का विनाश करो. मैं सुखदाता, महान् एवं उत्तम आह्वान वाले अग्नि की सुखद रक्षा में रहूंगा. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वं नो अस्या उषसो व्युष्टौ त्वं सूर उदिते बोधि गोपाः. जन्मेव नित्यं तनयं जुषस्व स्तोमे में अग्ने तन्वा सुजात.. (२)

O Agni, you are our protector at the dawn and when the sun rises. May you be pleased with our praise and our offspring, as you are eternally pleased with your own divine birth.

हे अग्नि! तुम वर्तमान उष के प्रकाशित एवं सूर्य के निकलने के बाद हमारी रक्षा के निमित्त जागो. हे स्वयंभू! तुम हमारी स्तुतियाँ उसी प्रकार स्वीकार करो, जैसे पिता पुत्र को स्वीकार करता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्वं नृचक्षा वृषभानु पूर्वी: कृष्णस्वग्ने अरुषो वि भासि. वसो नेषिं च पर्षं चात्यहं: कृधीं नो राय उशिजो यविष्ठ.. (३)

O Agni, radiant and powerful, you who are seen by men and are the source of strength, illuminate us with your brilliance. Grant us wealth and enable us to cross over all difficulties, O most youthful one.

हे कामवर्षक एवं मानवों के शुभाशुभदर्शक अग्नि! तुम अंधेरी रातों में पहले की अपेक्षा अधिक चमकते हुए ज्वालाओं को विस्तृत करो. हे वासदाता! हमें कर्मानुरूप फल दो तथा पाप का नाश करो. हे अतिशय युवक! हमें धन का अभिलाषी बनाओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अषाढो अग्ने वृषभो दिदीहि पुरो विश्वा: सौभगानि सञ्जिगीवान्. यस्यस्य नेता प्रथम्npy पायोर्जितवेदो बृहत्: सुप्रणीते.. (४)

O Agni, like a bull in Ashadha, shine forth, bestowing all prosperity and victory. You are the leader, the most powerful, the great provider, guiding us with perfect wisdom.

हे शत्रुओं द्वारा अपराजित एवं कामवर्षक अग्नि! तुम शत्रुओं की समस्त नगरियों एवं उन में स्थित धन को भली प्रकार जीत कर प्रकाशित बनो. हे शोभनकर्मा एवं जातवेद अग्नि! तुम महान् यज्ञ के नेता एवं आश्रयदाता तथा पूर्णकर्ता बनो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अच्छिद्रा शर्म जरित: पुरुषो देवा अच्छं दीघान: सुमेधाः. रथं न सञ्चरिभिं वक्षि वाजमग्ने त्वं रोदसी न: सुमेके.. (५)

O Agni, you who are the protector and bestower of joy, grant us abundant wealth and strength, like a chariot carrying provisions, and illuminate our world with your radiant wisdom.

अच्छे छिद्र रहित सुख को देने वाले! हे पुरुष! हे देवताओं! हे सुमेधा! तुम रथों को अच्छी प्रकार चलाकर, हे वाज को ले जाने वाले अग्नि! तुम द्यावा-पृथ्वी को सुखपूर्वक ले चलो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
प्र पीपय वृषभ जिन्व वाजान्ग त्वं रोदसी नः सुदोघे. देवेभिर्र्देव सुरुचा रुचानो मा नो मर्त्यस्य दुर्मतिः परि छात्.. (६)

O powerful one, nourish us with strength and sustenance, as the earth and sky are ever-giving. May divine brilliance protect us from the ill-intentions of mortals.

हे कामवर्धक अग्नि! तुम हमारे अभिलषित फल बढ़ाओ तथा अन्न प्रदान करो. हे देव! शोभन किरणों द्वारा प्रकाशित तुम देवों के साथ मिलकर धरती-आकाश को हमारे लिए फलप्रद बनाओ. शत्रुओं संबंधी पराभव हमारे समीप न आवे. (६)

Mandala 1 · Verse 7
इळाग्मग्ने पुरूरदंसं सनिं गोः शश्रुतम्ं हवमानय साध. स्यान्नः सूनस्तनयो विजवाग्ने सा ते सुमतिर्भूत्वस्.. (७)

O Agni, bestower of wealth and sustenance, hear our invocation. May we be blessed with strong sons and progeny, and may your favor be upon us.

हे अग्नि! यज्ञ करने वाले मुझ यजमान को सदा अनेक कर्मों की साधनरूप गौ प्रदान करो. हे अग्नि! हमें पुत्र एवं पौत्र प्राप्त हों तथा तुम्हारी फलदायक सुबुद्धि हमारे अनुकूल हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
niś carmaṇa ṛbhavo gām apiṁśata saṁ vatsenāsṛjatā mātaram punaḥ | saudhanvanāsaḥ svapasyayā naro jivrī yuvānā pitarākṛṇotana

Mandala 1 · Verse 9
vājebhir no vājasātāv aviḍḍhy ṛbhumām̐ indra citram ā darṣi rādhaḥ | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
अयमग्निः सुवीर्यस्येो महः सौभाग्यस्य. राय ईशे स्वपत्यस्य गोमत ईशे वृत्रहनानाम्.. (१)

This Agni (fire) is the source of great strength and immense good fortune. He rules over wealth and prosperous offspring, and is the slayer of obstacles.

यह अग्नि शोभन सामर्थ्य युक्त, महान् सौभाग्य के स्वामी, गाय एवं उत्तम संतानयुक्त धन के स्वामी एवं शत्रुरूपी पापों के नष्ट करने में समर्थ हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इमं नरो मरुतः सक्षता वृधं यस्मिन्नायः शेवधासः. अभि ये सन्ति पूतनासु दूढयो विश्वाहा शत्रुमादभुः.. (२)

May the Maruts, who are protectors and bestowers of wealth, strengthen this one, who, with their aid, has conquered enemies in all battles.

हे यजकर्म के वेत्ता मरुतो! सौभाग्य बढ़ाने वाले अग्नि की सेवा करो. इसमें सुख बढ़ाने वाले धन हैं. मरुदगण सेनाओं वाले बड़े युद्धों में शत्रुओं को हराते हैं एवं सदा शत्रुओं का नाश करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स त्वं नो रायः शिशिहि मीढवो अग्ने सुवीर्यस्य. तुविद्युम्नं वृष्भस्य प्रजावतोऽनमीवस्य शुष्मिणः.. (३)

O Agni, you are the bestower of wealth, strength, and progeny; may you grant us abundant riches and a life free from illness and full of vigor.

हे प्रभूत धन से युक्त एवं अभिलाषापूरक अग्नि! हमें अधिक मात्रा वाला, संतानयुक्त, आरोग्य, शक्ति एवं सामर्थ्यसंपन्न तथा धन का स्वामी बनाओ. (३)


Mandala 1 · Verse 4
आ देवेषु यतत आ सुवीर्य आ शंस उत ॠणूनाम्.. (४)

May we be blessed with strength and valor, and may our prayers be heard by the gods and the ancestors.

समस्त विश्व के कर्ता अग्नि विश्व में निवास करते हैं, द्रव्य को ढोते हुए देवों के समीप ले जाते हैं, स्तोताओं के सामने आते हैं, यज्ञकर्ताओं के स्तोत्र सुनने आते हैं तथा युद्ध में मानवों की रक्षा करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
मा नो अग्नेऽमतये मावीरताय रीरधः। मागोताये सहसस्सुत्र मा निदेऽप द्रेष्ांस्या कृधि.. (५)

O Agni, do not let us fall into death, weakness, or destruction. Do not bring us into a state of helplessness or hatred.

हे अग्नि! हमें शत्रुतापूर्ण मार्ग से दूर मत करो, हमें बलहीन मत करो और हमें द्रोहियों के बीच मत डालो. (५)

Mandala 1 · Verse 1
समियधमानः प्रथमानु धर्मा समकृभिरज्यते विश्ववारः। शोचिष्केशो घृतनिर्णिग्वावकः सुयज्ञो अग्निर्यजथाय देवान्.. (१)

The radiant Agni, adorned with sacrificial offerings, is the first of all Dharma, the protector of the universe, and the one who invites the gods to the sacrifice.

यज्ञ संबंधी कर्मों के धारक, ज्वारारूपी केश वाले, सबके स्वीकार्य, पवित्र करने वाले एवं शोभन यज्ञों से युक्त अग्नि यज्ञ के प्रारंभ में क्रमशः जलते हैं एवं देवयज्ञ करने के लिए धी से सींचे जाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यथायजो होत्रमग्ने पृथिव्या यथा दिवो जातवेदश्चिकित्वान्। एवानेन हविषा यक्ष‍ि देवान् मनुष्यान् च प्र तिरेमम.. (२)

As the fire god Agni, the knower of all, is worshipped with oblations on earth and in heaven, so may we, with this offering, propitiate the gods and men.

हे जातवेद एवं सर्वज्ञ अग्नि! तुमने जिस प्रकार यजमानरूप पृथ्वी का हवि स्वीकार किया, जिस प्रकार आकाश देवता का द्रव्य स्वीकार किया, उसी प्रकार हमारे यज्ञ में होता बनकर देवों को उनका भाग प्रदान करो. तुम मनु के यज्ञ के समान हमारा यज्ञ आज पूरा करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्रीण्यायुंषि तर्ब जातवेदस्सिस् आजानीरुष्सरते अग्ने. ताभिर्देवानामो यक्ष‍ि विद्दानथा भव यजमानाय शं योः.. (३)

O Agni, possessor of all life, grant us three lives, and with them, knowing, may we worship the gods and bring well-being to the sacrificer.

हे जातवेद अग्नि! तुम्हारा अन्न तीन प्रकार का है तथा तीन प्रकार की उष्माएं तुम्हारी माता हैं. तुम उनके साथ मिलकर देवों को हव्य दो. हे विद्वान् अग्नि! तुम यजमान के सुख

Mandala 1 · Verse 4
अग्ने सुदीते सुदृशं गृणन्तो नमस्यामस्त्वेद्यं जातवेदः। त्वां दूतमरितं हव्यवाहे देवा अकण्वव्रतस्य नाभिम्. (४)

O Agni, brightly shining and most worthy of praise, we bow to you, the knower of all births, the divine messenger. You, the bearer of offerings, are the vital center for the one who performs the ritual.

हे जातवेद अग्नि! हम शोभन दीप्ति वाले, सुन्दर एवं स्तुति के योग्य तुम्हें नमस्कार करते हैं। देवों ने तुम्हें विषयों से आसक्ति रहित, हव्य वहन करने वाला दूत तथा अमृत की नाभि बनाया है। (४)

Mandala 1 · Verse 5
यस्वद्दोता पूर्वो अग्ने यजीयान्दिदृक्षश्च सता स्वधया च शम्भुः। तस्यानु धर्मं प्र यजा चिकित्वोऽथा नो अध्वरं देववीततौ. (५)

May we, with knowledge and devotion, worship the divine Agni, the most excellent and desired, who brings joy through His own power. Through Him, may our sacrifice be pleasing to the gods.

हे सर्वज्ञ अग्नि! तुमसे पहले जो विशेष यज्ञ करने वाले हुए थे एवं स्वधा के साथ उत्तम तथा मध्यम स्थानों पर बैठे कर जिन्होंने सुख पाया था, उनके धारक गुणों का विचार करके पहले उनका यज्ञ पूरा करो। इसके बाद देवों को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ पूरा करो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
व्रतंतवातं गणगणं सुशस्तिभिरभनेभं मरुतामोऽ ईमहे. पृष्ठक्ष्वासो अनवभ्राधसो गन्तारो यज्ञं विदधेषु धीराः.. (६)

We invoke the divine powers, the Maruts, who are swift and strong, with hymns of praise. They are the skilled performers of sacrifice, the steadfast protectors, who lead us to auspiciousness.

हम बहुत से स्तुति मंत्रों द्वारा अग्नि के तेज और मरुतों के ओज की याचना करते हैं. बुंदकियो से युक्त घोड़ों वाले, संपूर्ण धनयुक्त एवं धीर मरुद्गण यज्ञ में हवि को लक्ष्य करके जाते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अग्निरस्मि जन्मना जातवेदा घृतं मे चक्षुरमृतं म आसन. अर्कस्स्थिधातु रजसो विमानोऽजसो घर्मो हविरस्मि नाम.. (७)

I am Agni, born as Jataveda; ghee is my eye, immortality my seat. I am the sun, the purifier of the universe, the essence of sacrifice, and my name is Dharma.

हे कुशिकगोत्रीय ब्राह्मणो! मैं जन्म से ही सर्वज्ञ अग्नि हूँ. घृत मेरा नेत्र है तथा अमृत मेरे मुख में रहता है. मेरे प्राण तीन प्रकार के हैं. मैं आकाश को नापने वाला, नित्यप्रकाशयुक्त एवं हव्यरूप हूँ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
त्रिभिः पवित्रेरपुपोद्ध्‌१र्कं हृदा मतिं ज्योतिरनु प्रजानन्. वर्षिष्टं रत्नमकूत स्वधाभिरदिद्‌ द्यावापृथिवी पर्यपश्यत्.. (८)

The radiant mind, purified by three sacred elements, apprehending the light of knowledge, embraced the most precious treasure, and with its own powers, encompassed heaven and earth.

अग्नि ने मन से सुंदर ज्योति को अच्छी तरह जानकर स्वयं को तीन पवित्र रूपों में शुद्ध किया. उन रूपों द्वारा स्वयं को परम रमणीय बनाया तथा इसके पश्चात् धरती और आकाश को देखा. (८)


Mandala 1 · Verse 9
शतधारमुत्समक्षीयमाणं विपश्चितं पितरं वक्त्वानाम्। मेल्लिं मदन्तं पितृरूपस्थे तं रोदसी पिपृत् सत्यवाचम्.. (९)

The wise Father, the source of all speech, inexhaustible and flowing like a hundred streams, is praised by the wise. The earth and sky are filled with Him, the truthful speaker.

हे धरती और आकाश! सौ धाराओं वाले सोते के समान कभी क्षीण न होने वाले, মেধवी, पालनकर्ता, वेदवाक्यों का एकत्र संग्रह करने वाले, माता-पिता के समीप प्रसन्चित एवं सत्यवादी उस उपाध्याय को संपूर्ण करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
नि त्वा दधे वरेण्यं दक्षस्येळा सहस्कृतं. अग्ने सुदीतिमृशिजम्.. (१०)

O Agni, the most excellent, the bestower of boons, you are placed with the divine Shakti and the earth, shining with brilliant light.

हे बल द्वारा उत्पन्न, शोभनदीप्ति युक्त, हव्य के अभिलाषी एवं वरणीय अग्नि! दक्ष की पुत्री इडा अर्थात् यज्ञभूमि तुम्हें धारण करती है. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अग्ने यन्तुग्मप्तरमृतस्य योगे वपुष्ः. विप्रं वाजैः समिन्धते.. (११)

Agni, the divine fire, is invoked to bring forth immortality through union, and is kindled with offerings by the wise.

भक्त यजमान एवं मेघावी अध्वर्यु सबके नियंता एवं जल के प्रेरक अग्नि को यज्ञ के प्रयोग के लिए हवि स्वरूप अन्नो के द्वारा भली-भाँति प्रदीपप्त करते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
ऊर्जो नपातंमध्वरे दीदिवांसमुप घवि. अग्निमीळे कविक्रतुम्.. (१२)

I praise Agni, the radiant, the son of energy, the brilliant one in sacrifice, the wise and powerful.

ऊर्जा नपातम् अध्वरे दीदिवांसमुप घवि. अग्निमीळे कविक्रतुम्.. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
ईळेन्यो नमस्यिस्तरस्तमांसि दर्शतः. समग्नरिरिष्यते वृषा.. (१३)

He who is praised and worshipped, who dispels darkness with His radiance, is the powerful one, the giver of strength, who is invoked in sacrifice.

पूजा तथा नमस्कार के योग्य, अंधकार का नाश करने के कारण सबके दर्शनीय एवं कामवर्षि अग्नि प्रज्वलित किए जाते हैं. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
वृष्ो अग्निः समिधयेऽश्नो न देववाहनः. तं हविष्मन्त ईळते.. (१४)

The powerful Agni, the carrier of offerings to the gods, is kindled. Those who offer oblations worship Him.

घोड़े के समान देवों का हव्य ढोने वाले एवं कामवर्षक अग्नि प्रज्वलित किए जाते हैं. हवि धारण करने वाले यजमान उनकी प्रार्थना करते हैं. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
वृष्णं त्वा वर्य वृष्न्नृषणः समिधीमहि. अग्ने दीघतं बृहत्.. (१५)

O Agni, most powerful and radiant, we ignite you with strength and vigor, that you may shine forth with great brilliance.

हे कामवर्षक अग्नि! जल बरसाने वाले दीप्तिमान् एवं महान् तुमको घी की आहुति से सींचने वाले हम प्रज्वलित करते हैं. (१५)

Mandala 1 · Verse 16
यदद त्वं प्रयति यज्ञेऽस्मिन्नहोताऽऽऽग्निचिद्वोऽवृणीमहीह । ध्रुवमया ध्रुवमुताऽऽऽशिषाः प्रजाऽऽऽन्विद्वां उप याहि सोमम्.. (१६)

O Agni, the invoked priest, we have chosen you for this sacrifice. Come with firm resolve and blessings, bringing forth progeny.

हे होमनिषिपादक एवं यज्ञकर्मज्ञानी अग्नि! इस यज्ञ में हम तुम्हारा वरण करते हैं, इसलिए तुम देवों को हमारा हव्य पहुंचाओ, उन्हें शांत करो एवं यज्ञ को जानते हुए सोम के समीप आओ. (१६)

Mandala 1 · Verse 17
उदूह रक्षः सहमूलमिन्द्र वृक्षा मध्यं प्रत्यग्रं शृणीहि। आ कीवतः सलूलकं चक्रर्थं ब्रह्मद्विषे तपुषिं हेतिंमस्य.. (१७)

O Indra, uproot the Rakshasa with its very foundation, and sever its branches. With your thunderbolt, strike down the weapon of the Brahman-hater.

हे इंद्र! यज्ञ में विघ्न डालने वाले राक्षसों को जड़ से नष्ट करो, उनका बीच का हिस्सा काटो तथा ऊपर का भाग समाप्त करो. चलने वाले राक्षस को दूर फेंक दो. ब्राह्मणों से द्वेष करने वाले उस राक्षस पर संतापकारी अस्त्र फेंको. (१७)

Mandala 1 · Verse 18
स्वस्तये वाजिभिश्व प्रणेतः सं यन्महीरिष आसस्तिं पूर्वीः। रायो वन्तारो बृहत्ः स्यामास्मे अस्तु भग इन्द्र प्रजावान्.. (१८)

May we, the worshippers of the great Indra, be blessed with abundant wealth and progeny, and may this divine favour bring us prosperity and well-being.

हे विश्वपालक इंद्र! हमें घोड़ों का मालिक एवं अविनाशी बनाओ. यदि तुम हमारे समीप रहोगे तो हम बहुत से अन्न एवं विशाल धन का उपभोग करते हुए महान् बनेंगे. हे इंद्र! हमारे पास संतानयुक्त धन दो. (१८)

Mandala 1 · Verse 19
आ नो भर भगमिन्द्र घुमन्तं नि ते देष्णस्य धीमहि प्ररेके. ऊर्ध्वव पप्रथे कामो अस्मे तमा पूण वसुपते वसूनाम्.. (१९)

O Indra, bring us abundant wealth and prosperity, for we meditate on your glorious power. Our desires have grown, and we seek your abundant riches, O lord of wealth.

हे इंद्र दीप्ति युक्त धन हमारे पास लाओ. हम तुझ दानशील के धन के पात्र हैं. हे धनपति! हमारी अभिलाषा बड़ेवानल के समान बढ़ गई है, तुम उसे पूर्ण करो. (१९)

Mandala 1 · Verse 20
इमं कामं मन्दया गोभिरैश्वेन्द्रवतां स्वर्यो मतिभिष्टुभ्यं विप्रा इन्द्राय वाहः कुशिकसो अक्रन्.. (२०)

The wise priests, with their minds devoted to Indra, offered this praise and sacrifice to him, just as the cows, though slow, bring forth milk.

हे इंद्र! हमारी इस धनाभिलाषा को गायों, घोड़ों एवं दीप्ति युक्त धन से पूरा करो. इन संपत्तियों द्वारा हमें प्रसिद्ध बनाओ. स्वर्गादि सुख के अभिलाषी एवं यज्ञकर्म में कुशल कुशिकगोत्रीय ऋषियों ने मंत्रों द्वारा यह स्तुति की है. (२०)

Mandala 1 · Verse 21
आ नो गोत्रा दर्दृहि गोपतं गाः समस्भ्यं सनयो यन्तु वाजाः। दिवक्षा असि वृषभ सत्यशुष्मोऽस्मभ्यं सु मध्वन्बोधि गोदाः.. (२१)

May the cows, our wealth, be strong and abundant, and may nourishment come to us. O powerful and truthful one, grant us sweetness and the gift of cows.

हे स्वर्ग के स्वामी इंद्र! बादलों को फाड़ कर हमें जल दो. इसके बाद उपभोग के योग्य अन्न हमारे पास आए. हे कामवर्षक! तुम आकाश को व्याप्त किए हो. हे सत्य सामर्थ्य मघवन्! हमें गाएं दो. (२१)

Mandala 1 · Verse 22
श्रुवन्तमुग्रमूत्सायं समत्सु घ्नन्त्रि वृत्राणि सञ्जितं धनानाम्।

He who hears the mighty, roaring one, and slays the Vritras in battle, wins wealth.

धन प्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्, सकल विश्व के नेता, स्तुतियाँ सुनने वाले, शत्रुओं को भयंकर, युद्धों में राक्षसविनाशाकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इन्द्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं। (२२)

Mandala 1 · Verse 23
yābhiḥ kutsam ārjuneyaṁ śatakratū pra turvītim pra ca dabhītim āvatam | yābhir dhvasantim puruṣantim āvataṁ tābhir ū ṣu ūtibhir aśvinā gatam

Mandala 1 · Verse 24
apnasvatīm aśvinā vācam asme kṛtaṁ no dasrā vṛṣaṇā manīṣām | adyūtye 'vase ni hvaye vāṁ vṛdhe ca no bhavataṁ vājasātau

Mandala 1 · Verse 25
dyubhir aktubhiḥ pari pātam asmān ariṣṭebhir aśvinā saubhagebhiḥ | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
शार्ङ्गदृष्टिर्हिर्युतप्यं गाद्धिर्ऋतस्य दीधितिं सपर्यन्। पिता यत्र दुहितुः सेकमृज्जन्त्स शग्म्येन मनसा दधन्वे.. (१)

The one with the bow-like gaze, worshipping the radiance of Truth, the father, with a benevolent mind, embraced his daughter's offering.

बिना पुत्र वाला पिता यह जानता हुआ कि इस कन्या का पुत्र मेरा पुत्र होगा, पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ दामाद की सेवा करता हुआ शास्त्र के अनुसार उसके पास गया। ऐसी कन्या का पति उस में सुख का ध्यान करता हुआ वीर्य-संधान करता है, पुत्र उत्पन्न करने के लिए नहीं। (१)

Mandala 1 · Verse 2
न जामये तान्वो रिक्थमामैक्चकार गर्भं सनितुर्निधनम्। यदि मात्रो जनयन्त वह्निमन्तः कर्ता सुकृतोरस्य ऋऋणन्.. (२)

The mother's womb, a vessel of creation, conceives the divine spark, a debt to the creator.

औरस पुत्र अपनी बहिन को धन नहीं देता, वह उसका विवाह करके उसे केवल पति का गर्भ धारण का अधिकार देता है। यदि माता-पिता पुत्र एवं पुत्री दोनों को उत्पन्न करते हैं, तो इनमें से पुत्र पिंडदान का उत्तम कर्म करता है तथा कन्या केवल वस्त्रांलकार से आदर पाती है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अग्निर्जिह्वा जुहाइ रेजमानो महसपुत्रो अरुषस्य प्रयक्षै। महान्गभों महा जातमैभिं मही प्रवृत्वभ्रस्य यजः.. (३)

Agni, the radiant son of Arusha, with his tongue of flame, is the divine offering, the great womb, the source of all, and the magnificent power of sacrifice.

हे तेजस्वी इन्द्र! ज्वालाओं के द्वारा कांपती हुई अग्नि ने तुम्हारे यज्ञ के लिए बहुत से किरणरूपी पुत्र उत्पन्न किए हैं. इन रश्मियों का गर्भ एवं उत्पन्न संतान महान् है. हे हरि नामक घोड़ों वाले इन्द्र! तुमसे संबंधित सोम की आहुतियों के कारण इन रश्मियों की प्रवृत्ति महान् है. (३)


Mandala 1 · Verse 4
अभि जैत्रीरसचन्त स्पृधां महि ज्योतस्तमसो निरोजानन्। तं जानन्ती: प्रत्युदायचृष्पासः पत्तिर्वामभवदेक इन्द्रः.. (४)

Knowing the divine light that conquers all darkness and competition, the wise, with their awakened senses, recognize Indra as the sole, supreme power.

विजयी मरुद्गण वृत्र के साथ युद्ध करते हुए इन्द्र के साथ मिल गए थे. वृत्र के मरने पर मरुतों ने उससे निकलने वाली सूर्य नामक महान् ज्योति को जाना. वृत्रहंता इन्द्र को सूर्य जानती हुई उपाएं उसके समीप गईं. इस प्रकार इन्द्र अकेले ही सारी किरणों के पति हुए. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अगच्छ्द विप्रतमः सखीयनसूदयत्सुक्ते गर्भमद्रिः। ससान मयों युधाभिमखस्यन्थाभवद्गिइरा सद्यो अर्चन्.. (५)

The foremost among Brahmins, having approached, was pleased by the offering of a son, and the mountain, having received the seed, gave birth to a child, who was immediately praised with hymns.

अतिशय मेधावी इंद्र अंगिरागोत्रीय ऋषियों के साथ मित्रता की इच्छा से गए थे. उत्तम योद्धा इंद्र के लिए पर्वत ने अपने भीतर बंद गायों को बाहर निकाल दिया. नित्यतरुण मरुतों के साथ असुरमारक एवं अंगिराओं की गायों की कामना करने वाले इंद्र ने उन्हें प्राप्त किया. अंगिरा ऋषि ने तुरंत इंद्र की पूजा की. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सत: सत: प्रतिमानं पुरोभविश्वा वेद जनां हन्ति शुष्म्। प्र णे दिव: पदवीर्गुरचन्त्सखा सरंरमुज्चन्निर्वधात्.. (६)

The divine light, the true image of existence, dispels ignorance and destroys all that is dry and lifeless. It illuminates the path of the heavens, and the friend, filled with joy, ascends to freedom from all bonds.

उत्तम वस्तुओं के प्रतिनिधि एवं युद्ध में आगे रहने वाले इंद्र समस्त उत्तम पदार्थों को जानते हैं, उन्होंने वृष्षण असुर का वध किया है. परम मेधावी एवं गायों के इच्छुक हमारे मित्र इंद्र स्वर्ग से आकर हमें पापों से बचावें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
नि गव्यता मनसा सेदुरकैः कृण्वनासो अमृतत्वय गातुम्। इदं चिन्नु सदनं भूर्येषा येन मासां असिभ्वासन्नतेन.. (७)

With a mind devoted to the divine, they attained immortality through their actions. This dwelling is indeed vast, by which they have become immortal.

अंगिरागोत्रीय ऋषि गायों की इच्छा करते हुए स्तोत्रों द्वारा अमरता पाने का उपाय करते हुए यज्ञ में बैठे थे. वे अपने यज्ञ के द्वारा महीनों को अलग करना चाहते थे. इसलिए उनके यज्ञ में बहुत से आसन थे. (७)

Mandala 1 · Verse 8
सम्पश्यमाना अमदन्भि स्वं पयः प्रत्नस्य रेतोसो दुहानाः। वि रोदसी अतपदघोष एषां जाते निःश्यामदधुर्घोषु वीरान्.. (८)

The cows, seeing their own milk, rejoiced, milking the ancient seed. Their loud lowing filled the heavens and earth, and they bore heroes in their herds.

Mandala 1 · Verse 9
अद्रोह सत्यं तव तन्महितत्वं सहो यज्जातो अपिबो ह सोमम्. न घाय इन्द्रं तवसस्त ओजो नाहं न मासाः शरदो वरन्त.. (९)

Your greatness is in not harming, in truth, and in strength, as you, born, have drunk Soma. No one, not even the seasons, can restrain your mighty power, Indra.

अद्रोह सत्यं तव तन्महितत्वं सहो यज्जातो अपिबो ह सोमम्. न घाय इन्द्रं तवसस्त ओजो नाहं न मासाः शरदो वरन्त.. (९)

Mandala 1 · Verse 10
त्वं सहो अपिबो जात इन्द्र मदाय सोमं परमे व्योमन्. यद्वै द्यावापृथिवी आविवेशीरथाभवः पूर्वः कारुधायः.. (१०)

You, Indra, drank Soma with great might in the highest heaven. You pervaded heaven and earth, becoming the first and most powerful creator.

त्वं सहो अपिबो जात इन्द्र मदाय सोमं परमे व्योमन्. यद्वै द्यावापृथिवी आविवेशीरथाभवः पूर्वः कारुधायः.. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अहन्रहिं परियानर्मण ओजायमानं तुविजातं तव्यान्. न ते महित्वमनु भूदधैर्येदन्यया स्फिगया३ क्षामवस्थाः.. (११)

The radiant sun, ever-moving and powerful, whose greatness is unmatched, shines forth with immense strength.

अहन्रहिं परियानर्मण ओजायमानं तुविजातं तव्यान्. न ते महित्वमनु भूदधैर्येदन्यया स्फिगया३ क्षामवस्थाः.. (११)

Mandala 1 · Verse 12
yāvayaddveṣā ṛtapā ṛtejāḥ sumnāvarī sūnṛtā īrayantī | sumaṅgalīr bibhratī devavītim ihādyoṣaḥ śreṣṭhatamā vy uccha

O Indra, our sacrifice increases you; our offering of pressed Soma is dear to you. O Indra, worthy of sacrifice, protect the sacrificer through this rite, and may your thunderbolt protect you as you slay Vritra.

हे इन्द्र! हमारा यज्ञ तुम्हारी वृद्धि करता है. सोम निचोड़े जाने के कारण हमारा यज्ञ तुम्हें प्रिय है. हे यज्ञ योग्य इन्द्र! यज्ञ के द्वारा यजमान की रक्षा करो. यह वृत्र को मारते समय तुम्हारे वज्र की रक्षा करे. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
यज्ञेन्द्रमवसा चक्रे अवीगैनं सुम्नाय नव्यसे वृत्याम्. यः स्तोमेभिवृद्धे पूव्येभियों मध्यमेभिरूत नूतनेभिः... (१३)

He, the Lord of Sacrifice, has protected the devotee with His strength, bestowing abundant grace through ancient, middle, and new praises.

जो इन्द्र प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक स्तोत्रों द्वारा वृद्धि प्राप्त करते हैं, उन्हीं को यजमान रक्षा करने वाले यज्ञ के द्वारा अपनी ओर आकृष्ट करता है एवं नवीन धन प्राप्त करने के लिए यज्ञ से ढकता है. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
विशेष यन्ना धिषणा जज्ञान स्तवै पुरा पायादिन्द्रमहः. अंहसो यत्र पीपरग्धा नो नावेव यान्तमभये हवन्ते.. (१४)

May Indra, the great, protect us, from whom wisdom arises, as we call to him in fearlessness, like those crossing a river in a boat.

इंद्र की स्तुति करने का विचार जब मेरी बुद्धि में आता है, तब मैं स्तुति करता हूं. मैं अशुभ दिन आने के पहले ही इंद्र की स्तुति करता हूं. जिस प्रकार दोनों तटों वाले लोग नाव वाले को पुकारते हैं, उसी प्रकार हमारे दोनों मातृ एवं पितृ कुलों के लोग दुःख से पार लगाने के विचार से तुम्हें पुकारते हैं. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
आपूर्णा अस्य कलशः स्वाहा सेतेव कोशं सिसिचे पिबध्यै. समु प्रिया आववृन्मदाय प्रदक्षिणिद्धि सोमास इन्द्रम्.. (१५)

May this full vessel, sprinkled for enjoyment, bring us joy and prosperity, as Soma, circling clockwise, nourishes Indra.

हे इंद्र! तुम्हारा कलश सोम से भर गया है. तुम्हारे सोम रस पीने के लिए 'स्वाहा' शब्द का उच्चारण भी हो चुका है. जैसे पानी भरने वाला पानी भरे हुए पात्र से दूसरे पात्र में जल डालता है, उसी प्रकार मैं तुम्हारे पीने के लिए कलश में सोम भरता हूं. स्वादिष्ट सोम प्रदक्षिणा करता हुआ इंद्र की प्रसन्नता के लिए उनके सामने जाता है. (१५)

Mandala 1 · Verse 16
न त्वा गभीरः पुरुहूत सिन्धुद्रायः परि ष्पन्तो वरन्त. इत्था सखिभ्य इष्पितो यदिन्द्र दृळहं चिदुरुजो गव्यमूर्मम्.. (१६)

O Indra, you are not restrained by the vast, flowing rivers, nor by the swift currents. You are indeed the friend of those who seek you, capable of overcoming even the strongest obstacles.

हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! न गहरा सागर तुम्हें रोक सकता है और न उसके चारों ओर वर्तमान पर्वतसमूह! देवों की प्रार्थना पर तुमने दृढ़ वाडवाग्नि का भी निवारण कर दिया था. (१६)

Mandala 1 · Verse 17
syūmanā vāca ud iyarti vahniḥ stavāno rebha uṣaso vibhātīḥ | adyā tad uccha gṛṇate maghony asme āyur ni didīhi prajāvat

Mandala 1 · Verse 18
yā gomatīr uṣasaḥ sarvavīrā vyucchanti dāśuṣe martyāya | vāyor iva sūnṛtānām udarke tā aśvadā aśnavat somasutvā

Mandala 1 · Verse 19
mātā devānām aditer anīkaṁ yajñasya ketur bṛhatī vi bhāhi | praśastikṛd brahmaṇe no vy u1cchā no jane janaya viśvavāre

Mandala 1 · Verse 20
yac citram apna uṣaso vahantījānāya śaśamānāya bhadram | tan no mitro varuṇo māmahantām aditiḥ sindhuḥ pṛthivī uta dyauḥ

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्रः पूर्वभिदातिरदासकैर्विद्धसुर्द्यमानो वि शत्रून् । ब्रह्मजूतस्तन्वा वावृधानो भूरिदात्र आपृणोद्रोदसी उभे.. (१)

Indra, the slayer of Vritra, having pierced the enemies with his thunderbolt, and growing in strength by Brahma's will, filled both heaven and earth with his bounty.

पुरभेदकारी, महिमा प्रकट करने वाले, धनों से युक्त एवं असुरों की विशेष रूप से हिंसा करने वाले इंद्र ने दिवस को अपने तेजों द्वारा बढ़ाया. स्तुति सुनकर आकर्षित होने वाले, अपने शरीर के द्वारा बढ़ते हुए एवं विविध आयुधों को धारण करने वाले इंद्र ने धरती और आकाश को सब ओर से तृप्त किया है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
मखस्य ते तविषस्य प्र जूतिर्मयि वाचममृताय भूषणम् । इन्द्र क्षितीनामनुसेि मानुषीणां विशां दैवीनामुत पूर्णयावा.. (२)

May your invigorating power, O Indra, bestow upon me the nectar of speech, adorning me with divine glory among all human and divine communities.

हे इंद्र! तुझ स्तुति योग्य एवं शक्तिशाली को अलंकृत करता हुआ मैं अन्न प्राप्ति के लिए मन से स्तुति करता हूँ. हे इंद्र! तुम मानवों एवं दैवी प्रजाओं के आगे चलने वाले हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इन्द्रो वृत्रवृतोच्छईर्धनीतिः प्र मायिनमभिनादृपणीतिः। अहन्त्यस्यसुशवगवेष्वाविवर्धना अकृणोद्राम्याणम्.. (३)

Indra, the slayer of Vritra, with his mighty power, vanquished the sorcerer, bringing forth prosperity and joy.

प्रसिद्धकर्म वाले इंद्र ने वृत्र असुर को रोका था. युद्ध में शत्रुओं के प्रहार रोकने वाले इंद्र ने मायावियों को विशेष रूप से मारा था. शत्रुवध की अभिलाषा करने वाले इंद्र ने वन में छिपे हुए एवं बिना थड़ वाले शत्रु का वध किया तथा रात्रियों में छिपी हुई गायों को प्रकट किया.

Mandala 1 · Verse 4
इन्द्रः स्वर्भां जनयन्नब्रहाणि जिगयोशिशिभिः पूतना अभिशिः। प्रारोचयनमवे केतुमहामविन्दज्ज्यోతిर्बृंहते रणाय.. (४)

Indra, creating brilliance, conquered the unholy with his sharp weapons. He revealed the light, a great radiance for battle.

इंद्र ने स्वर्ग देने वाले, अपने तेजों से दिनों को उत्पन्न करते हुए एवं शत्रुओं के साथ युद्ध की कामना करने वाले अंगिराओं का साथ देकर शत्रु सेना को जीत लिया एवं दिन के झोंडे के समान सूर्य को मनुष्यों के लिए उद्दीप्त किया. इसके बाद इंद्र ने महान् युद्ध के लिए प्रकाश पाया. (४)


Mandala 1 · Verse 5
इन्द्रस्तुजो बर्हणा आ निवेशं नृवद्धानो नर्या पूरुषि. अचेतयद्विइय इमा जरित्रे प्रेमं वर्णमतिरच्छक्रमासम्.. (५)

The mighty Indra, the bestower of strength, has entered the dwelling, adorned with glory, and has accepted the praise of the worshipper, his mind full of affection and his form radiant.

इंद्र ने युद्ध करने वालों के पर्याप्त धनों को छीनते हुए बाधा पहुंचाने वाली तथा युद्ध की अभिलाषा से आगे बढ़ती हुई शत्रु सेनाओं में प्रवेश किया. इंद्र ने स्तुतिकर्ता के लिए उषओं का ज्ञान कराया तथा उनके चमकीले रंग को बढ़ाया. (५)

Mandala 1 · Verse 6
मह्ो महानि पनयन्त्येस्सेन्द्रस्य कर्म सुकृता पुरुषि. वृजनेन वृजिनान्त्स पिपेध मायाभिर्देस्चूभिरभ्यूजोयाः.. (६)

The great Indra, by his mighty deeds, protects the righteous from the wicked, and with his divine powers, he vanquishes the enemies.

लोग महान् इंद्र के महान् एवं बहुत से उत्तम कर्मों की स्तुति करते हैं. शत्रु परभभवकारी एवं ओज वाले इंद्र ने शक्तिशाली लोगों को शक्ति द्वारा एवं दस्युओं को मायाओं द्वारा पीस डाला था. (६)

Mandala 1 · Verse 7
युधेन्द्रो मह्ा वरिवश्रकार देवेभ्यः सत्वतिश्र्णणप्राः. विवस्वतः सदने अस्य तानि विप्र उक्थेभिः कवयो गृणन्ति.. (७)

In battle, Indra, the great protector, has served the gods with his strength. In the sun's abode, sages praise his deeds with hymns.

देवों के स्वामी एवं मानवों के कामपूरक इंद्र ने महान् युद्ध के द्वारा धन प्राप्त करके स्तोताओं को दिया. मेघावी स्तोतागण यजमान के घर में मंत्रों द्वारा उन कर्मों की प्रशंसा करते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
सत्रासाहं वरेण्यं सहोदां ससवॉसं स्वरपश्व देवीः. ससान यः पृथिवीं घाममुतेमामिन्द्रं मदन्त्यनु धीरणासः.. (८)

The mighty Indra, who is worthy of praise and grants strength, has established the earth and sky. The wise ones, filled with joy, celebrate him.

बुद्धिमान् स्तोता वृत्रादि को हटाने वाले, वरूण करने योग्य, दुर्बल याचक को बलप्रद, दिव्यजल एवं स्वर्ग के दानी इंद्र के साथ-साथ आनंद अनुभव करते हैं. इंद्र ने इस धरती एवं आकाश का दान किया था. (८)

Mandala 1 · Verse 9
सNASAनात्याँ उत् सूर्य सNASAनेन्द्रः सNASA पुरुषभोजसं गाम्, हिरण्ययमुत भोगं सNASA हत्वी दस्युप्रायं वर्णमावत्. (९)

The radiant Sun, the lord of Indra, and the mighty Purusha, having destroyed the dark-skinned Dasyus, brought forth golden wealth and enjoyment.

इंद्र ने घोड़ों, सूर्य एवं बहुत से लोगों के उपभोग में आने वाली गायों का दान दिया था. इंद्र ने स्वर्ण-रूपी धन का दान किया एवं दस्युओं को मारकर आर्यवर्णों का पालन किया. (९)

Mandala 1 · Verse 10
इन्द्र ओषधीरसनोदहानि वनस्पतिरसनोदन्तरिक्षम्, बिभेद वल नुनुदे विवाचोऽथभवेदमिताभिक्रतूनाम्. (१०)

Indra, the lord of strength, consumed the plants, and Vayu, the lord of the atmosphere, consumed the intermediate space. Vala, the cloud, was split and driven away, and then the offerings of those with limited sacrifices became abundant.

इंद्र ने औषधियों, दिवसों, वनस्पतियों तथा अंतरिक्ष का दान किया था. इंद्र ने मेघ को भिन्न किया, विरोधियों को मारा एवं युद्ध के लिए सामने आए लोगों का दमन किया था. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
शुं हवैम मधवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातो, शुण्वन्तममुग्रतये समत्सु छन्न्ं वृत्राणि सञ्जितं धनानाम्.. (११)

We invoke the wealthy and mighty Indra, the foremost in this battle, the giver of riches, who hears prayers, who is fierce in combat, who has conquered Vritra and amassed wealth.

धन प्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्, सकल विश्व के नेता, स्तुतियाँ सुनने वाले, शत्रुओं को भयंकर, युद्ध में राक्षस विनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इंद्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 1
तिष्ठा हरी रथ आ युज्यमाना याहि वायुर्न नियुतो नो अच्छ, पिबास्यन्धो अभिसृष्टो अस्मे इन्द्र स्वाहा ररिमा ते मदाय.. (१)

O Indra, may you arrive swiftly like a chariot drawn by horses, as the wind, to us, and drink this offering for your delight.

हे इंद्र! जिस प्रकार वायु अपने नियुत नाम के घोड़ों की प्रतीक्षा करते हैं, उसी प्रकार तुम भी हरि नामक घोड़ों को रथ में जोड़कर कुछ क्षण प्रतीक्षा करने के बाद हमारे पास आओ एवं हमारे द्वारा दिया हुआ सोम पान करो. हम स्वाहा शब्द का उच्चारण करके तुम्हारे आनंद के लिए सोम देते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
उपाजिरा पुरुहूताय सप्तो हरी रथस्य धूष्या युनज्मि, द्रवदधा सम्भृतं विश्वतऋदुपेमं यजमा वहात् इन्द्रम्.. (२)

I harness the seven swift steeds to the chariot of the much-invoked Indra, the powerful one. May they carry us, with their unified strength, to the worshipper who invokes him.

हम अनेक यजमानों द्वारा बुलाए गए इंद्र के रथ के अगले हिस्से में तेज दौड़ने वाले एवं वेगवान् घोड़े जोड़ते हैं. वे घोड़े इंद्र को सभी प्रकार से पूर्ण इस यज में ले आवें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उपो नयस्व वृषणा तपुष्पोतेमव त्वं वृषभ स्वधावः। ग्रसेतामभ्नां वि मुचेह शोणा दिवेदिदे सदृशीरिह धानाः।। (३)

O powerful and life-giving one, lead us forward, bestowing strength and sustenance. May we be freed from all bonds and attain radiant, ever-renewing nourishment.

हे वृष्णिवर! हे वृषभ! तुम अपने बल से हमें अपने पास ले चलो। हे शोण! तुम शीघ्रता से, प्रतिदिन, अपने बल से, हमारे पास आकर, इस यज्ञ को पूर्ण करो।

Mandala 1 · Verse 4
ब्रह्मण ते ब्रह्मणयुजा युनज्मि हरी सखायं सधमादं आसुः। स्थिरं रथं सुखमिन्द्राधिष्ठितं-प्रज्ञानविद्गं उप याहि सोमम्.. (४)

O Indra, come with your companions to this joyous feast, where we offer you Soma, the stable chariot of divine knowledge.

हे इंद्र! मंत्र द्वारा रथ में जोड़ने योग्य, युद्ध में समान रूप से प्रसिद्ध तुम्हारे दोनों घोड़ों को हम मंत्रोच्चारणपूर्वक रथ में जोड़ते हैं. तुम ज्ञानपूर्वक मजबूत एवं सुखदायक रथ पर चढ़कर सोम के समीप आओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
मा ते हरी वृषणा वीतपृष्ठा नि रीरमन्-यजमानासो अन्ये. अत्यायाहि श्रुतो वयं तेऽरं सुतेभिः कृणवाम सोमैः... (५)

May your swift, strong steeds, O Indra, not be weary, nor other worshippers detain you. Come to us swiftly, for we have prepared Soma for you.

हे इंद्र! अभिलाषाएं पूर्ण करने वाले एवं सुंदर पीठ वाले तुम्हारे हरि नामक घोड़ों को अन्य यजमान प्रसन्न न करें. हम निचोड़े हुए सोम द्वारा तुम्हें पूरी तरह तृप्त करेंगे. तुम बहुत से यजमानों को छोड़कर आओ. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तवाय सोमस्त्वमेहाऽऽर्वा शृणुतं सुमना अस्य पाहि. अस्मिन्त्ये बहिष्धा निष्षधा दधिष्षेमं जठर इन्द्रमिन्द्र.. (६)

O Soma, you are here, listen attentively and drink this. May we establish you within, in our bellies, O Indra, the mighty Indra.

यह सोम तुम्हारा है. तुम इसके सामने आओ एवं प्रसन्न मन से इस बहुत से सोम को पियो. हे इंद्र! इस यज्ञ में बिछे हुए कुशों पर बैठकर इस सोम को पेट में डालो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
हे मरुत्गणों के स्वामी इन्द्र! तुम जिन सोमों को पीकर वर्धन को प्राप्त होते हो, उन सोमों को तुम अपनी जिह्वा से पीते हो। (१)

O Indra, drink the Soma with the Maruts, your companions who have praised and strengthened you, and with Agni, all united in joy.

याँ आभजो मरुत इन्द्र सोमे ये त्वामवईर्धनभवन्गणस्ते। तेभिरंतं सजोषा वावशानीरुग्नेः पिब जिह्वा सोममिन्द्र.. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इन्द्राय सोमाः प्रदिवो विदाना ऋभुर्येभिवर्धपर्वा विहायः। प्रय्यमानान्प्रति ष् ृग्भायेन्द्र पिब वृष्धूतस्य वृष्ः.. (२)

O Indra, drink the Soma, which is known to the Rishis, and which the Ribhus have made strong, for you, the bull of bulls, have drunk the Soma.

प्राचीनकाल में इन्द्र के लिए सोमरस दिया गया था. उसके कारण वह समान रूप, तेजस्वी एवं महान् हुए थे. वे इन्द्र! इस दिए हुए सोम को ग्रहण करो एवं पत्थरों द्वारा निचोड़े गए तथा स्वर्गादि फल देने वाले सोम को पियो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
पिबा वर्षस्व तव घा सुतास इन्द्र सोमासः प्रथमा उतेमे. यथापिबः पूष्याँ इन्द्र सोमाँ एवा पाहि पन्चो अद्या नवीयान्.. (३)

Drink, O Indra, and rejoice in these Soma juices, your first and best. As you have drunk Soma before, so drink this new offering today.

हे इन्द्र! तुम वर्षा करो, तुम्हारे द्वारा निचोड़े गए सोमों को तुम प्रथम एवं अन्य सोमों को भी पियो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
महाँ अमत्रो वजत्रे विरप्स्युश्रृं शवः पतत्ये धृष्णुवोजः। नाह विव्याच पृथिवी चैनं यत्सोमासो हर्षयन्मन्.- (४)

The mighty, unassailable, and powerful one descends with great force. The earth cannot contain him, for the Soma juices exhilarate his mind.

महान् युद्ध में शत्रुओं को ललकारने वाले एवं शत्रु पराभकारी इंद्र का उग्र बल तथा पराक्रमपूर्ण ओज सब जगह फैलता है, जब हरि नामक अश्वों वाले इंद्र को सोमरस प्रसन्न करता है, उस समय धरती और आकाश कोई भी इंद्र को व्याप्त नहीं कर पाते। (४)

Mandala 1 · Verse 5
महाँ उग्रो वावृधे वीर्याय समाचके वृषभः काव्येन। इन्द्रो भगो वाजदा अस्य गावः प्र जायन्ते दक्षिणा अस्य पूर्वीः.. (५)

The mighty and fierce one grows in strength, the bull roars with divine power. Indra, the bestower of fortune and sustenance, his cows are born, his gifts are abundant.

बलवान् शत्रुओं को भयंकर, कामवर्षक एवं सेनीय इंद्र वीरता दिखाने के लिए बढ़ते हैं एवं स्तोत्र के साथ मिल जाते हैं. इंद्र की गाएं दुधारू हैं तथा संख्या में बहुत हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
प्र यन्ति-न्धवः प्रसवं यथायानापः समुद्रं रथ्येव जग्मुः। अतश्चिन्द्रिन्दः सदसो वरीयान्-दी सोमः पूणति दुग्धो अंशुः.. (६)

As waters flow to the sea, so do the rays of light proceed to their source. Thus, the Soma, the nourishing essence, fills the abode, like a full vessel.

जिस समय कामनापूर्ण नदियां अति दूरवर्ती समुद्र की ओर दौड़ती हैं, उसी समय जल रथ में बैठे लोगों के समान चलता है. इसी प्रकार अत्यंत श्रेष्ठ इंद्र लताओं से निचोड़े गए लघु रूप सोम की ओर अंतरिक्ष से दौड़ आते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
समुद्रेण सिन्धवो यादमाना इन्द्राय सोमं सुपुतं भरन्तः। अंशुं दुहन्ति हस्तिनो भरिमैधः पुनन्ति धारया पवित्रैः.. (७)

The rivers, like cows, flow into the ocean, bringing forth the Soma, which is pressed and purified by the divine.

जिस प्रकार समुद्र से मिलने की इच्छा रखने वाली नदियां समुद्र को भरती हैं, उसी प्रकार अध्वर्युगण तुझ इंद्र के निमित्त निचोड़े गए सोम को तैयार करते हुए लताओं को निचोड़ते हैं तथा सोम की धारा से पवित्र भुजाओं द्वारा सोमरस को बनाते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
हृदाव कृक्ष्यः सोमधानाः समीं विव्याच सवना पूरुषि। अन्ना यन्दिन्द्रः प्रथमा व्याश वृत्रं जघन्यौ अवृणीत सोम्म्.. (८)

Indra, the foremost, consumed the Soma, the source of strength, and by his might, slew Vritra, thus choosing Soma.

जैसे तालाब में जल भरता है, उसी प्रकार इंद्र के पेट में सोम समा जाता है. इंद्र एक साथ बहुत से यज्ञों में उपस्थित रहते हैं. इंद्र ने पहले तो सोम का भक्षण किया, उसके बाद माध्याह्निन सवन में देवों के लिए उनका भाग बांट दिया. (८)

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Mandala 1 · Verse 9
आ त्वं माकिरेतरत्परि छाद्दिष्टा हि त्वा वसुपतिं वसूनाम्। इन्द्र यते माहिं दत्रमस्यस्यभ्यं तद्वृष्यं प्र यन्धि.. (९)

O Indra, you are the lord of wealth; do not turn away from us. Grant us your powerful protection and bestow upon us your abundant gifts.

Mandala 1 · Verse 10
अस्मे प्र यन्ति मघवन्न्ऋषिभिन्द्र रायो विश्ववारस्य भूरेः। अस्मे शतं शरदॊ जीवसे था अस्मे वीराङ्छछुतं इन्द्र शिप्रिन.. (१०)

O Indra, giver of riches, bestow upon us abundant wealth, long life for a hundred autumns, and a hundred heroic sons.

हे मघवा एवं ऋषीषी इन्द्र! हमें वरणीय योग्य बहुत सा धन दो एवं जीने के लिए सौ वर्ष का समय प्रदान करो. हे सुंदर ठींड़ी वाले इन्द्र! हमें बहुत से वीर पुत्र दो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
शुंनं हवॆम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातो. शुंणवन्तममुमये समस्तु छनन्तं वृत्राणि सञ्जिजंनं धनानाम्.. (११)

We offer praise to Indra, the mighty lord, the foremost in this battle, the giver of wealth. May he, the bestower of strength, the destroyer of obstacles, and the conqueror of riches, be pleased with us.

धनप्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्, सकल विश्व के नेता, स्तुतियाँ सुनने वाले शत्रुओं के लिए भयंकर, युद्ध में रक्षकविनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इन्द्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
दिवश्चिदा पूज्या जायमाना वि जागृविर्विद्धे शस्यमाना। भद्रा वस्त्राण्यर्जुनं वासाना सेयमस्मे सञजा पितृया धीः.. (१२)

The divine, ever-waking, and praised mother, adorned in bright, white garments, has now become our intellect, our guiding thought.

हे इंद्र! सूर्योदय से भी पहले यज्ञ में की गई स्तुति तुम्हारा जागरण करती हुई कल्याणकारिणी, शुक्लवस्त्रधारिणी, सनातन एवं हमारे पितरों के पास से आई है. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
रारन्धि सवनेषु ण एषु स्तोमेषु वृत्रहन्. उक्थेष्विन्द्रं गिर्र्णः.. (१३)

O slayer of Vritra, Indra, be praised in the sacrifices, hymns, and praises.

हे स्तुतियों द्वारा प्रशंसनीय एवं वृत्रहंता इंद्र! हमारे द्वारा बोले गए तीनों स्तोत्रों एवं उक्थों में रमण करो. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
मतयः सोमपांमुर्ं रिहन्ति शवसस्पतिमृ. इन्द्रं वत्सं न मातरः.. (१४)

Thoughts, like mothers embracing their calf, embrace the Soma-drinking, strength-giving Indra.

हे महान् सोमपानकर्ता एवं शक्ति के स्वामी इंद्र! जिस प्रकार गाएं बछड़ों को चाटती हैं, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां तुम्हें चाटती हैं. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
caritraṁ hi ver ivācchedi parṇam ājā khelasya paritakmyāyām | sadyo jaṅghām āyasīṁ viśpalāyai dhane hite sartave praty adhattam

Mandala 1 · Verse 16
śatam meṣān vṛkye cakṣadānam ṛjrāśvaṁ tam pitāndhaṁ cakāra | tasmā akṣī nāsatyā vicakṣa ādhattaṁ dasrā bhiṣajāv anarvan

Mandala 1 · Verse 17
ā vāṁ rathaṁ duhitā sūryasya kārṣmevātiṣṭhad arvatā jayantī | viśve devā anv amanyanta hṛdbhiḥ sam u śriyā nāsatyā sacethe

Mandala 1 · Verse 18
yad ayātaṁ divodāsāya vartir bharadvājāyāśvinā hayantā | revad uvāha sacano ratho vāṁ vṛṣabhaś ca śiṁśumāraś ca yuktā

Mandala 1 · Verse 19
rayiṁ sukṣatraṁ svapatyam āyuḥ suvīryaṁ nāsatyā vahantā | ā jahnāvīṁ samanasopa vājais trir ahno bhāgaṁ dadhatīm ayātam

Mandala 1 · Verse 20
pariviṣṭaṁ jāhuṣaṁ viśvataḥ sīṁ sugebhir naktam ūhathū rajobhiḥ | vibhindunā nāsatyā rathena vi parvatām̐ ajarayū ayātam

Mandala 1 · Verse 21
ekasyā vastor āvataṁ raṇāya vaśam aśvinā sanaye sahasrā | nir ahataṁ ducchunā indravantā pṛthuśravaso vṛṣaṇāv arātīḥ

Mandala 1 · Verse 22
śarasya cid ārcatkasyāvatād ā nīcād uccā cakrathuḥ pātave vāḥ | śayave cin nāsatyā śacībhir jasuraye staryam pipyathur gām

Mandala 1 · Verse 23
avasyate stuvate kṛṣṇiyāya ṛjūyate nāsatyā śacībhiḥ | paśuṁ na naṣṭam iva darśanāya viṣṇāpvaṁ dadathur viśvakāya

Mandala 1 · Verse 24
daśa rātrīr aśivenā nava dyūn avanaddhaṁ śnathitam apsv a1ntaḥ | viprutaṁ rebham udani pravṛktam un ninyathuḥ somam iva sruveṇa

Mandala 1 · Verse 25
pra vāṁ daṁsāṁsy aśvināv avocam asya patiḥ syāṁ sugavaḥ suvīraḥ | uta paśyann aśnuvan dīrgham āyur astam ivej jarimāṇaṁ jagamyām

Mandala 1 · Verse 1
अयं ते अस्तु हर्यतः: सोम आ हरिभिः सुतःः जुषान इन्द्र हरिभिर् आ गृह्ण तिष्ठ हरितं रथम्.. (१)

May this Soma, pressed by the rays, be pleasing to you, O Indra, who rides a green chariot drawn by green horses.

हे इंद्र! पत्थरों द्वारा निचोड़ा गया, सुंदर एवं प्रसन्नता का विषय यह सोम तुम्हारे लिए हो. तुम अपने हरे रंग के रथ पर बैठो एवं हरि नामक घोड़ों की सहायता से हमारे सामने आओ. (१)


Mandala 1 · Verse 2
हर्यऋषमचर्यः सूर्य हर्यत्रोचयः. विद्रांशिंक्रित्वाऽन्यहं वर्षस इन्द्र विश्वा अभि श्रियः.. (२)

O Indra, the resplendent Sun, the source of all prosperity, I invoke you, for you bestow all glories and riches upon us.

हे इंद्र! तुम सोम के अभिलाषी बनकर उषा की पूजा करते एवं सूर्य को प्रकाशित करते हो. हे हरि नामक घोड़ों वाले, विद्वान् एवं हमारी अभिलाषा को जानने वाले इंद्र! तुम हमारी सभी संपत्तियों को बढ़ाते हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
घामिन्द्रो हरिधायसं पृथिवीं हरिर्वप्सम्. अधारयदृरितोभूरि भ Возн ययोरन्तहर्हिश् रतु.. (३)

The divine Indra, the sustainer, upheld the earth, the abode of all beings, with his immense strength.

इंद्र ने हरे रंग की किरणों वाले स्वर्गलोक तथा औषधियों के कारण हरे रंग की धरती को धारण किया था. द्यावापृथ्वी इंद्र के हरि नामक घोड़ों को पर्याप्त भोजन देते हैं एवं इंद्र इन्हीं के मध्य विचरण करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
जज्ञानो हरितो वृषा विश्वमा भाति रोचनम्. हर्यश्वो हरितं धन्त् आयुधमा वज्रं बाहृहर्हिर्म्.. (४)

The radiant, all-pervading light of Vishnu, the mighty sustainer, shines forth. His golden chariot, armed with the thunderbolt, brings forth strength and protection.

हरे वर्ण वाले एवं कामवर्शी इंद्र जन्म लेते ही सारे संसार को प्रकाशित कर देते हैं. हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र हाथों में हरे रंग का आयुध एवं शत्रुओं के प्राण हरण करने वाला वज्र रखते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
इन्द्रो हर्यन्तमर्जुनं वज्रं शुक्रैर्भीवृतम्. अपाववृणोऽच्छिरिभ्रिभिः सुतमुद्गा हरिभिराऽज.. (५)

Indra, the mighty, adorned with the brilliant Vajra, drove forth the swift horses, bringing forth the radiant sun.

इंद्र ने कामनीय, श्वेत वर्ण, दूध मिले हुए, वेगवान् एवं पत्थरों द्वारा निचोड़े गए सोम को आवरणरहित किया है एवं घोड़ों के साथ मिलकर पणियों द्वारा चुराई गई गाएं गुफा से बाहर निकाली हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तृतीये धानाः सवने पुरुषत पुरोळाशमाहृतं मामहस्व नः । ऋभुमन्तं वाजवन्तं त्वा कवे प्रयस्वन्त उप शिक्षेम धीतिभिः ॥ (६)

O wise one, we offer you the cake of grain in the third libation, may it bring us prosperity. May we, with our thoughts, learn from you, who are rich in strength and sustenance.

हे बहुतों द्वारा स्तुति किए गए इंद्र! तृतीय सवन अर्थात् संध्याकालीन यज्ञ में हमारे भुने हुए जौ एवं हवन किए गए पुरोडाश को भक्षण द्वारा महान् बनाओ. हे ऋभुओं से युक्त, धनयुक्त पुत्रों वाले तथा कवि इंद्र! हम हव्य हाथ में लेकर स्तुतियों द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
पृषणवते चकृमा करम्भिं हरितं हर्यश्राय धानाः । अपूष्पमद्धिं सगणो मरुद्धिः सोमं पिब वृत्रहा शूर विद्न् ॥ (७)

O valiant slayer of Vritra, drink Soma with the Maruts, for the swift, the green, the strong-horsed, and the nourishing, we have prepared offerings and grain.

हे सूर्य सहित इंद्र! हम तुम्हारे लिए दही मिला सत्तू तैयार करते हैं. हे हरि नामक एवं हरे रंग के घोड़ों वाले इंद्र! तुम्हारे लिए हम जौ भुनते हैं. तुम मरुतों के साथ आकर पुरोडाश खाओ. हे वृत्रनाशक, शूर एवं विद्वान् इंद्र! तुम सोम पियो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
प्रति धाना भरतTuyमस्मै पुरोळाशं वीरतमाय नृणाम् । दिवेदिचे सदृशीरिन्द्र तुभ्यं वर्धन्तु त्वा सोमपेयाय धृष्णो.. ॥ (८)

O Indra, most heroic of men, may these offerings, prepared for you, grow ever stronger for your enjoyment of Soma. May they be worthy of you, day after day.

हे अध्वर्युगण! मनुष्यों में वीरतम् इंद्र के लिए शीघ्र भुने जो तथा पुरोडाश दो. हे शत्रुपराभवकारी इंद्र! तुम्ही को लक्ष्य करके प्रतिदिन की गई एक सौ स्तुतियाँ तुम्हें सोमपान के लिए उत्साहपूर्ण करें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
महाँ ऋषिरैदं देवजूतोऽस्तभ्नासिधुमर्णवं नृचक्षाः। विश्वामित्रो यदहत्सुदासप्रियायतं कुशिकेभिरिन्द्रः.. (९)

The great sage, divinely inspired, stabilized the vast ocean, as Indra, the protector of men, aided Sudasa with the Kushikas.

महान्, इंद्रियों से परवर्ती अर्थ देखने वाले, उज्ज्वल तेज उत्पन्न करने वाले, तेजो द्वारा आकृष्ट व मनुष्यों के उपदेशक विश्वामित्र ने जलपूर्ण सरिता को रोक दिया था. जब विश्वामित्र ने सुदास का यज्ञ कराया, तब इंद्र ने कुशिकगोत्रीय ऋषियों के साथ प्रेम का आचरण किया. (९)

Mandala 1 · Verse 10
हंसाइव कृणुथ श्लोकमद्रिभिर्मदन्तो गभिंरश्वरे सुते साचा। देवैर्भिर्विप्रा ऋषषयो नृचक्षसो वि पिबध्वं कुषिकाः सोभ्यं मधु.. (१०)

Drink the Soma, O priests, like swans, with joyous hearts, celebrating the divine, as the Rishis and sages of old did.

हे विप्रो, ऋषियों व नेताओं को उपदेश देने वालो एवं कुशिक गोत्र में उत्पन्न पुत्रो! यज्ञ में पत्थरों द्वारा सोम निचोड़े जाने पर तुम स्तुतियों द्वारा देवों को प्रसन्न करते हुए हंसों के समान मंत्रों का उच्चारण करो तथा देवों के साथ सोम पियो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
उप प्रेत कुशिकश्रेष्टयध्वमं राये प्र मुञ्चता सुदासः। राजा वृत्रं जडधनप्रागपागुदगथा यजाते वर आ पृथिव्याः.. (११)

O best of Kushikas, approach the divine offering for wealth, and release it for Sudasa. The king, having driven away Vritra and his wealth, now worships in the best place on Earth.

हे कुशिकगोत्रीय पुत्रो! अश्व के पास जाओ एवं सावधान रहो. राजा सुदास का अश्व दिग्विजय द्वारा धन पाने के लिए छोड़ दो. राजा इंद्र ने वृत्र को पूर्व, पश्चिम एवं उत्तर दिशाओं में मारा था, राजा सुदास पृथ्वी के उत्तम भाग में यज्ञ करें. (११)

Mandala 1 · Verse 12
य इमे रोदसी उभे अहमिन्द्रमतुष्ट्वम्। विश्वामित्रस्य रक्षति ब्रह्मोदं भारतं जनम्.. (१२)

Indra, the protector of these two worlds, guards this Bharata people with the power of Vishwamitra's mantra.

हे पुत्रो! मैं विश्वामित्र धरती और आकाश द्वारा इन्द्र की स्तुति करता हूं. यह स्तोत्र भरतवंशीय लोगों की रक्षा करे. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
yuvaṁ cyavānam aśvinā jarantam punar yuvānaṁ cakrathuḥ śacībhiḥ | yuvo rathaṁ duhitā sūryasya saha śriyā nāsatyāvṛṇīta

We, the sons of Vishwamitra, praise Indra, the wielder of the thunderbolt, praying for abundant prosperity.

विश्वामित्रा अरासत् ब्रह्मोन्द्राय वज्रिणे. करदिन्नः सुराधसः.. (१३) हम विश्वामित्र के पुत्रों ने वज्रधारी इन्द्र का स्तोत्र किया. इंद्र हमें शोभन धन वाला करें.

Mandala 1 · Verse 14
yuvaṁ tugrāya pūrvyebhir evaiḥ punarmanyāv abhavataṁ yuvānā | yuvam bhujyum arṇaso niḥ samudrād vibhir ūhathur ṛjrebhir aśvaiḥ

O Indra, cows in the lands of the godless yield no milk for you, nor do they warm the altar. Bring them to us, along with the wealth of Pramaganda, and bestow upon us the riches of the lowly.

किं ते कृण्वन्ति कीकटेषु गावो नाशिंर दुहे न तपन्ति धर्मम्. आ नो भर प्रमगन्दस्य वेदो नैचाशाखं मधवन्नन्द्या नः.. (१४) हे इंद्र! अनार्य लोगों के जनपदों में गाएं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं करेंगी. न वे सोम रस में मिलाने के लिए दूध देती हैं और न यज्ञपात्र को अपने दूध से दीप्त कर सकती हैं. हे मधवा! वे गाएं हमारे पास ले आओ और प्रमगंद का धन भी हमें दो. तुम नीच वंश वाले लोगों का धन हमें प्रदान करो. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
ajohavīd aśvinā taugryo vām proḻhaḥ samudram avyathir jaganvān | niṣ ṭam ūhathuḥ suyujā rathena manojavasā vṛṣaṇā svasti

The radiant speech, born of the fire-kindling sages, dispels ignorance and expands universally. This daughter of the sun, the divine voice, contemplates immortal sustenance for the gods.

ससर्परीरमतिं बाधमानां बृहन्निमाय जमदग्नि निंदिता. आ सूर्यस्य दुहिता ततान श्रवो देवेष्वमृतंयजुर्म्.. (१५) अग्नि प्रज्वलित करने वाले ऋषियों द्वारा हमें दी गई, अज्ञान को रोकने वाली एवं शब्द के रूप में सब जगह फैलने वाली वाणी बृहद् रूप धारण करती है. सूर्य की पुत्री वाणी-देवता इंद्र आदि देवों के समीप क्षयरहित एवं अमृत रूप अन्न का विचार करती है. (१५)

Mandala 1 · Verse 16
ajohavīd aśvinā vartikā vām āsno yat sīm amuñcataṁ vṛkasya | vi jayuṣā yayathuḥ sānv adrer jātaṁ viṣvāco ahataṁ viṣeṇa

May the Goddess of Speech, in the form of Gadapadma, richly bestow upon us wealth exceeding that of Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas, Shudras, and Nishadas. May the divine speech, gifted by sages like Jamadagni, grant us long life and new sustenance, like the sun.

ससर्परीरभरन्त्येभ्योऽधि श्रवः पाञ्चजन्यसु कृष्षु. सा पञ्चयाऽ न्यमायुर्दधाना यां मे पलस्तिज मदग्नायो ददुः.. (१६) ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र एवं निषादों के धन से अधिक धन गदपद् रूप में विस्तृत वाग्देवता हमें शीघ्र प्रदान करें. दीर्घायु वाले जमदग्नि आदि ऋषियों ने जो वाणी मुझे दी, वह सूर्य रूपी वाणी मुझे नवीन अन्न वाला बनावे. (१६)

Mandala 1 · Verse 17
śatam meṣān vṛkye māmahānaṁ tamaḥ praṇītam aśivena pitrā | ākṣī ṛjrāśve aśvināv adhattaṁ jyotir andhāya cakrathur vicakṣe

May the cows be steady, the rams strong, and the chariot yoke firm. May Indra protect the falling pins before they break. O chariot, whose axle is not yet broken, come forth before us.

स्थिरौ गावो भवतां वीळूरक्षो मेषां वि वहि मा युगं वि शारि. इन्द्रः पातत्वे ददतां शरीरोरिष्टनेमे अभि नः सचस्व.. (१७) गतिशील अश्व स्थिर हो. रथ का धुरा दृढ हो. दंड एवं जुआ न टूटे. गिरने वाली कीलों को टूटने से पहले ही इंद्र धारण करें. हे नृप न होने वाले नेमीयुक्त रथ! हमारे सामने आओ. (१७)

Mandala 1 · Verse 18
बलं धेहि तनुषु नो बलमिन्द्रान्नुकूलु नः. बलं तोकाय तनयाय जीवसे त्वं हि बलदा असि.. (१८)

Grant us strength in our bodies, O Indra, and favor us with your strength. You are the giver of strength, so grant strength to our children and offspring for their lives.

हे इन्द्र! हमारे शरीरों में बल दो एवं हमारे बैलों को बलवान् करो. हे बल देने वाले इन्द्र! हमारे पुत्र एवं पौत्रों को चिरंजीवी होने के लिए बल दो. (१८)

Mandala 1 · Verse 19
अभि व्ययस्व खदि lastly सारमोजो धेहि स्पन्दने शंशिशपायाम्. अक्ष वीळो वीळित वीळयस्व मा यामादस्मादव जीहिपो नः.. (१९)

May the divine essence and strength be infused into the moving chariot, and may our senses be firmly controlled, so that we are not led astray from this path.

हे इन्द्र! हमारे रथ के सार रूप खदिर तथा शीशम के काठ को दृढ़ करो. हे जुए! हमने तुम्हें दृढ़ बनाया है. तुम दृढ़ बनो. इस चलते हुए रथ से हमें गिरा नहीं देना. (१९)

Mandala 1 · Verse 20
अयमस्मान्वनस्पतिर्मा च हा मा च रीषत्. स्वस्त्या गृहेभ्य आवसा आ विमोचनात्.. (२०)

May this plant protect us, and may it not harm us. May it dwell in our homes with well-being until liberation.

वनस्पतियों से बना हुआ यह रथ हमें न छोड़े और न विनष्ट करे. हम लोग जब तक घर न पहुँचें, जब तक हमारा रथ चले और जब तक हम रथ से घोड़े अलग न कर दें, तब तक हमारा कल्याण हो. (२०)


Mandala 1 · Verse 21
इन्द्रोतिभिर्बहुलाभिर्नो अद्य याच्छेछाभिमधवच्छूर जिन्व. यो नो द्रष्टृधरः सस्पदीष्ट यमु द्रिष्टमस्तु प्राणो जहातु.. (२१)

May Indra, the lord of strength, invigorate us today with his abundant powers. May he who is our protector and sustainer be pleased with us, and may our life-breath never depart.

हे शूर एवं धनस्वामी इन्द्र! हम शत्रूविनाशकारियों को श्रेष्ठ एवं विविध रक्षा उपायों द्वारा प्रसन्न करो. जो हमसे द्वेष करे, वे नीचे गिरे तथा हम जिससे द्वेष करें उसे आप त्याग दें. (२१)

Mandala 1 · Verse 22
परशुं चिद्धि तपति शिम्बलं चिद्धि वृश्चति. उखा चिदिन्द्र येषन्ती प्रयस्ता फेनमस्यूति.. (२२)

Even the axe burns, the cotton tree is cut, and the pot, O Indra, when heated, pours forth foam.

हे इन्द्र! हमारे शत्रु कुल्हाड़ी को देखकर वृक्ष के समान संतप्त हों, सेमल के फूल के समान अनायास ही उनके अंग गिर पड़ें एवं हमारे मंत्रबल से वे भोजन पकाने वाली हाँडी के समान मुँह से फेन गिरावें. (२२)

Mandala 1 · Verse 23
न सायक्स्य चिकिते जनासो लोधं नयन्ति पशु मन्यमानाः. नावाजिने वाजिना हास्यन्ति न गर्दभं पुरो अक्षाययन्ति.. (२३)

Those who are foolish do not understand, nor do they seek to heal, thinking they are wise. They do not praise the swift horse, nor do they lead the donkey forward.

हे मनुष्यो! तुम विश्वामित्र के मंत्रों की शक्ति नहीं जानते हो. तपस्या नष्ट होने के लोभ से चुप बैठे हुए मुझे तुम पशु के समान बांधकर ले जा रहे हो. सर्वज्ञ मूर्ख की हँसी नहीं उड़ाता और न गधे को घोड़े के सामने लाया जाता है. (२३)

Mandala 1 · Verse 24
इम इन्द्र भरतस्य पुत्रा अपापत्वं चिकिर्तुन्ण प्रपित्वम्. हिन्वन्त्यश्वमरुं न नित्यं ज्यावाजं परि पयन्त्याजौ.. (२४)

These sons of Bharata, seeking purity and advancement, invigorate the swift horse, like the ever-moving wind, and surround the chariot in battle.

इस इन्द्र भरतस्य पुत्रा अपापत्वं चिकिर्तुन्ण प्रपित्वम्. हिन्वन्त्यश्वमरुं न नित्यं ज्यावाजं परि पयन्त्याजौ.. (२४)

Mandala 1 · Verse 25
पदे इव निहिते दस्मे अन्तस्तयोरन्यद् गृह्माविरन्यत् । सधीचीना पभ्याइ सा विष्ुची महदेवानां सुरत्वमेकम् ॥ (२५)

The two, like feet, are placed, one within the other; they are united in purpose, yet distinct, revealing the singular divinity of the great gods.

शोभन दिवारात्रि धरती-आकाश के मध्य रखे हुए दो चरणों के समान जान पड़ते हैं. इनमें से रात्रि रूपी चरण गूढ़ एवं दूसरा दिवस रूपी चरण स्पष्ट है. इनके मिलन मार्ग अर्थात् काल को पुण्यात्मा एवं पापरहित दोनों ही प्राप्त करते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (२५)

Mandala 1 · Verse 1
न ता मिनन्ति माविनो न धीरा व्रत देवानां प्रथमा धृवाणि. न रोदसी अद्‌हा वेदाभिनं पर्वता निन्मे तस्विंवासः.. (१)

The wise and steadfast do not measure the eternal, unshakeable vows of the gods. Nor do the heavens and earth, nor the mountains, diminish the strength of the mighty.

मायावी असुर एवं विद्वान् इन्द्र आदि देवों के प्रथम स्थिर एवं प्रसिद्ध कर्मों में बाधा नहीं डालते। द्वेष-भाव से हीन धरती-आकाश प्रजाओं के साथ देवों के लिए विघ्नकारक नहीं बनते। धरती पर ऊँचे खड़े पर्वतों को कोई झुका नहीं सकता. (१)

Mandala 1 · Verse 2
षड्भाराँ एको अचरन्निभृत्यं वर्षिष्ठमुप गाव आगुः। तिस्रो महीरूपपरास्तस्थुरत्या गुहा दे निहिते दर्शका.. (२)

The cows approached the one who moved with six burdens, carrying the most ancient. Three great ones stood firm, placed in the cave, the seers.

एक स्थिर वर्ष छः ऋतओं को धारण करता है. सत्य एवं अतिशय वृद्ध सूर्यस्वरूप संवत्सर को किरणें प्राप्त करती हैं. उत्पन्न और नष्ट होने वाले तीनों लोक एक-दूसरे के ऊपर स्थित हैं. उन में ही स्वर्ग और अंतरीक्ष गुहा में छिपे हैं. एकमात्र धरती ही दिखाई देती है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्रिपाजस्यो वृषभो विश्वरूप उत् त्रयुधा पुरुष प्रजावान्। त्र्यनीकः पतत्ये महिनावान्त्स रतोधा वृषभः शश्रुतीनाम.. (३)

The mighty, all-pervading, and fertile Purusha, the source of all, possesses three forms of strength and three faces, and is the lord of all that moves and is stable.

ग्रीष्म, वर्षा एवं हेमंत-तीन ऋतओं संवत्सर का हृदय हैं एवं वसंत, शरद एवं हेमंत तीन ऋतए स्तन हैं. जल बरसाने वाला, विविध रूपधारी, जौ, गेहूं आदि अनेक प्रकार की प्रजाओं से युक्त, ग्रीष्म, वर्षा तथा शीत तीन गुणों सहित एवं महत्वाशाली संवत्सर आता है. वह वीर्य धारण में समर्थ है एवं सबके लिए जल लाता है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अभीक आसां पदवीरबोध्यादित्यानामहे चारु नाम. आपश्रिद्धस्मा अरमन्त देवी: पृथग्रजन्त: परि भीमवृज्जन.. (४)

The path of the divine is difficult to comprehend, yet their glorious names are praised. The goddesses, dwelling in the waters, rejoiced, scattering their radiant light.

संवत्सर औषधियों के समीप रहकर फल-पुष्पादि उत्पादन के लिए सावधान रहते हैं. मैं आदित्य का क्षेत्र आदि मनोहर नाम बोलता हूँ. द्योतमान एवं अलग-अलग बहने वाले जल चार मास तक संवत्सर को प्रसन्न करते हैं एवं शेष आठ मासों में छोड़ देते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्री षधरस्था सिन्धवस्त्रि: कवीनामुत त्रिमता विदधेषु सम्राट्. ऋतावरीयोषणस्तिसो अप्यास्त्ररा दिवो विदथे पत्यमाना:.. (५)

The three rivers, flowing with divine wisdom, are the source of inspiration for poets and the foundation of cosmic order. They are the ruling powers, the three mothers, who sustain all existence and govern the celestial realms.

हे नदियो! तीन गुण वाले तीन लोक देवों के निवासस्थान हैं. तीनों लोकों के बनाने वाले सूर्य यज्ञों के राजा हैं. जलपूर्ण एवं आकाश में गमन करने वाली इला, सरस्वती एवं भारती परस्पर मिली हुई देवियां यज्ञ के तीनों सवनों में आवें. (५)


Mandala 1 · Verse 6
त्रिरा दिवः सवितर्वाणि दिवेदिदे आ सुवा त्रिनो अहः। त्रिधातु राय आ सुवा वसुनि भग त्राताधिषणे सातये था:.. (६)

O Savitr, the sun, bestow upon us radiance and strength for three days, and three times a day, so that we may attain wealth and prosperity.

हे आदित्य! स्वर्गलोक से प्रतिदिन तीन बार आकर हम लोगों को धन दो. हे सबके द्वारा सेवा योग्य एवं सबके रक्षक आदित्य! हमें पशु, कनक एवं रत्न रूप तीन प्रकार का धन दो. हे वाग्देवी! हमें धनलाभ के लिए प्रेरित करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
त्रिरा देवः सविता सोष्वतीति राजानं मित्रावरुणा सुपाणी. आपश्चिद्दय रोदसी चिदुर्वी रत्नं भिक्षन्तं सवितुः सवाय.. (७)

The divine Savitr, with his radiant hands, bestows kingship upon Mitra and Varuna, while the waters and the earth, vast and wide, seek his precious gifts.

सविता दिन में तीन बार हमें धन दें. दीप्तिमान् एवं शोभन हाथों वाले हम विस्तृत धरती-आकाश, मित्र-वरुण, अंतरिक्ष एवं सविता देव की प्रेरणा से मनचाहा अर्थ चाहते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
त्रिरुत्तमा दूशणा रोचनानि त्रयो राजन्तस्य वीराः. ऋतावान् इषिरा दूळ्भासस्विरा दिवो विद्थे सन्तु देवाः.. (८)

May the divine powers, brilliant and strong, who uphold truth and are difficult to conquer, shine forth in the heavens.

द्युतिमान् तीन उत्तम स्थान हैं, जिन्हें कोई नष्ट नहीं कर सकता. इन तीनों स्थानों में संवत्सर के अग्नि, वायु एवं सूर्य तीन पुत्र सुशोभित होते हैं. यदि कर्मों से युक्त, शीघ्र गति वाले एवं अतिस्करणीय देवगण हमारे यज्ञ के तीनों सवनों में आवें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
मित्रो देवेष्वययु जनाय वृक्बहिषे. इष इश्व्रता अकः.. (९)

May Mitra, the divine friend, bestow prosperity upon us, and may the people, who offer sacrifices, attain abundance.

दिव्य गुण वाले मनुष्यों में जो व्यक्ति कुश छेदन करता है, उसे मित्र देव कल्याणकारी अन्न देते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि. धियो यो नः प्रचोदयात्.. (१०)

We meditate on the supreme radiance of that divine Sun, who inspires our intellects.

हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जिन्होंने हमारी बुद्धि को प्रेरित किया. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
देवस्य सवितुर्वर्यं वाजयन्तः पुरं ध्या. भगस्य रतिममीमहे.. (११)

Seeking the divine Savitr's excellent brilliance, we meditate on the radiant sun, desiring its favor and delight.

अन्न की अभिलाषा करते हुए हम लोग तेजस्वी सविता देव के धन का दान उनकी स्तुति द्वारा चाहते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 1
त्वां ह्यग्ने सदमित्समन्यवो देवासो देवमरतिं न्येरिरि इति कृत्वा न्येरिरि. अमर्त्यं यजत् मर्येष्वा देवमादेवं प्रचेतसं विश्वमादेवं जनत प्रचेतसम्.. (१)

O Agni, the gods, ever vigilant, have placed you, the divine guest, among mortals. They have thus brought forth the immortal, all-knowing divine being, the source of all knowledge, into the human realm.

हे शीघ्रगामी अग्नि देव! बराबर वालों से स्पर्धा करते हुए इंद्रादि देव तुम्हें युद्ध के लिए प्रेरित करते हैं एवं यजमान यज्ञ में देवों को बुलाने के लिए प्रेरणा देते हैं. हे यज योग्य, मरणरहित, तेजस्वि एवं उत्तम-ज्ञान वाले अग्नि! देवों ने तुम्हें यजकर्ता मानवों में आने एवं विभिन्न यज्ञों में उपस्थित रहने के लिए जन्म दिया है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स भ्रातरं वरुणमाग आ ववृत्स्व देवों अच्छा सुमतीं यजवनसं ज्येष्ठं यजवनसम्. ऋतावानामादित्यं चर्बणीधृतं राजनं चर्बणीधृतम्.. (२)

O divine one, turn towards your brother Varuna, the most excellent of sacrificers, the Aditya who upholds the cosmic order and reigns supreme.

हे भ्रातरं वरुण! तुम अपने भाई, हवि द्वारा सेवा योग्य, यज्ञ का भाग करने वाले, अतिशय प्रशंसनीय, जलों के स्वामी, अदिति के पुत्र, जल देकर मनुष्यों को धारण करने वाले, शोभनबुद्धि संपन्न एवं राजमान वरुणदेव को स्तोताओं के प्रति अभिमुख करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
सखे सखायमभ्या ववृत्स्वाशुं न चक्रं रथ्येव रंह्यासमरभ्यं दस्मं रंह्या. अग्ने मळीकं वरुणै सचा विदो मरुत्सु विश्वभानुषु. तोकाय तुजे शुशुचानं शं कृष्यस्मभ्यं दस्मं शं कृष.. (३)

O friend, swiftly turn to your friend, like a chariot wheel that speeds along, a powerful and irresistible force. Agni, with Varuna, you are known among the all-illuminating Maruts. Bring forth prosperity and well-being for our offspring and our sustenance, making our lives auspicious and blessed.

हे दर्शनीय एवं सखा अग्नि! तुम अपने मित्र वरुण को उसी प्रकार हमारी ओर अभिमुख करो, जैसे चलने में कुशल एवं रथ में जुते हुए घोड़े तेज चलने वाले पहिए को लक्ष्य की ओर ले जाते हैं. तुमने वरुण एवं मरुतों की सहायता से सुखकारक हव्य पाया है. हे तेजस्वि अग्नि! हमारे पुत्र-पौत्रों को सुखी करो एवं हमारा कल्याण करो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
त्वं नो अग्ने वरुणस्य विद्मन्देवस्य हेळोऽवयासिसीक्षाः. यजिष्ठो वह्नि तमः शोषुचानो विश्वा द्रेषਾਂसि प्र मुमुग्ध्यस्मत्.. (४)

O Agni, knowing the divine wrath of Varuna, may you avert it. Most worshipful and potent carrier, burn away all our hatreds and release us.

हे उपायों को जानने वाले अग्नि! तुम हमारे ऊपर होने वाला वरुणदेव का क्रोध दूर करो. हे सबसे अधिक यजकर्ता, हव्य के अतिशय वहन करने वाले एवं दीप्तिशाली अग्नि! सभी पापों को हमसे दूर करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अस्य श्रेष्ठ सुभगस्य सन्द्रदेवस्य चित्रतमा मर्त्येषु । शुचिं घृतं न तप्तमध्यायाः स्पार्हा देवस्य महनेव धेनोः.. (५)

This most excellent, fortunate, and radiant deity, most wondrous among mortals, is to be praised. Like a pure, unheated ghee, the divine splendor of the god is to be desired.

परम सेवनीय अग्नि की उत्तम कृपा मनुष्यों में उसी प्रकार नितांत पूज्य है, जिस प्रकार दूध की कामना करने वाले देवों के लिए गाय का शुद्ध, तरल एवं गरम दूध अथवा गाय मांगने वाले मनुष्य के लिए दुधारू गाय. (५)

Mandala 1 · Verse 6
यस्त इध्मं जभर्त्यस्सिद्धिदानो मूर्धांन वा ततपते त्वाया. भुवस्तस्य स्वतवाः पायुग्ने विश्वस्मात्सीमघायत उरुष्य.. (६)

He who brings fuel, bestowing gifts, does not burn his head with your heat. May your strength protect him from all evil and suffering.

हे अग्नि! जो मनुष्य पसीना बहाकर तुम्हारे लिए लकड़ियाँ ढोकर लाता है एवं तुम्हें पाने की अभिलाषा से अपना सर लकड़ी के बोझ से दुःखी करता है, उसे तुम धनशाली

Mandala 1 · Verse 7
यस्ते भRADANAYITE CHIDANM NISHISHANMANMATIMUDIRET. Ā DEVAYURINADHATE DUROṆE TASMINRAYURIVO ASTU DĀSVAN.. (७)

May your life be filled with prosperity and strength, like the sun's rays, and may you live long and happily in your home.

हे अग्नि! जो अन्न की अभिलाषा करने वाले तुम्हारे लिए द्रव्य अन्न धारण करता है, नशा करने वाला सोम अधिक मात्रा में देता है, पूज्य अतिथि के समान तुम्हें उत्तर वेदी पर स्थापित करता है एवं देव बनने की अभिलाषा से तुम्हें अपने घर में प्रज्वलित करता है, उसका पुत्र पक्का आस्तिक एवं विशिष्ट दानी हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
यस्ट्वा దోష య ఉషసి ప్రశంసాతిర్యై వా త్వా కృణవతే హవిష్మాన్. అశ్నో న స్వే దమ ఆ హేమ్యావాన్మహసః పీపోరో దాక్షా౦సమ్.. (८)

He who praises You at dawn, or offers You oblations, O radiant one, enjoys abundant strength and nourishment in his own home.

हे अग्नि! जो पुरुष रात में या प्रातःकाल तुम्हारी स्तुति करता है अथवा हाथ में प्रिय द्रव्य लेकर तुम्हें प्रसन्न करता है, यज्ञशाला में सुनहरी काठी वाले घोड़े के समान घूमते हुए तुम दरिद्रता से उसे बचाओ. (८)

Mandala 1 · Verse 9
यस्तुभ्यमग्ने అమృతాయ దాశద్ దుర్వస్తే కృణవతే యత్సుక్. న స రాయా శశమానో వి యోష్రైమఁహః పరి వర్దధాయో.. (९)

He who offers to you, O Agni, the immortal, for the sake of prosperity and well-being, will not be deprived of wealth or great glory.

हे मरणरहित अग्नि! जो यजमान तुम्हें द्रव्य देता है, अथवा माला हाथ में लेकर तुम्हारी सेवा करता है, वह स्तोत्र को बोलने वाला यजमान धनहीन न हो तथा हिंसकों का कष्ट उसे न छू सके. (९)

Mandala 1 · Verse 10
यस्य त्वमग्ने अधरं जुजोषो देवो मर्त्यस्य सुधितं रणणः. प्रीतेद्सद्बोत्रा सा यविष्ठासाम यस्य विद्धतो वृधासः.. (१०)

O Agni, you who are pleased by the offerings of mortals, you are the divine protector and bestower of strength, whose favor brings prosperity and growth.

हे प्रसन्र, युवक एवं दीप्तिशालि अग्नि! तुम जिस यजमान का भली प्रकार अर्पित एवं हिंसा रहित अन्न खाते हो, वह होता अवश्य प्रसन्न होता है. अग्नि की सेवा करने वाले जिस यजमान का यज्ञ होता आदि बढ़ाते हैं, हम उसी से संबंध रखेंगे. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
आ वो राजनमध्वरस्य रुदं होतारं सत्ययजं रोदस्योः. अग्ने पुरा तनयित्त्वरचिदाविरुद्रयोरूपमवसे कृणुध्वम्.. (१)

O King Agni, the divine priest of sacrifice, who is the truth of both worlds, may you, with your thunderous roar, reveal your form for our protection.

हे यजमानो! वज्र के समान ध्रुवमृत्यु से पहले ही यज्र के स्वामी, देवों को बुलाने वाले, शत्रुओं को रुलाने वाले, धरती-आकाश को अन्न देने वाले एवं सुनहरी प्रभा से युक्त अग्नि की अपनी रक्षा के निमित्त हवि से सेवा करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अयं योनिःकृमा यं वर्य ते जायैव पत्त्य उशती सुवासाः. अर्वाचीनः परिस्तो नि बीडिमा उ ते स्वपाक प्रतीचीः.. (२)

This is the womb from which you are born, O wife, adorned and eager for your husband. May you be brought near, O skilled one, and may your offerings be turned towards the west.

Mandala 1 · Verse 3
आश्वणवते अद्गिप्तय मन्न नृचक्षसे सुमुळीकाय वेधः। देवाय शस्तिम्म्ताय शंस ग्रावेव सोता मधुपुष्पमीळे.. (३)

We praise the divine, the radiant, the all-seeing, the bestower of blessings, the powerful, the wise, with hymns like the pressing stone yields sweet nectar.

हे स्तुतिकर्ताओं! स्तोत्र सुनने वाले, प्रमादरहित, मनुष्यों को देखने वाले, शोभन सुखदाता एवं मरणरहित अग्नि देव के लिए स्तोत्र बोलो. पत्थरों के समान सोम रस निचोड़ने वाले यजमान भी अग्नि की स्तुति करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
त्वं चित्रः शम्या अग्ने अस्या ऋतस्य बोध्युतचित्स्वाधीः। कदा त उक्था सधमाधानि कदा भवन्ति सख्या गृहे ते.. (४)

O Agni, you are the brilliant one, the controller of all actions. When will your hymns and offerings be united in your home, and when will friendship be established there?

हे अग्नि! तुम हमारे इस यज्ञकर्म के देव बनो. हे सत्ययज्ञ वाले एवं शोभनकर्मयुक्त अग्नि! तुम हमारे स्तोत्र को जानो. हमें प्रसन्न करने वाले तुम्हारे स्तोत्र हमारे घरों में कब बोले जावेंगे एवं तुम्हारे साथ मित्रता हमारे घर में कब बनेगी? (४)

Mandala 1 · Verse 5
कथा ह तद्रुणाव त्वमग्ने कथा दिवे गर्हसे कञ आगः। कथा मित्राथ मीळ्हुषे पृथिव्यै ब्रवः कदर्यम्णे कदभगाय.. (५)

O Agni, by what fault do you blame us, and for what transgression? What words do you speak to Mitra and the Earth, and to whom do you offer your gifts?

हे अग्नि! तुम वरुण एवं सविता के समीप हमारी निंदा क्यों करते हो? हमसे क्या अपराध हुआ है? तुमने कामवर्शी मित्र, पृथ्वी, अर्थमा एवं भग को हमारा पाप क्यों बताया? (५)

Mandala 1 · Verse 6
कष्षिणयासु वृधसानो अग्ने कदाताय प्रवत्से शुभये। परिग्मने नास्तत्याय क्षे ब्रवः कदग्ने रुद्राय नृष्णे.. (६)

O Agni, the powerful and ever-increasing, may you be pleased with our offerings for a bright future. May you, the fierce Rudra, protect us from evil and grant us strength.

हे अग्नि! यज में बढ़ते हुए तुम अतिशय बलशाली, शुभ फलदाता एवं सर्वत्र गमनशील अश्विनीकुमारों, वायु, धरती एवं पापियों का नाश करने वाले इंद्र से हमारे पाप के विषय में क्यों कहते हो? (६)

Mandala 1 · Verse 7
कथा महे पुष्णिभराय पुष्पो कदद्राय सुमुखाय हविर्दै। कष्षिणव उरुगायाय रेतो ब्रवः कदग्ने शरवे बृहत्.. (७)

O Agni, the radiant, the giver of strength, the bestower of flowers, the beautiful-faced, the sustainer of the universe, you are the source of all energy. Speak to us, O Agni, with your powerful and expansive brilliance.

हे अग्नि! हमारे पाप की वह कहानी महान् एवं पुष्टिकारक पुषा, पूजनीय एवं हविदाता रुद्र, बहुतों द्वारा प्रशंसित विष्णु अथवा महान् संवत्सर से क्यों कहते हो? (७)

Mandala 1 · Verse 8
कथा शार्थिय मरुताम्ताय कथा सूरे बृहते पृच्छ्यमानः। प्रति ब्रवोऽदितये तुराय साघा दिवो जातवेदश्शिक्रित्वात्.. (८)

The radiant Sun, questioned by the winds, answers the mighty ones, for he is born of the heavens and is the source of all knowledge.

Mandala 1 · Verse 9
ऋतेन ऋतं नियतमीळ आ गोरामा सचा मधुमतपक्वमग्ने, कृष्पा सती रुशता धासिनेषा जामयेण पायय.. (९)

The ordered truth nourishes the divine, bringing forth sweet, pure sustenance for the awakened mind. This offering, bright and potent, is given to the devoted soul for nourishment.

हे अग्नि! हम गायों से उस दूध की याचना करते हैं जो यज्ञ से नित्य संबंधित है, वे गाएं स्वयं सच्ची होते हुए भी मधुर दूध देती हैं. वे गाएं स्वयं काली हैं, पर श्वेत-वर्ण, प्राणधारक एवं प्रजाओं को अमर बनाने वाले दूध से पुष्ट करती हैं. (९)


Mandala 1 · Verse 10
ऋतेन हि ष्मा वृषभश्रिंदतकः पुमाँ अग्निः पायसा पुष्टचेन, अस्पन्दमानो अचरद्दयोधा वृषा शुकं दुदुहे पृश्निस्थः.. (१०)

The powerful, unmoving divine Fire, nourished by pure offerings, sustains all beings and bestows radiant energy.

कामवर्षि एवं श्रेष्ठ अग्नि सत्यरूप एवं पालन करने वाले दूध से भरे रहते हैं. अन्न देने वाले वे अग्नि एक जगह रहकर भी सब जगह चलते हैं. जलवर्षक सूर्य बादलों से जल दुहते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
ऋतेनाद्रि व्यसन्भिदन्तः समङ्गिरसो नवन्त गोभिः, शुन्नं नरः परि षद्नुषामविः स्वरभवज्जाते अग्नौ.. (११)

The mountains are rent asunder by the divine power, and the Angirasas, with their hymns, rejoice in the light. The darkness is dispelled, and the divine fire, born anew, shines forth.

मेधातिथि आदि अंगिरोगोत्रीय ऋषियों ने यज्ञ के द्वारा गायों को रोकने वाले पहाड़ को उखाड़ फेंका था एवं वे अपनी गायों के पास पहुंच गए थे. उन यज्ञनेताओं ने सुख से उषा को पाया था. अरणिमंथन द्वारा अग्नि उत्पन्न होने पर सूर्य देव प्रकट हुए. (११)

Mandala 1 · Verse 12
ऋतेन देवी अमृता अमृत्ता अर्णोभिरापो मधुमद्दिग्गग्ने, वाजी न सग्णेपु प्रस्तुभानः प्र सदमित्सवितवे धन्युः.. (१२)

The divine, immortal Goddess, with her life-giving waters, flows with sweetness, like a swift horse in the heavens, ever ready to bestow wealth upon the Sun.

हे अग्नि! अमृत का कारण, बाधारहित एवं मधुर जल से भरी हुई दिव्य नदियां यज्ञ की प्रेरणा से सदा इस प्रकार बहती रहती हैं, जिस प्रकार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित घोड़ा बढ़ता है. (१२)


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Amaranath Amar


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